नई दिल्ली. भारतीय क्रिकेट में बिहार की नई सनसनी के रूप में 15 वर्षीय अक्षरा गुप्ता तेजी से सुर्खियां बटोर रही हैं। बिहार महिला अंडर-19 वनडे ट्रॉफी में उन्होंने सिर्फ 126 गेंदों में नाबाद 306 रन की विस्फोटक पारी खेलकर सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया। उनकी इस पारी में 55 चौके और 8 छक्के शामिल रहे। उन्होंने महज 16 गेंदों में अर्धशतक और 34 गेंदों में शतक पूरा किया। इस धमाकेदार प्रदर्शन के बाद क्रिकेट जगत में उन्हें ‘फीमेल वैभव सूर्यवंशी’ कहा जाने लगा है।
नेपाल सीमा से सटे बिहार के रक्सौल की रहने वाली अक्षरा ने आठ साल की उम्र में क्रिकेट खेलना शुरू किया। उनके पिता राज किशोर शाह, जो चिकन की दुकान चलाते हैं, ने बेटी के जुनून को देखते हुए घर के पीछे ही अभ्यास के लिए नेट और पिच तैयार करवा दी। मां रीना देवी रोज सुबह उन्हें अभ्यास के लिए तैयार करती थीं और फिटनेस पर विशेष ध्यान देती थीं। चाचा रामकृपा ने शुरुआती दिनों में थ्रोडाउन कराकर उनकी तकनीक को निखारा। वर्ष 2020 से नियमित प्रशिक्षण शुरू करने वाली अक्षरा आज भी प्रतिदिन करीब पांच घंटे अभ्यास करती हैं।
अक्षरा का क्रिकेट सफर लगातार नई ऊंचाइयों तक पहुंच रहा है। वर्ष 2024 में उन्हें बिहार अंडर-19 टीम की कप्तानी मिली और 14 वर्ष की उम्र में ही उन्होंने बिहार की सीनियर महिला टीम में जगह बनाकर सबसे कम उम्र की सीनियर महिला क्रिकेटर बनने का गौरव हासिल किया। वह एक ही सीजन में बीसीसीआई के अंडर-15, अंडर-19 टी-20, अंडर-19 वनडे और अंडर-23, चारों आयु वर्ग के टूर्नामेंट खेलने वाली बिहार की पहली महिला क्रिकेटर भी बनीं। ट्रिपल सेंचुरी के चार दिन बाद उन्होंने 68 गेंदों में 164 रन की एक और विस्फोटक पारी खेलकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा दिया।
अक्षरा और वैभव सूर्यवंशी के बीच कई समानताएं हैं। दोनों बिहार से हैं, दोनों बाएं हाथ के आक्रामक बल्लेबाज हैं और शुरुआत से ही गेंदबाजों पर दबाव बनाने में विश्वास रखते हैं। यही वजह है कि सोशल मीडिया और क्रिकेट जगत में अक्षरा को ‘फीमेल वैभव सूर्यवंशी’ कहा जा रहा है। अक्षरा की प्रेरणा भारतीय स्टार बल्लेबाज स्मृति मंधाना हैं, जबकि विराट कोहली की फिटनेस और आक्रामक सोच उन्हें बेहद पसंद है। उनका सपना भारतीय महिला क्रिकेट टीम की जर्सी पहनकर देश का प्रतिनिधित्व करना और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी पहचान बनाना है।


