वैशाली की बड़ी जीत, कैंडिडेट्स टूर्नामेंट में टॉप पर बरकरार; प्रज्ञानानंदा का मुकाबला ड्रॉ

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नई दिल्ली.   साइप्रस में चल रहे प्रतिष्ठित FIDE कैंडिडेट्स टूर्नामेंट में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन जारी है। महिला वर्ग में भारत की ग्रैंडमास्टर वैशाली रमेशबाबू ने 11वें राउंड में रूस की मजबूत खिलाड़ी अलेक्जेंड्रा गोर्याचकिना को हराकर एक और अहम जीत दर्ज की है। इस जीत के साथ वैशाली अंक तालिका में शीर्ष स्थान पर बरकरार हैं और खिताब की प्रबल दावेदार बन गई हैं।

वैशाली ने मुकाबले में शुरुआत से ही संयम और रणनीतिक सोच का प्रदर्शन किया। उन्होंने मध्य खेल में अपने मोहरों की बेहतरीन स्थिति बनाते हुए विरोधी खिलाड़ी पर लगातार दबाव बनाए रखा। आखिरकार उन्होंने मैच अपने नाम कर लिया। इस जीत के बाद उनके 11 राउंड में कुल 7 अंक हो गए हैं, जो उन्हें दूसरे स्थान पर मौजूद खिलाड़ियों से एक अंक आगे रखते हैं। अब टूर्नामेंट में केवल तीन राउंड शेष हैं, ऐसे में उनकी नजर खिताब पर टिकी है।

वहीं ओपन कैटेगरी में भारत के युवा ग्रैंडमास्टर आर प्रज्ञानानंदा का मुकाबला जर्मनी के मथियास ब्लूबाउम के खिलाफ ड्रॉ रहा। इस परिणाम के बाद प्रज्ञानानंदा अंक तालिका में 7वें स्थान पर बने हुए हैं। हालांकि उनके पास अभी भी तीन मुकाबले बाकी हैं, जहां वे बेहतर प्रदर्शन कर अपनी स्थिति सुधार सकते हैं।

कैंडिडेट्स टूर्नामेंट शतरंज की दुनिया का सबसे अहम टूर्नामेंट माना जाता है, क्योंकि यही तय करता है कि मौजूदा विश्व चैंपियन को अगली चुनौती कौन देगा। इस प्रतियोगिता को वर्ल्ड चैंपियनशिप का सेमीफाइनल भी कहा जाता है। इसमें जीत हासिल करने वाला खिलाड़ी सीधे विश्व चैंपियन से मुकाबला करता है।

पिछले संस्करण में भारत के डी गुकेश ने खिताब जीतकर इतिहास रचा था और उन्होंने विश्व चैंपियन डिंग लिरेन को चुनौती दी थी। उनसे पहले दिग्गज विश्वनाथन आनंद ने 1995 में यह उपलब्धि हासिल की थी।  महिला वर्ग की विजेता का मुकाबला मौजूदा वर्ल्ड चैंपियन जू वेनजुन से होगा, जिससे इस टूर्नामेंट का महत्व और बढ़ जाता है।

टूर्नामेंट का फॉर्मेट भी काफी चुनौतीपूर्ण है। इसमें दुनिया के शीर्ष 8 खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं और सभी खिलाड़ी एक-दूसरे के खिलाफ दो-दो मुकाबले खेलते हैं। कुल 14 राउंड के इस टूर्नामेंट में हर जीत पर 1 अंक और ड्रॉ पर 0.5 अंक दिए जाते हैं। अंत में सबसे अधिक अंक हासिल करने वाला खिलाड़ी विजेता बनता है।

भारतीय शतरंज के लिए यह समय बेहद खास है। एक ओर वैशाली खिताब के करीब पहुंच रही हैं, तो दूसरी ओर प्रज्ञानानंदा जैसे युवा खिलाड़ी लगातार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी छाप छोड़ रहे हैं। आने वाले तीन राउंड यह तय करेंगे कि भारत इस बार भी कैंडिडेट्स टूर्नामेंट में नई उपलब्धि हासिल कर पाता है या नहीं।

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