नई दिल्ली : भारतीय कुश्ती महासंघ को उस समय झटका लगा जब सुप्रीम कोर्ट ने उसकी उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई थी। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार हाई कोर्ट ने अपने आदेश में विनेश फोगाट को एशियन गेम्स के चयन ट्रायल्स में हिस्सा लेने की अनुमति दी थी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अपील खारिज किए जाने का अर्थ यह नहीं है कि दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा कुश्ती महासंघ के खिलाफ की गई टिप्पणियां पूरी तरह सही थीं। अदालत ने संकेत दिया कि मामले की परिस्थितियों को देखते हुए अब इस विवाद पर आगे विचार करने का कोई विशेष औचित्य नहीं रह गया है।
एशियन गेम्स ट्रायल्स विवाद में WFI की याचिका खारिज
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस अरविंद कुमार की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि यह मामला अब अप्रासंगिक हो चुका है, क्योंकि चयन ट्रायल्स पहले ही आयोजित किए जा चुके हैं। इन ट्रायल्स में विनेश फोगाट ने हिस्सा लिया था, लेकिन वह जीत हासिल नहीं कर सकी थीं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सुनवाई के दौरान भारतीय कुश्ती महासंघ की ओर से दिल्ली हाई कोर्ट की आलोचनात्मक टिप्पणियों को रिकॉर्ड से हटाने की मांग भी की गई, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस अनुरोध को स्वीकार नहीं किया। हालांकि अदालत ने यह स्पष्ट किया कि इन मुद्दों पर कानूनी स्थिति अभी भी खुली हुई है और उसके मौजूदा आदेश को हाई कोर्ट की टिप्पणियों का समर्थन या पुनरावृत्ति नहीं माना जाना चाहिए।
यह विवाद दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा फेडरेशन के रेगुलेटरी ढांचे के फ्रेमवर्क से जुड़ा है। अपने फैसले में हाई कोर्ट ने यह माना था कि कुश्ती महासंघ की चयन नीति (25 फरवरी की) और उसके बाद जारी चयन मानदंडों से जुड़ा सर्कुलर (6 मई का) साफ तौर पर भेदभाव को दिखाते थे। हाई कोर्ट ने महासंघ कि इस नीति की आलोचना की कि इसमें विनेश फोगाट जैसी दिग्गज एथलीटों को अपनी बात कहने के लिए कोई अधिकार नहीं दिया गया था जिन्होंने मातृत्व अवकाश के तहत लंबी छुट्टी ली थी।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस नरसिम्हा ने कहा कि हमें इस बात की चिंता है कि हाई कोर्ट ने इस मामले को जिस तरीके से निपटाया वो सही नहीं था। हाई कोर्ट ने इस पूरे मामले को विनेश फोगाट की मैटरनिटी लीव से जोड़ दिया था। हाई कोर्ट ने इसे जिस तरह से पेश किया उससे ऐसा लगता है मानो यह पूरी घटना उसी एक वजह से हुई हो। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, हाई कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाते हुए जस्टिस नरसिम्हा ने कहा कि हाई कोर्ट के सामने सवाल यह था कि एशियन गेम्स की शर्तें कितनी कानूनी और वैध हैं जिनकी घोषणा 25 फरवरी 2026 को की गई थी और इसमें किसी को चार प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना जरूरी था।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय कुश्ती महासंघ की ओर से दलील दी गई कि चयन से जुड़े नियम और नीतियां सभी खिलाड़ियों पर समान रूप से लागू होती थीं। महासंघ ने कहा कि यह हैरानी की बात है कि बिना किसी ठोस योजना, नियम या विशेष आधार का उल्लेख किए नीति को भेदभावपूर्ण बताया गया। उनके अनुसार यह चयन नीति फरवरी 2026 में ही तैयार कर ली गई थी और इसका पालन सभी पहलवानों के लिए एक समान तरीके से किया गया था। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, गौरतलब है कि विनेश फोगाट ने एशियन गेम्स 2026 के चयन ट्रायल्स में हिस्सा लिया था, लेकिन वह सेमीफाइनल मुकाबले में हार गई थीं। इसी वजह से वह 53 किलोग्राम भारवर्ग की कुश्ती स्पर्धा के लिए एशियन गेम्स में अपनी जगह पक्की नहीं कर सकीं।


