नई दिल्ली: भारत और श्रीलंका की संयुक्त मेजबानी में सितंबर से नवंबर के बीच होने वाले महिला एकदिवसीय विश्व कप के शेड्यूल में बदलाव की संभावना बढ़ गई है। बेंगलुरु के एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम में मैच कराने को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है, क्योंकि कर्नाटक राज्य क्रिकेट संघ (KSCA) को अब तक स्थानीय अधिकारियों से अनुमति नहीं मिली है। यह स्थिति तब बनी जब रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) के आईपीएल खिताब जीतने के जश्न के दौरान भगदड़ में 11 लोगों की मौत हो गई थी। सुरक्षा चिंताओं के चलते स्टेडियम में आयोजन को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
महत्वपूर्ण मुकाबलों की मेजबानी पर संशय
चिन्नास्वामी स्टेडियम को 30 सितंबर को विश्व कप के उद्घाटन मैच और एक सेमीफाइनल की मेजबानी करनी है। अगर पाकिस्तान फाइनल में नहीं पहुंचता, तो यहां खिताबी मुकाबला भी खेला जा सकता है। इसके अलावा बेंगलुरु में इंग्लैंड बनाम साउथ अफ्रीका (3 अक्टूबर), भारत बनाम बांग्लादेश (26 अक्टूबर) और दूसरा सेमीफाइनल (30 अक्टूबर) भी निर्धारित हैं। अनिश्चितता को देखते हुए भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने KSCA को 9 अगस्त तक आवश्यक अनुमति प्राप्त करने का समय दिया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने कहा कि बोर्ड इस मामले से अवगत है और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) के संपर्क में है। अगर समयसीमा तक अनुमति नहीं मिली तो बीसीसीआई अन्य स्थानों पर मैच कराने पर विचार करेगा।
जांच रिपोर्ट में स्टेडियम पर गंभीर टिप्पणियां
कर्नाटक सरकार द्वारा गठित जांच आयोग ने 4 जून को हुई भगदड़ की मीडिया रिपोर्ट के अनुसार में स्टेडियम की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठाए हैं। आयोग के अध्यक्ष जस्टिस जॉन माइकल कुन्हा ने सिफारिश की है कि बड़े आयोजनों को ऐसी जगहों पर शिफ्ट किया जाए जो भीड़ के लिए सुरक्षित हों। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार कहा गया कि 1974 में बने इस स्टेडियम का डिजाइन और संरचना सामूहिक कार्यक्रमों के लिए अनुपयुक्त और असुरक्षित है। इसके बाद बैंगलोर इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई कंपनी (BESCOM) ने अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन न करने पर स्टेडियम की बिजली आपूर्ति काट दी।
KSCA की मजबूरी और तैयारी
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार KSCA ने विश्व कप की मेजबानी के लिए सरकार को पत्र लिखा है, लेकिन अभी तक कोई सकारात्मक संकेत नहीं मिला। इस बीच, उसने महाराजा कप टी20 टूर्नामेंट को बंद दरवाजों के पीछे आयोजित करने की योजना बनाई थी, लेकिन अनुमति न मिलने के कारण इसे मैसूर शिफ्ट कर दिया। चिन्नास्वामी को चुने जाने का कारण इसकी लोकेशन और कनेक्टिविटी है। कोलंबो से महज़ 90 मिनट की उड़ान दूरी पर स्थित यह स्टेडियम इमिग्रेशन सेंटर से लैस है, जिससे पाकिस्तान समेत अन्य टीमों के आवागमन में आसानी होती है।
दक्षिण भारत में विकल्प तलाश रहा बीसीसीआई
अगर बेंगलुरु से मैच छिनते हैं, तो बीसीसीआई के पास दक्षिण भारत में हैदराबाद एक संभावित विकल्प है। हालांकि, हैदराबाद क्रिकेट एसोसिएशन (HCA) फिलहाल अपने आंतरिक विवादों और पदाधिकारियों पर लगे धन के दुरुपयोग व जालसाजी के आरोपों से जूझ रहा है। ऐसे में बीसीसीआई किसी भी आखिरी समय के बदलाव से बचना चाहता है और इसलिए समय रहते वैकल्पिक स्थल पर विचार कर रहा है। अब सारी नज़रें 9 अगस्त पर टिकी हैं, जब यह तय होगा कि बेंगलुरु को महिला विश्व कप के महत्वपूर्ण मुकाबलों की मेजबानी मिलेगी या नहीं।


