सरफराज अहमद के लिए पाकिस्तान टेस्ट टीम की कोचिंग बन सकती है सबसे उपयुक्त भूमिका

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कराची/लाहौर. पाकिस्तान के पूर्व कप्तान Sarfaraz Ahmed ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने के कुछ ही समय बाद पाकिस्तान टेस्ट टीम के मुख्य कोच की जिम्मेदारी संभाल ली है। यह फैसला भले ही कई लोगों को चौंकाने वाला लगा हो, लेकिन पाकिस्तान क्रिकेट के हालात और सरफराज की नेतृत्व क्षमता को देखते हुए इसे उनके लिए सबसे उपयुक्त भूमिका माना जा रहा है।  करीब दो महीने पहले अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहने वाले सरफराज हाल ही में पाकिस्तान अंडर-19 टीम के साथ जिम्बाब्वे दौरे पर मेंटर के रूप में गए थे। हालांकि वहां उन्होंने केवल मार्गदर्शक की भूमिका नहीं निभाई, बल्कि खिलाड़ियों के साथ मैदान पर अभ्यास, थ्रोडाउन और रणनीतिक चर्चाओं में भी सक्रिय रूप से हिस्सा लिया। यही अनुभव उनके कोचिंग करियर की शुरुआत का आधार बना।

पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने उन्हें उस समय टेस्ट टीम की जिम्मेदारी सौंपी है जब टीम लगातार उतार-चढ़ाव से गुजर रही है। इससे पहले ऑस्ट्रेलिया के पूर्व तेज गेंदबाज और कोच Jason Gillespie इस पद पर थे, जबकि अंतरिम दौर में Aaqib Javed ने टीम की कमान संभाली थी।  सरफराज की सबसे बड़ी ताकत हमेशा उनकी कप्तानी और खिलाड़ियों को साथ लेकर चलने की क्षमता रही है। वर्ष 2016 में उन्होंने Shahid Afridi के बाद पाकिस्तान टी20 टीम की कप्तानी संभाली थी और टीम को दुनिया की नंबर-1 टी20 टीम बनाने में अहम भूमिका निभाई। उनके नेतृत्व में पाकिस्तान ने लगातार 11 टी20 सीरीज जीतीं और 2017 में आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी का खिताब भी अपने नाम किया। वह Imran Khan के बाद पाकिस्तान को बड़ा आईसीसी वनडे खिताब दिलाने वाले दूसरे कप्तान बने।

हालांकि बतौर बल्लेबाज और विकेटकीपर उनका प्रदर्शन करियर के अंतिम वर्षों में कमजोर पड़ गया था, लेकिन खेल को समझने और टीम को संभालने की उनकी क्षमता हमेशा चर्चा में रही। यही कारण है कि अब उन्हें कोच के रूप में बेहतर विकल्प माना जा रहा है। पाकिस्तान के मौजूदा टेस्ट कप्तान Shan Masood के साथ सरफराज के रिश्ते काफी अच्छे माने जाते हैं। दोनों ने साथ में लंबे समय तक क्रिकेट खेला है। ऐसे में माना जा रहा है कि सरफराज की मौजूदगी मसूद के लिए दबाव कम करने और टीम में बेहतर माहौल बनाने में मददगार साबित हो सकती है। हालांकि कुछ रिश्तों में चुनौतियां भी सामने आ सकती हैं। विकेटकीपर Mohammad Rizwan और सरफराज के बीच टीम में जगह को लेकर पहले प्रतिस्पर्धा रही है। वहीं Babar Azam के कप्तान बनने के बाद सरफराज लंबे समय तक टीम से बाहर रहे थे। ऐसे में इन समीकरणों पर भी सभी की नजर रहेगी।

इसके बावजूद क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि सरफराज का स्वभाव खिलाड़ियों को साथ लेकर चलने वाला है। अंडर-19 महिला टीम के साथ काम करते समय भी उन्होंने खिलाड़ियों के साथ व्यक्तिगत स्तर पर जुड़कर काम किया था। वे अभ्यास के बाद खिलाड़ियों के साथ समय बिताते थे और टीम में सकारात्मक माहौल बनाने की कोशिश करते थे।  अब टेस्ट टीम की जिम्मेदारी मिलने के बाद सरफराज के सामने सबसे बड़ी चुनौती पाकिस्तान क्रिकेट को स्थिरता देना होगी। पाकिस्तान टीम में प्रतिभा की कमी नहीं है, लेकिन लगातार प्रदर्शन और सही दिशा में आगे बढ़ना टीम के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।  अगर सरफराज अपनी नेतृत्व क्षमता और खिलाड़ियों के साथ बेहतर तालमेल का फायदा उठा पाए, तो वह पाकिस्तान टेस्ट क्रिकेट को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

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