नई दिल्ली : एशियन पैरा गेम्स में 3 स्वर्ण पदक जीतने वाले भारतीय पैरा एथलीट नीरज यादव का 42 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 की रात दिल्ली स्थित अपने फ्लैट में उनकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई। नीरज एफ55 श्रेणी में प्रतिस्पर्धा करते थे। उनकी मौत के कारणों का पता लगाने के लिए पोस्टमार्टम कराया जा रहा था। उन्होंने 2018 के जकार्ता एशियन पैरा गेम्स में भाला फेंक में स्वर्ण पदक जीता था, जबकि 2023 में हांगझोऊ में भाला फेंक और चक्का फेंक में दो और स्वर्ण पदक अपने नाम किए थे।
हाल ही में डोपिंग मामले में निलंबन के कारण वह आइची-नागोया एशियन पैरा गेम्स में हिस्सा नहीं ले सके थे। उनकी मौत की परिस्थितियों की जांच जारी थी। उनकी मौत के कारणों का अब तक आधिकारिक तौर पर खुलासा नहीं हुआ है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार नीरज यादव की मौत से भारतीय पैरा-एथलेटिक्स जगत स्तब्ध है। नीरज यादव ने कथित तौर पर आत्महत्या की है। उन्होंने संभवतः जहर खा लिया था। बुधवार को दिल्ली के GTB अस्पताल में उनका पोस्टमार्टम हुआ।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार रिपोर्ट के मुताबिक, पोस्टमार्ट के समय पैरालंपिक चैंपियन सुमित अंतिल और उनके साथी पैरा-एथलीट विपिन कसाना अस्पताल में मौजूद थे। नीरज यादव की मौत किन परिस्थितियों में हुई, इसका अभी पता नहीं चल पाया है। भारत के मुख्य पैरा-एथलेटिक्स कोच एस सत्यनारायण ने बताया कि उन्हें पता चला है कि नीरज यादव ने आत्महत्या कर ली है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार एस सत्यनारायण ने कहा, ‘‘हां, नीरज यादव ने आत्महत्या कर ली है। मुझे भी यही पता चला है। मुझे बताया गया है कि उसने कल रात अपने फ्लैट पर जहर खा लिया था। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और दुखद है।’’
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार कोच एस सत्यनारायण ने बताया कि डोपिंग के कारण निलंबित होने की वजह से आइची-नागोया एशियन पैरा गेम्स में हिस्सा न ले पाने के कारण नीरज यादव शायद मानसिक तनाव में रहे होंगे। हालांकि, उनकी मौत किन हालात में हुई, यह अब तक साफ नहीं हो पाया है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार एस सत्यनारायण ने बताया, ‘‘वह इन खेलों में हिस्सा लेने के लिए काफी उत्साहित रहे होंगे। एशियन पैरा गेम्स में मेडल जीतने पर सरकार की तरफ से बड़ा नकद इनाम और पक्की नौकरी के मौके मिल सकते हैं, लेकिन उनका निलंबन खत्म नहीं हुआ था, इसलिए वह इसमें हिस्सा नहीं ले पाए। मुमकिन है कि इस बात का उन पर गहरा असर पड़ा हो, लेकिन पक्के तौर पर यह नहीं कहा जा सकता कि वह किस दौर से गुजर रहे थे।’’
7 साल की उम्र में लकवे का शिकार हुए थे
मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले नीरज यादव भारत के बेहतरीन पैरा-एथलीटों में से एक थे। सात साल की उम्र में उन्हें ‘पोस्ट-पोलियो रेसिडुअल पैरालिसिस’ (पोलियो के बाद होने वाला लकवा) हो गया था। इसके बावजूद उन्होंने अपने खेल के सपनों को नहीं छोड़ा। पैरा-एथलेटिक्स में आने से पहले नीरज यादव ने 2005 से 2012 तक व्हीलचेयर टेनिस खेला।
दिल्ली की एथलेटिक्स मीट ने दिखाई राह
नीरज यादव के करियर में बड़ा मोड़ 2015 की दिल्ली स्टेट एथलेटिक्स मीट में आया। एथलेटिक्स मीट में नीरज यादव ने शॉट पुट, जैवलिन थ्रो और डिस्कस थ्रो में स्वर्ण पदक जीते। साल 2018 में जकार्ता में हुए एशियन पैरा गेम्स में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई। वहां उन्होंने पुरुषों के F55 जैवलिन थ्रो इवेंट में 29.84 मीटर की दूरी तय करके एशियाई रिकॉर्ड बनाया और स्वर्ण पदक जीता।
हांगझोऊ एशियन पैरा गेम्स में नीरज यादव ने जीते थे 2 स्वर्ण पदक
इसके बाद 2023 में हांगझू एशियन पैरा गेम्स में नीरज यादव ने जैवलिन और डिस्कस थ्रो में दो और स्वर्ण पदक जीते। इस तरह, एशियन पैरा गेम्स में उनके कुल स्वर्ण पदकों की संख्या तीन हो गई। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार हालांकि, नीरज यादव के करियर पर एक एंटी-डोपिंग मामले का साया पड़ गया। अक्टूबर 2023 में बेंगलुरु में प्रतियोगिता से इतर लिए गए उनके एक सैंपल में ‘स्टैनोजोलोल’ (एक एनाबॉलिक स्टेरॉयड) पाया गया।
इसके बाद नेशनल एंटी-डोपिंग एजेंसी (NADA) ने उन्हें अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया। बाद में नीरज यादव ने एंटी-डोपिंग अनुशासनात्मक प्रक्रिया के तहत अपने सैंपल का DNA टेस्ट कराने की मांग की। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार नीरज यादव का निधन एक ऐसे एथलीट के जीवन का दुखद अंत है, जिसने शारीरिक चुनौतियों को पार करते हुए एशियन पैरा-एथलेटिक्स में शीर्ष स्थान हासिल किया था।


