नई दिल्ली। भारत और पाकिस्तान की क्रिकेट टीमें भले ही कई बार आमने-सामने आई हों, लेकिन टूर्नामेंट के फाइनल में उनकी भिड़ंत हमेशा खास रही है। पिछले 40 सालों में दोनों देश पांच बड़े फाइनल मुकाबलों में उतरे और हर बार क्रिकेट प्रेमियों ने यादगार लम्हे देखे। 1985 में मेलबर्न में हुए विश्व चैंपियनशिप ऑफ क्रिकेट के फाइनल में कपिल देव और शिवरामकृष्णन की गेंदबाज़ी से पाकिस्तान 176 पर सिमट गया था। इसके बाद श्रीकांत और शास्त्री की बल्लेबाज़ी से भारत ने आसान जीत दर्ज की। ठीक अगले ही साल 1986 में शारजाह का ऑस्ट्रल-एशिया कप फाइनल हुआ, जहां जावेद मियांदाद ने चेतन शर्मा की गेंद पर आखिरी गेंद पर छक्का लगाकर पाकिस्तान को ऐतिहासिक जीत दिलाई।
1994 में फिर शारजाह के फाइनल में पाकिस्तान ने भारत को हराया। सईद अनवर और आमिर सोहेल की शानदार बल्लेबाज़ी और वसीम अकरम की गेंदबाज़ी से भारत लक्ष्य तक नहीं पहुंच सका। इसके बाद 2007 का टी20 विश्व कप फाइनल जोहैनेसबर्ग में खेला गया। गौतम गंभीर की पारी और अंत में जोगिंदर शर्मा की गेंद पर मिस्बाह उल हक का स्कूप शॉट श्रीसंत ने पकड़ लिया और भारत ने पहली बार टी20 विश्व कप जीत लिया। यह नतीजा भारत-पाकिस्तान क्रिकेट प्रतिद्वंद्विता के इतिहास में एक बड़ा मोड़ था।
इसके बाद 2017 की चैंपियंस ट्रॉफी का फाइनल सबसे ज्यादा चर्चा में रहा। पाकिस्तान ने फ़ख़र ज़मान के शतक और आमिर के शुरुआती तीन विकेटों से भारत को 180 रनों से हराकर खिताब जीता। भारत की मजबूत टीम भी उस दिन पाकिस्तान की आक्रामकता के आगे नहीं टिक सकी। इन पांच मुकाबलों ने साबित किया कि जब भी भारत और पाकिस्तान किसी फाइनल में भिड़ते हैं, क्रिकेट प्रेमियों को रोमांच और इतिहास रचने वाले पल देखने को मिलते हैं। अब पहली बार एशिया कप के फाइनल में दोनों टीमों की टक्कर होगी और फैंस की नज़रें इस मुकाबले पर टिकी हैं।


