Asia Cup: जॉन राइट की डांट से लेकर 219 रनों तक, वीरेंद्र सहवाग की अनोखी क्रिकेट कहानी

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नई दिल्ली: भारत के पूर्व सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग न सिर्फ अपने आक्रामक बल्लेबाज़ी के लिए प्रसिद्ध थे, बल्कि मैदान के बाहर भी खुलकर राय रखने के लिए जाने जाते थे। हालांकि, इसी आदत ने उन्हें कभी-कभी शर्मिंदगी में भी डाल दिया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार ऐसा 2004 में हुआ, जब भारत एशिया कप की तैयारी कर रहा था। सहवाग ने भविष्यवाणी की कि वह टूर्नामेंट में दोहरा शतक लगा सकते हैं, जिसके कारण उन्हें तब के राष्ट्रीय कोच जॉन राइट से कड़ी फटकार भी सुननी पड़ी।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार दाम्बुला में संयुक्त अरब अमीरात के खिलाफ शुरुआती दौर के मैच से पहले वीरेंद्र सहवाग ने कहा, “अगर मैं 50 ओवर क्रीज पर टिक सकता हूं, तो दोहरा शतक लगा सकता हूं। कई बल्लेबाज ऐसा कर सकते हैं, बशर्ते वे पूरे 50 ओवर बल्लेबाजी करें। वनडे में दोहरा शतक लगाना आसान नहीं है, लेकिन नामुमकिन भी नहीं।”उस समय वनडे में उच्चतम व्यक्तिगत स्कोर पाकिस्तान के सलामी बल्लेबाज सईद अनवर के 1997 में बनाए गए 194 रन थे।

चार दिन बाद भारत के पहले मैच में यूएई के खिलाफ वीरेंद्र सहवाग तीन गेंदों के भीतर बिना खाता खोले पवेलियन लौट गए। पूरे टूर्नामेंट में वह अर्धशतक तक नहीं पहुँच सके और क्रमशः 0, 37, 16, 1, 81 और 5 रन ही बना पाए। नजफगढ़ के नवाब के नाम से मशहूर सहवाग का बल्ला उस साल पूरी तरह ठंडा रहा। 26 पारियों में उन्होंने केवल 671 रन बनाए, औसत 25.80 का रहा। यह साल सहवाग के लिए 2001 और 2011 के बीच का सबसे खराब वनडे सीजन साबित हुआ, जिसमें उनका औसत उस दशक के किसी भी साल में सबसे कम था।

वीरेंद्र सहवाग: ‘क्रिकेट आपका मजाक उड़ा देगा’

तीन साल बाद, 2007 में प्रकाशित अपनी किताब ‘इंडियन समर्स’ में भारतीय टीम के मुख्य कोच (2000-05) रहे जॉन राइट ने एशिया कप से पहले मीडिया में वीरेंद्र सहवाग की अहंकारी टिप्पणियों की विशेष रूप से आलोचना की। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार राइट ने लिखा, “जब हम 2004 में फिर से एकजुट हुए, तो यह विश्व कप के बाद के हैंगओवर जैसा था, बल्कि उससे भी बदतर। पाकिस्तान में जीत के बाद कहा जा रहा था कि यह अब तक की सर्वश्रेष्ठ भारतीय टीम है।”

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार राइट ने लिखा, “उस देश में जहां पारंपरिक रूप से महान बल्लेबाजों को ही नायक माना जाता रहा, हमारे तेज गेंदबाज इरफान पठान और लक्ष्मीपति बालाजी भी नायक बन गए थे। हमारा पहला टूर्नामेंट, एशिया कप, एक नियति का नतीजा माना जाता था और मीडिया में कुछ हद तक अहंकार भी देखा गया, जैसे कि वीरेंद्र सहवाग ने कहा कि अगर वह 50 ओवर बल्लेबाजी करें तो एकदिवसीय मैच में 200 रन बना सकते हैं।”

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार राइट ने बताया, ‘इसने मुझे मेरे पुराने डर्बीशायर कप्तान, दक्षिण अफ्रीकी ऑलराउंडर एडी बार्लो की बात याद दिला दी। यह उन्होंने मुझसे तब कही थी जब मैंने एक बड़े शतक के बाद तीन आसान असफलताएं झेली थीं। उन्होंने कहा था- अगर आप क्रिकेट का मजाक उड़ाएंगे तो क्रिकेट आपका मजाक उड़ाएगा।’ शायद ऐसा ही कुछ वीरेंद्र सहवाग के साथ हुआ। सहवाग उस सीजन अपने पहले 13 वनडे मैचों में एक अर्धशतक ही लगा पाए।

हालांकि, अपने अंतरराष्ट्रीय करियर के अंतिम दिनों में, सात सीजन बाद वीरेंद्र सहवाग ने इसका बदला ले लिया। भारत की वनडे विश्व कप जीत के कुछ महीनों बाद, दिसंबर 2011 में इंदौर के होल्कर स्टेडियम में उन्होंने वेस्टइंडीज के गेंदबाजों की धज्जियां उड़ाईं। एमएस धोनी की अनुपस्थिति में टीम की कप्तानी करते हुए सहवाग ने केवल 146 गेंदों में 25 चौकों और 7 छक्कों की मदद से 219 रनों की शानदार पारी खेली।

सहवाग की यह पारी किसी वनडे कप्तान का सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर साबित हुई। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने भारत को एकदिवसीय मैचों में अब तक के सर्वोच्च स्कोर 418/5 तक पहुंचाया और सचिन तेंदुलकर के बाद दोहरा शतक बनाने वाले दूसरे भारतीय बल्लेबाज बने। यह सहवाग का आखिरी वनडे शतक भी रहा। उल्लेखनीय है कि उन्होंने सात सीजन पहले एशिया कप में की गई भविष्यवाणी के बावजूद 2011 की सर्दियों में 50 ओवर खेले बिना ही दोहरा शतक पूरा कर दिखाया।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अपने करियर को अलविदा कहने के एक दशक बाद भी ‘मुल्तान के सुल्तान’ वीरेंद्र सहवाग के नाम कुछ चौंकाने वाले अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड दर्ज हैं। उनका उच्च स्ट्राइक-रेट और शतकों की भूख सभी प्रारूपों में उनके करियर की खास पहचान रही। वह वनडे और टेस्ट दोनों में 7,500 रन बनाने वाले इकलौते सलामी बल्लेबाज हैं। इसके अलावा, वह इतिहास में दो तिहरे शतक बनाने वाले चार टेस्ट बल्लेबाजों में से एक हैं और इस प्रारूप में सबसे तेज 300 रन बनाने का रिकॉर्ड भी उनका है। सहवाग के साहसिक और बेबाक रवैये से विपक्षी गेंदबाजों का मनोबल अक्सर टूट जाता था।

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