नई दिल्ली : थॉमस कप 2026 के सेमीफाइनल में भारत और फ्रांस के बीच शनिवार को खेला गया मुकाबला एक हाई-वोल्टेज ड्रामे जैसा रहा। डेनमार्क के फोरम हॉर्सेंस एरिना में खेले गए इस मैच का माहौल भारतीय और फ्रांसीसी प्रशंसकों के उत्साह से और भी रोमांचक बन गया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार हालांकि अंतिम स्कोर 0-3 रहा और भारत टूर्नामेंट से बाहर हो गया, लेकिन यह आंकड़ा पूरी कहानी नहीं दर्शाता। मैच के दौरान कई मौकों पर भारतीय खिलाड़ियों ने फ्रांस पर दबाव बनाया और वापसी की उम्मीद भी जगाई। इसके बावजूद, निर्णायक पलों में फ्रांसीसी खिलाड़ियों ने संयम और सटीक खेल दिखाते हुए मुकाबले को अपने पक्ष में कर लिया।
इस जीत के साथ फ्रांस ने पहली बार थॉमस कप के फाइनल में जगह बना ली। फ्रांस की इस ऐतिहासिक सफलता के मुख्य सूत्रधार टोमा जूनियर पोपोव और क्रिस्टो पोपोव भाई रहे, जिन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए टीम को मजबूती दी। दोनों खिलाड़ियों ने न केवल अपने-अपने मुकाबलों में बेहतरीन खेल दिखाया, बल्कि रणनीतिक रूप से भी भारतीय टीम पर बढ़त बनाए रखी। एकल और डबल्स दोनों में योगदान देकर उन्होंने टीम को संतुलन प्रदान किया और मैचों का क्रम इस तरह तय किया गया कि उन्हें पर्याप्त आराम भी मिल सके।
भारत के लिए सबसे बड़ा झटका था लक्ष्य सेन का चोट के कारण बाहर होना। उनकी अनुपस्थिति ने टीम संयोजन को प्रभावित किया। पहले सिंगल्स में आयुष शेट्टी को उतारा गया, लेकिन वे दबाव को संभाल नहीं पाए और क्रिस्टो पोपोव के खिलाफ सीधे गेम में हार गए।
दूसरे सिंगल्स में किदांबी श्रीकांत ने अपने अनुभव का बेहतरीन प्रदर्शन किया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने एलेक्स लैनियर को कड़ी टक्कर दी और कई मौकों पर बढ़त भी हासिल की, लेकिन अहम क्षणों में सटीकता की कमी के कारण वे मुकाबला हार गए। तीसरे सिंगल्स में एच. एस. प्रणय ने जबरदस्त संघर्ष दिखाया और शुरुआती बढ़त भी बनाई, लेकिन टोमा जूनियर पोपोव ने अपनी गति और नियंत्रण से मैच का रुख बदल दिया। प्रणय की कुछ अनफोर्स्ड गलतियां अंत में निर्णायक साबित हुईं।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार भारत के लिए निराशाजनक पहलू यह रहा कि डबल्स मुकाबला खेलने का अवसर ही नहीं मिल सका, जो टीम की एक मजबूत कड़ी माना जा रहा था। फ्रांस ने अपने हर मौके का पूरा फायदा उठाते हुए इतिहास रच दिया और पहली बार थॉमस कप के फाइनल में जगह बनाई। इस जीत के साथ फ्रांस खिताबी मुकाबले में पहुंच गया, जबकि हार के बाद भारतीय टीम को कांस्य पदक से ही संतोष करना पड़ा।


