प्राचीति की अनोखी कहानी, सीए का पेशा छोड़ा और बनीं पहली भारतीय एमएमए रेफरी

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नई दिल्ली : महाराष्ट्र की प्राचीति नागपुरकर ने मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स (एमएमए) की रेफरी बनने का सपना पूरा करने के लिए चार्टर्ड अकाउंटेंसी का पेशा छोड़ दिया। अब वह एशियन गेम्स के किसी मुकाबले में रेफरी की भूमिका निभाने वाली पहली भारतीय बन गई हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार एमएमए में करियर बनाने के अपने फैसले पर प्राचीति को कोई पछतावा नहीं है। उनका कहना है कि अपने पसंदीदा खेल में आगे बढ़ने और इस मुकाम तक पहुंचने का सफर उनके लिए बेहद खास रहा है।

प्राचीति ने एशियाड के सेमीफाइनल मुकाबलों में से एक में मैच रेफरी की भूमिका निभाई। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने बताया कि वह इस साल एशियाई खेल क्वालिफायर और उज्बेकिस्तान व चीन में एशियाई चैंपियनशिप के साथ-साथ दक्षिण-पूर्व एशियाई खेलों में भी ऑफिशियल के तौर पर काम कर चुकी हैं।

एशियन गेम्स की एमएमए प्रतियोगिता में 2 अन्य भारतीय ऑफिशियल भी शामिल थे, लेकिन उन्होंने रेफरी के बजाय जज की भूमिका निभाई। साल 2022 में एमएमए से जुड़ीं प्राचीति नागपुरकर मुंबई में अपना जिम चलाती हैं, जहां वह एमएमए की ट्रेनिंग भी देती हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उनका मानना है कि एशियन गेम्स में एमएमए के शामिल होने और सुचिका तारियाल के कांस्य पदक जीतने से इस खेल को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, एमएमए मुकाबलों में जज और रेफरी के रूप में काम करने वाले अधिकारियों के लिए भी भविष्य में अवसरों का दायरा बढ़ सकता है।

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