नई दिल्ली : बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड के अंतरिम अध्यक्ष तमीम इकबाल ने देश के क्रिकेट सिस्टम की बदहाल स्थिति को लेकर बड़ा खुलासा किया है। तमीम ने दावा किया कि घरेलू क्रिकेट में फैली अव्यवस्था और भ्रष्टाचार के कारण कई खिलाड़ियों की आर्थिक हालत बेहद खराब हो गई। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा कि कुछ क्रिकेटरों को जीवनयापन के लिए रिक्शा चलाने और पानी-पूरी बेचने तक के लिए मजबूर होना पड़ा। इस बयान ने बांग्लादेश क्रिकेट के हालात पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
तमीम इकबाल ने यह भी माना कि टी20 वर्ल्ड कप विवाद के दौरान भारत और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के साथ रिश्ते खराब करना बड़ी गलती थी। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार तमीम इकबाल का कहना है कि अब बांग्लादेश क्रिकेट को फिर से पटरी पर लाने और भारत के साथ संबंध सुधारने की जरूरत है। बांग्लादेश क्रिकेट प्रशासन में पिछले कुछ समय में तमीम इकबाल का अचानक से कद बढ़ा है। मुस्तफिजुर रहमान को IPL (इंडियन प्रीमियर लीग) से बाहर किये जाने के बाद उन्हें ‘भारतीय एजेंट’ का तमगा दिया गया था। हालांकि, अब वह बीसीबी के अंतरिम अध्यक्ष हैं और क्रिकेट की दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश के साथ अपने संबंधों को फिर से बेहतर बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल ने जब टी20 विश्व कप के मुकाबलों को भारत से बाहर कराने की बांग्लादेश की मांग को ठुकरा दिया था, तब बांग्लादेश ने टूर्नामेंट से हटने का फैसला किया था। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अब देश में सरकार बदलने के बाद तमीम इकबाल ने बातचीत में बताया कि वह बांग्लादेश क्रिकेट को मैदान के अंदर और बाहर दोनों स्तरों पर फिर से मजबूत बनाने की योजना पर काम कर रहे हैं। तमीम ने संकेत दिए कि घरेलू क्रिकेट सिस्टम में सुधार, खिलाड़ियों की आर्थिक स्थिति बेहतर करना और पड़ोसी देशों खासकर भारत के साथ क्रिकेट संबंधों को सामान्य बनाना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है।
भारत-बांग्लादेश क्रिकेट संबंध सुधारने को लेकर बड़ा सवाल
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार तमीम इकबाल ने कहा, “जब टी20 वर्ल्ड कप का मामला सामने आया था, तब शायद मैं ही पहला व्यक्ति था जिसने इस मुद्दे पर आवाज उठाई थी। जो कुछ भी हुआ और बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड के पिछले पदाधिकारियों ने जिस तरह से हालात को संभाला, वह बिल्कुल सही नहीं था।” मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने आगे कहा कि इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल का रवैया उस समय थोड़ा नरम था और मामले का समाधान निकालने की गुंजाइश भी मौजूद थी। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार तमीम के मुताबिक, दोनों पक्षों को बातचीत के जरिए रास्ता निकालना चाहिए था ताकि विवाद इतना आगे न बढ़ता।
मैं आपको 1996-97 के दौर में ले जाता हूं। तब हमने केन्या के खिलाफ ICC ट्रॉफी जीतने के लिए जबरदस्त लड़ाई लड़ी थी, सिर्फ इसलिए ताकि हम वर्ल्ड कप के लिए क्वालिफाई करें। उस जीत के बाद मेरे घर में चारों तरफ रंग-बिरंगा पानी ही पानी दिख रहा था। लोग सड़कों पर उतरकर जश्न मना रहे थे। उस जश्न ने ही बच्चों को क्रिकेट की दुनिया से जोड़ा। हर कोई मिन्हाजुल आबेदीन नन्नू, खालिद मशूद या अकरम खान जैसा बनना चाहता था।
इस बार हमने क्या किया? हमने बिना किसी उचित बातचीत के ही वर्ल्ड कप का मौका गंवा दिया। हो सकता है कि उस टीम में कुछ ऐसे खिलाड़ी भी हों, जिन्हें शायद अब दोबारा कभी विश्व कप खेलने का मौका ही न मिले। यह बात मुझे बिल्कुल भी अच्छी नहीं लगी। बीसीसीआई की बात करूं तो मैंने मिथुन मन्हास के साथ काफी क्रिकेट खेला है। मिथुन मन्हास BCCI के मौजूदा अध्यक्ष हैं।
IPL में हम दोनों एक ही टीम में थे। वह ढाका लीग्स में खेलने के लिए कई बार बांग्लादेश आ चुके हैं। हमारे बीच काफी अच्छा तालमेल है। मुझे बीसीबी के अंतरिम अध्यक्ष होने की हैसियत से अब तक उनके साथ बैठकर बात करने का मौका तो नहीं मिला है, लेकिन मैं उन्हें अच्छी तरह से जानता हूं। इस समय हमारे देश की सुरक्षा व्यवस्था एकदम बेहतरीन है। यहां किसी भी तरह की कोई समस्या या सुरक्षा का कोई ख़तरा नहीं है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार तमीम इकबाल ने कहा कि भारतीय क्रिकेट टीम के लिए बांग्लादेश में कभी किसी तरह का खतरा नहीं रहा। उनके मुताबिक, जब भी भारतीय क्रिकेट टीम यहां खेलने आती है तो पूरा स्टेडियम दर्शकों से खचाखच भर जाता है और फैंस दोनों टीमों के मुकाबले को बेहद पसंद करते हैं। तमीम ने यह भी कहा कि उन्हें व्यक्तिगत तौर पर अब बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के बीच किसी बड़े मतभेद या गंभीर समस्या की आशंका नहीं लगती। उनके अनुसार, दोनों देशों के बीच किसी नई क्रिकेट सीरीज का आयोजन रिश्तों को और मजबूत बनाने की दिशा में एक बेहतरीन कदम साबित हो सकता है।
पाकिस्तान के रुख पर उठे सवाल, क्या सिर्फ राजनीति थी एकजुटता?
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार तमीम इकबाल ने कहा कि इस मुद्दे पर टिप्पणी करना उनके लिए आसान नहीं है, क्योंकि वह उस मुख्य समूह का हिस्सा नहीं थे जो फैसले ले रहा था। उन्होंने कहा, “मैं सिर्फ इतना कहूंगा कि जो कुछ भी हुआ, उसके कारण हमने टी20 विश्व कप खेलने का मौका गंवा दिया। हमारे कुछ खिलाड़ियों को शायद दोबारा ऐसा अवसर कभी न मिले। मेरे लिए यही सबसे बड़ी और सबसे दुखद बात है।”
ICC चेयरमैन जय शाह के बारे में: मुझे अब तक इस भूमिका में उनसे मिलने का मौका नहीं मिला, पर मैं कई भारतीय क्रिकेटरों को जानता हूं और मैंने उनके बारे में अच्छी बातें ही सुनी हैं। मैंने हमेशा ICC को परिवार माना है। जब मैं खिलाड़ी था तब भी और अब भी। इसमें 12-15 देश हैं। हमें एक-दूसरे का ख्याल रखना चाहिए। मुझे नहीं लगता कि जिन टीमों की हम बात कर रहे हैं, वे हमारा बुरा चाहती हैं। क्रिकेट को क्रिकेट ही रहना चाहिए।
तमीम इकबाल ने बताई नेतृत्व को लेकर अपनी अलग सोच
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार तमीम इकबाल ने कहा कि वह क्रिकेट बैकग्राउंड से आते हैं, इसलिए खेल से जुड़े पहलुओं को स्वाभाविक रूप से बेहतर समझते हैं। लेकिन उन्होंने यह भी माना कि किसी क्रिकेट बोर्ड को सफलतापूर्वक चलाने के लिए सिर्फ क्रिकेट की समझ काफी नहीं होती। तमीम के मुताबिक, समिति में ऐसे लोग भी मौजूद हैं जो फाइनेंस, टेंडर और प्रोक्योरमेंट जैसे प्रशासनिक मामलों में अधिक विशेषज्ञता रखते हैं और उनकी विशेषज्ञता का सही इस्तेमाल करना बेहद जरूरी है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा कि किसी भी क्रिकेट बोर्ड को प्रभावी ढंग से चलाने के लिए अलग-अलग क्षेत्रों के अनुभवी लोगों का सही मिश्रण होना चाहिए, क्योंकि यह केवल क्रिकेट तक सीमित मामला नहीं है।
यह वित्त, प्रायोजक, विपणन और ब्रांडिंग के बारे में भी है। बाकी सब चीजों के लिए आपके पास एक CEO होता है। मैंने यह खेल इतने लंबे समय तक खेला है कि मैं समझ सकता हूं कि बांग्लादेश में क्रिकेट को किस चीज की जरूरत है। इसे बहुत सारे बदलावों, बहुत सारे विकास और सोच में बहुत बदलावों की जरूरत है। मैं सिर्फ उसी पर फोकस कर रहा हूं।
बांग्लादेश क्रिकेट के फंड को लेकर तमीम की नई सोच
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार तमीम इकबाल ने कहा कि वह चाहते हैं कि उनके खिलाड़ी भारतीय क्रिकेट टीम, पाकिस्तान क्रिकेट टीम और ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट टीम जैसी मजबूत टीमों से मुकाबला करें। लेकिन इसके साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि बदले में खिलाड़ियों को क्या सुविधाएं दी जा रही हैं। तमीम के अनुसार, अगर बोर्ड खिलाड़ियों को बेहतरीन ट्रेनिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और जरूरी संसाधन उपलब्ध नहीं करा रहा, जबकि ऐसा करने की क्षमता मौजूद है, तो फिर उनसे बड़े स्तर के प्रदर्शन की उम्मीद करना पूरी तरह सही नहीं होगा।
आईसीसी हमें इसलिए फंड नहीं देता कि हम उसको फिक्स्ड डिपॉजिट कर दें। प्रायोजक भी हमें इस काम के लिए पैसे नहीं देते। इस पैसे का इस्तेमाल खेल के विकास और इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने में होना चाहिए यानी खेल में सही मायने में निवेश होना चाहिए। कम से कम आपको खिलाड़ियों की एक मजबूत ‘पाइपलाइन’ और जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर तो तैयार करना ही चाहिए। उसके बाद बाकी सब कुछ खिलाड़ियों पर निर्भर करता है।
खेल सट्टेबाजी पर सख्त कानून की मांग पर क्या बोले तमीम?
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार तमीम इकबाल ने कहा कि उन्हें अब भी लगता है कि खेल सट्टेबाजी और भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कानून बनाना संभव है। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे को लेकर उन्होंने संसद के स्पीकर, खेल मंत्री और गृह मंत्री से भी चर्चा की है। तमीम के अनुसार, वह सिर्फ सट्टेबाजी ही नहीं बल्कि खेलों में होने वाले हर तरह के भ्रष्टाचार के खिलाफ मजबूत कानून चाहते हैं। उनका मानना है कि फिलहाल भ्रष्ट लोगों को पता होता है कि पकड़े जाने पर उन्हें अधिकतम प्रतिबंध का सामना करना पड़ेगा, इसलिए डर का माहौल नहीं बन पाता। इसी वजह से वह ऐसे कड़े कानून की वकालत कर रहे हैं, जो खेलों में भ्रष्टाचार को जड़ से खत्म करने में मदद करे।
उनके दिल में यह डर होना चाहिए कि अगर वे पकड़े गए तो उन्हें जेल जाना पड़ेगा। भ्रष्टाचार की समस्या पूरी तरह से खत्म तो नहीं होगी, लेकिन इसमें काफी कमी जरूर आएगी। जब हम बच्चे थे और बड़े हो रहे थे तो हमें सिर्फ एक ही बात पता थी- खेल कैसे खेलना है, जीतना है, हारना है, रन बनाने हैं और विकेट लेने हैं। सिर्फ बांग्लादेश में ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में अब बच्चे भी इसमें शामिल हो रहे हैं। उन्हें यह समझना होगा कि जैसे उन्हें समझाया गया है कि अगर आप कुछ चुराते हैं तो आप गिरफ्तार हो सकते हैं, उसी तरह अगर आप सट्टेबाजी में शामिल होते हैं तो आपको जेल हो सकती है।
बांग्लादेश क्रिकेट में तदर्थ समिति की जरूरत क्यों पड़ी?
तमीम इकबाल ने बताया कि बांग्लादेश क्रिकेट में तदर्थ समिति की जरूरत इसलिए पड़ी क्योंकि पिछले चुनाव पूरी तरह अव्यवस्थित रहे थे। उनके मुताबिक, हालात इतने खराब हो गए थे कि सात निदेशकों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। तमीम ने यह भी कहा कि बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड का ढांचा काफी हद तक ढाका लीग्स पर निर्भर करता है। ढाका लीग्स में चार डिवीजनों की कुल 76 टीमें शामिल होती हैं, लेकिन संकट के दौरान इनमें से लगभग 50 टीमों ने प्रतियोगिता में हिस्सा लेने से इनकार कर दिया था। इससे बांग्लादेश क्रिकेट की स्थिति और ज्यादा बिगड़ गई थी।
फर्स्ट डिवीजन में 20 में से 8 टीमों ने नहीं खेला। सेकंड डिवीजन में 24 में से 12 टीमें बाहर रहीं। प्रीमियर लीग में 12 में से 9 टीमों ने इसका विरोध किया। थर्ड डिवीजन में 15 टीमों ने आपत्तियां उठाईं। क्रिकेटर्स को उनकी पेमेंट नहीं मिल रही थी। जिन खिलाड़ियों ने अपनी पूरी जिंदगी इस खेल को समर्पित कर दी, वे सड़क पर आ गए। कोई रिक्शा चला रहा था तो कोई पानी-पूरी बेच रहा था। राष्ट्रीय खेल परिषद ने दखल दिया। जांच समिति बनाई। डायरेक्टर्स ने बयान दिए। पिछले बोर्ड के कुछ डायरेक्टर्स पर आरोप हैं कि वे कुछ गलत कामों में शामिल थे। हालात बहुत ज्यादा खराब हो गए थे।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार तमीम इकबाल ने कहा कि उनकी सोच शुरू से ही बिल्कुल साफ थी—या तो बदलाव सफल होगा या फिर असफल, लेकिन कोशिश जरूर करनी चाहिए। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा कि वह असफलता का सामना करने के लिए भी तैयार हैं, क्योंकि कम से कम वह सिस्टम को बेहतर बनाने की दिशा में ईमानदारी से प्रयास कर रहे हैं। तमीम के मुताबिक, उन्हें चुनाव कराने के लिए 90 दिनों का समय दिया गया था, लेकिन वह इस प्रक्रिया को 60 दिनों के भीतर पूरा करने की योजना पर काम कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि टी20 विश्व कप के दौरान जो विवाद और अव्यवस्था देखने को मिली थी, वैसी स्थिति दोबारा कभी पैदा न हो, इसके लिए पूरी सावधानी बरती जाएगी।


