भारत की प्लेइंग इलेवन से बाहर सबसे बड़ा गेम चेंजर, क्या दिखेगी कमी?

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नई दिल्ली: वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप 2025-27 साइकिल में भारतीय टीम अपनी पहली घरेलू टेस्ट सीरीज़ वेस्टइंडीज के खिलाफ खेलेगी। यह सीरीज़ कई मायनों में खास होगी, क्योंकि यह रोहित शर्मा, विराट कोहली और रविचंद्रन अश्विन के संन्यास के बाद घरेलू सरजमीं पर टीम इंडिया की पहली टेस्ट सीरीज़ होगी। खास बात यह है कि 2 अक्टूबर 2025 को भारत, 6 नवंबर 2011 के बाद पहली बार घरेलू मैदान पर बिना रविचंद्रन अश्विन के टेस्ट मैच खेलेगा। भले ही इससे पहले टीम विराट और रोहित के बिना खेल चुकी है, लेकिन अश्विन लगातार इन 14 वर्षों में भारत के सबसे भरोसेमंद और

प्रभावशाली मैच विनर रहे हैं। उनकी अनुपस्थिति में भारतीय गेंदबाज़ी आक्रमण की अग्निपरीक्षा होगी।
रविचंद्रन अश्विन ने 2011 में डेब्यू किया था। इसके बाद से भारतीय टीम ने घरेलू सरजमीं पर 65 टेस्ट मैच खेले और वह हर मैच में खेले। अश्विन ने इन 65 टेस्ट मैचों में 21.57 के औसत से 383 विकेट लिए। इसके अलावा रन भी बनाए। उन्होंने 4 शतक और 8 अर्धशतक की मदद से 1989 रन बनाए। ऐसे में अश्विन का विकल्प ढूंढ़ पाना आसान नहीं होगा।

वेस्टइंडीज के खिलाफ टेस्ट सीरीज के लिए भारत के पास स्पिन गेंदबाजी के बेहतरीन विकल्प हैं। शायद अब कुलदीप यादव को खेलने का ज्यादा से ज्यादा मौका मिले। उन्होंने 22.16 के औसत से 56 विकेट लिए हैं, लेकिन इंग्लैंड दौरे पर सभी पांच टेस्ट मैचों में बाहर रहे। अक्षर पटेल टीम में नहीं थे, लेकिन घरेलू सरजमीं पर उन्होंने अपनी ऑलराउंड क्षमता को शामिल किया है।

रविचंद्रन अश्विन के विकल्प के तौर पर वाशिंगटन सुंदर को देखा जा रहा है। सुंदर को पिछले साल न्यूजीलैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज में मौका मिला था। इसके बाद उन्हें ऑस्ट्रेलिया दौरे पर अश्विन पर तवज्जो दी गई। अश्विन के संन्यास का यह भी एक कारण था। सुदंर ने बल्ले से अच्छा प्रदर्शन किया है। तमिलनाडु के इस स्पिनर ने 13 मैच में 32 विकेट लिए। सुंदर ने बीते एक साल में 9 टेस्ट खेले हैं और 26 विकेट लिए हैं। इस दौरान उन्होंने 487 रन बनाए हैं।

कुलदीप, अक्षर और सुंदर की अगुआई बाएं हाथ के स्पिनर रविंद्र जडेजा करेंगे। जडेजा को टेस्ट क्रिकेट खेलते हुए लगभाग 15 साल हो गए हैं। वह चोटिल ऋषभ पंत की अनुपस्थिति में टीम के उप-कप्तान हैं। अनुभवी जडेजा को गेंद से अच्छा प्रदर्शन करना होगा। इंग्लैंड दौरे पर उन्होंने बल्ले से अच्छा प्रदर्शन किया था, लेकिन गेंद से कुछ खास नहीं कर पाए थे।

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