जब मीराबाई चानू ने सोचा था छोड़ देंगी वेटलिफ्टिंग, फिर ऐसे लौटा आत्मविश्वास

0

नई दिल्ली : मीराबाई चानू… आज यह नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है। भारत में जहां अक्सर गोल्डन बॉय की चर्चा होती है, वहीं मणिपुर के एक छोटे से शहर से निकलकर ओलंपिक और कॉमनवेल्थ गेम्स के पोडियम तक पहुंचने वाली मीराबाई चानू भारत की गोल्डन गर्ल बन चुकी हैं। ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेल 2026 में 48 किलोग्राम भारवर्ग में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय वेटलिफ्टर के इस सुनहरे सफर के पीछे संघर्ष, मेहनत और जुनून की प्रेरणादायक कहानी छिपी है। कॉमनवेल्थ गेम्स में यह उनका लगातार तीसरा गोल्ड मेडल है, जिसके साथ उन्होंने स्वर्ण पदकों की हैट्रिक पूरी कर इतिहास में अपना नाम दर्ज करा लिया।

इस स्वर्णिम हैट्रिक की शुरुआत 2018 कॉमनवेल्थ गेम्स से हुई थी, लेकिन इसी दौर में मीराबाई चानू के जीवन में एक बड़ा बदलाव भी आया। उस समय उन्होंने वेटलिफ्टिंग छोड़ने तक का मन बना लिया था। टोक्यो ओलंपिक में रजत पदक जीतने के बाद दुनिया ने उनके शुरुआती संघर्ष और कठिन परिस्थितियों से भरे सफर को जाना था। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अब ग्लास्गो कॉमनवेल्थ गेम्स में इतिहास रचने के बाद गोल्डन गर्ल मीराबाई चानू ने बातचीत में अपने जीवन का वह अनसुना किस्सा साझा किया, जब वह इस खेल से दूर जाने का विचार कर रही थीं। यह घटना 2018 कॉमनवेल्थ गेम्स के बाद की है, जब स्वर्ण पदक जीतने के बावजूद मीराबाई करीब 5-6 महीने तक ट्रेनिंग नहीं कर पाई थीं और उस दौर ने उनके करियर को एक नई दिशा दी।

मीराबाई चानू क्यों लेना चाहती थीं वेटलिफ्टिंग से संन्यास?

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार मीराबाई चानू ने बातचीत में अपने करियर के सबसे कठिन दौर को याद किया। उन्होंने बताया कि 2018 कॉमनवेल्थ गेम्स के बाद का समय उनके जीवन का सबसे मुश्किल दौर था, जहां उन्होंने अपना पहला स्वर्ण पदक जीता था। मीराबाई ने कहा कि इसके बाद उन्हें पीठ की चोट से जूझना पड़ा, जिससे वह मानसिक और शारीरिक रूप से काफी टूट गई थीं। उन्होंने करीब 5 महीने तक रिकवरी की और फिर वापसी की कोशिश शुरू की। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार मीराबाई ने बताया कि उस समय वह इतनी परेशान हो गई थीं कि उन्होंने अपने कोच विजय शर्मा से भी कह दिया था, “सर, अब मैं नहीं कर पाऊंगी।”

मीराबाई चानू ने अपने उस मुश्किल दौर को याद करते हुए आगे बताया कि वह समय उनके जीवन की सबसे बड़ी चुनौती थी। उन्होंने कहा कि उस वक्त कई बड़े मुकाबले सामने थे और सभी को उनसे काफी उम्मीदें थीं, लेकिन चोट ने उन्हें पूरी तरह तोड़ दिया था। हालांकि, उनकी फैमिली, खासकर उनकी मां ने उन्हें मजबूत बनाए रखा और लगातार हौसला दिया। उनकी मां ने समझाया कि एक खिलाड़ी के जीवन में मुश्किलें आती रहती हैं, लेकिन उनका सामना करके आगे बढ़ना ही सफलता की राह है। इसके बाद कोच विजय शर्मा ने भी मीराबाई की तकनीक और डाइट में बदलाव किए और उन्हें वापसी के लिए नई रणनीति बताई। परिवार और कोच के समर्थन से मीराबाई ने अपना फैसला बदला और एक बार फिर मेहनत के दम पर शानदार वापसी की।

मीराबाई ने रखी खेल व्यवस्था को मजबूत करने की मांग

इसके बाद मीराबाई चानू ने देश में वेटलिफ्टिंग को और मजबूत बनाने तथा इस खेल में आने वाली चुनौतियों पर बात करते हुए सरकार से खास मांग की। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा कि एक समय भारतीय वेटलिफ्टिंग काफी पीछे चली गई थी, लेकिन अब कई युवा खिलाड़ी इस खेल में आगे आ रहे हैं। ज्ञानेश्वरी और मार्टिना जैसे खिलाड़ियों का जिक्र करते हुए मीराबाई ने कहा कि इन प्रतिभाओं को आगे बढ़ने के लिए विशेष सहयोग की जरूरत है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा, “मैं उन्हें सिखा सकती हूं, टिप्स दे सकती हूं, लेकिन खिलाड़ियों के लिए बेहतर खान-पान, रहने की सुविधा और अच्छे ट्रेनिंग सेंटर की व्यवस्था सरकार की ओर से ही पूरी हो सकती है।” मीराबाई ने सरकार से अपील की कि युवा वेटलिफ्टरों को जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन कर सकें।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार मीराबाई चानू ने आगे कहा,“मैं ही मणिपुर से हूं वहां कोई ट्रेनिंग सेंटर नहीं हैं। हमें घर से बहुत दूर रहना पड़ता है ट्रेनिंग के लिए। वहां कोई सुविधाएं नहीं हैं। मैने पटियाला (पंजाब) में पहले ट्रेनिंग की। उसके बाद मोदी नगर (यूपी) में आई। वहां मैंने और सर ने (विजय शर्मा) एक अकेडमी भी खोली, मैं वहां ट्रेन करती हूं बच्चों को, सिखाती हूं , सर भी ट्रेनिंग देते हैं। तो हमें घर से बहुत दूर रहना होता है, लंबे समय तक हम परिवार से मिल नहीं पाते। यह मांग है मेरी बस सरकार से कि युवाओं को आगे बढ़ाने के लिए उनके लिए यह बेसिक सुविधाएं मुहैया करवाई जाएं। हर जगह ट्रेनिंग सेंटर होने चाहिए और नेशनल कैंप बढ़न चाहिए।”

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने युवाओं के नाम एक खास संदेश देते हुए कहा,“अभी इंडिया में बहुत कुछ चल रहा है, अच्छा नहीं लगता देख कर कि क्या हो रहा है? हालांकि सरकार भी अच्छा कर रही है लेकिन यंग जनरेशन पर हमें और ज्यादा फोकस करने की जरूरत है। वहीं युवाओं को जो भी खेल पसंद है उसमें आगे बढ़ना चाहिए। बलिदान, मुश्किलों से हारना नहीं है, हमें आगे बढ़ना है। वहीं मैं चाहती हूं कि ज्यादा से ज्यादा महिलाएं स्पोर्ट्स में आगे आयें और इंडिया का नाम आगे बढ़ाएं।”

मीराबाई चानू के शानदार करियर में ओलंपिक रजत पदक, कॉमनवेल्थ गेम्स के तीन स्वर्ण और एक रजत पदक के साथ-साथ वर्ल्ड चैंपियनशिप के कई खिताब शामिल हैं। अब उनकी नजरें एशियन गेम्स 2026 में पदक जीतने पर टिकी हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार मीराबाई ने बताया कि उनकी पसंदीदा डिश पिज्जा भी वह एशियन गेम्स में सफलता हासिल करने के बाद ही खाएंगी। उनका लक्ष्य एक बार फिर कड़ी मेहनत के दम पर देश का मान बढ़ाना और तिरंगे को ऊंचा रखना है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here