नई दिल्ली: आईपीएल के शुरुआती दौर में कई ऐसे खिलाड़ी सामने आए, जिन्होंने अपनी प्रतिभा से पहचान बनाई, लेकिन समय के साथ वे गुमनाम हो गए। ऐसे ही एक खिलाड़ी हैं Swapnil Asnodkar, जिन्होंने 2008 में राजस्थान रॉयल्स को चैंपियन बनाने में अहम भूमिका निभाई थी।
गोवा के इस बल्लेबाज ने आईपीएल के पहले ही सीजन में शानदार प्रदर्शन करते हुए 9 मैचों में 311 रन बनाए। कोलकाता के खिलाफ अपने डेब्यू मैच में उन्होंने 34 गेंदों पर 60 रन की तूफानी पारी खेलकर प्लेयर ऑफ द मैच का अवॉर्ड जीता। उनकी आक्रामक बल्लेबाजी के कारण उन्हें “गोवा की तोप” के नाम से भी पहचान मिली।
Shane Warne की कप्तानी में खेलते हुए असनोदकर को बड़ा मौका मिला। वॉर्न ने उन पर भरोसा जताया और उन्होंने उस भरोसे को शानदार प्रदर्शन से सही साबित किया। उस सीजन में ग्रीम स्मिथ के साथ उनकी ओपनिंग जोड़ी ने 418 रन जोड़े, जो टीम की सफलता की बड़ी वजह बनी।
हालांकि, पहला सीजन शानदार रहने के बाद उनका करियर ज्यादा आगे नहीं बढ़ सका। 2009 में साउथ अफ्रीका में खेले गए सीजन के दौरान फील्डिंग करते समय उनकी उंगली में गंभीर चोट लग गई। इस इंजरी के कारण उनका प्रदर्शन प्रभावित हुआ और उन्हें टीम में नियमित मौके मिलना कम हो गया।
इसके बाद 2010 और 2011 में भी उन्हें सीमित मौके मिले और 2011 में उन्होंने अपना आखिरी आईपीएल मैच खेला। अपने पूरे आईपीएल करियर में उन्होंने 20 मैचों में 423 रन बनाए, जिसमें दो अर्धशतक शामिल हैं।
घरेलू क्रिकेट में उनका प्रदर्शन लगातार अच्छा रहा। गोवा के लिए खेलते हुए उन्होंने सभी फॉर्मेट मिलाकर 10,000 से ज्यादा रन बनाए और ऐसा करने वाले राज्य के पहले खिलाड़ी बने। इसके बावजूद उन्हें आगे के चयन में नजरअंदाज किया गया।
2019 में उन्होंने क्रिकेट से संन्यास लेकर कोचिंग की राह चुनी। अब वह युवा खिलाड़ियों को तैयार कर रहे हैं और फिलहाल केरल अंडर-23 टीम के हेड कोच हैं। साथ ही उन्हें बीसीसीआई के नेशनल क्रिकेट अकादमी में भी जिम्मेदारियां मिल रही हैं।
स्वप्निल असनोदकर की कहानी यह बताती है कि प्रतिभा और मेहनत के बावजूद कभी-कभी एक चोट या मौके की कमी खिलाड़ी के करियर की दिशा बदल देती है, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और अब कोचिंग के जरिए क्रिकेट को वापस लौटाने में लगे हैं।


