‘हम ऐसा वातावरण बनाना चाहते हैं जहां खिलाड़ी मानसिक मुद्दों के बारे में ईमानदारी से बात करें’

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नई दिल्ली। बांग्लादेश क्रिकेट टीम के मुख्य कोच रसेल डोमिंगो (Russell Domingo) ने कहा है कि वे टीम में ऐसा वातावरण बनना चाहते हैं जहां खिलाड़ी अपने शारीरिक ही नहीं, बल्कि मानसिक मुद्दों पर भी ईमानदारी से बात कर सकें। डोमिंगो ने यह भी कहा कि उन्हें उम्मीद है कि खिलाड़ी अपने मानसिक स्वास्थ्य के बारे में ईमानदार होंगे। क्रिकेटर बहुत हम मानसिक मुद्दों के बारे में किसी अन्य या फिर बोर्ड को बताते हैं।

डोमिंगो ने क्रिकबज को बताया, “मानसिक थकान के बारे में मुझे लगता है कि कुछ खिलाड़ियों को ईमानदार होने और इसके बारे में खुलने की जरूरत है। सभी खिलाड़ी उन पहलुओं के बारे में बात करने के लिए सहज नहीं होंगे, लेकिन हम एक ऐसा वातावरण बनाना चाहते हैं, जहां हमारी टीम में, हमारे खिलाड़ी इस बारे में खुलकर बात कर सकें कि वे कैसा महसूस कर रहे हैं और क्या उन्हें ब्रेक की जरूरत है और क्या यह मानसिक या शारीरिक है।”

एलीट क्रिकेटरों का मानसिक स्वास्थ्य तब सुर्खियों में आ गया जब ऑस्ट्रेलियाई टीम के ऑलराउंडर ग्लेन मैक्सवेल ने अपनी अनिर्दिष्ट (unspecified) समस्याओं से निपटने के लिए ब्रेक लिया, उसके बाद युवा बल्लेबाज निक मैडिसन भी आगे आए। स्टीव हैरिसन, मार्कस ट्रेस्कोथिक और ग्रीम फाउलर जैसे अंग्रेजी खिलाड़ी भी अवसाद से निपटे हैं। डोमिंगो ने कहा कि यह महत्वपूर्ण है कि क्रिकेटर किसी भी कठिनाइयों के बारे में साझा करें।

बांग्लादेशी कोच रसेल डोमिंगो ने कहा है, “हमें सम्मान मिला है, क्योंकि यह खेल का एक महत्वपूर्ण पहलू है।” पूर्व वनडे कप्तान मशर्फे मुर्तजा ने बांग्लादेश क्रिकेट के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर चर्चा की थी। उन्होंने कहा कि उनके देश में सामाजिक-सांस्कृतिक (Socio-cultural) कारक ऐसे हैं कि मानसिक मुद्दों को अभी भी एक टैबू माना जाता है और इस प्रकार खिलाड़ी उनसे बात करने से हिचकते हैं। बहुत कम लोग हैं जो इस बारे में बात करना चाहते हैं।