नई दिल्ली : ताइवान में जारी ताइपे ओपन सुपर 300 बैडमिंटन टूर्नामेंट में अनुभवी भारतीय शटलर एचएस प्रणय और युवा स्टार उन्नति हुडा ने गुरुवार को सीधे गेम में जीत दर्ज करते हुए एकल वर्ग के दूसरे दौर में जगह बना ली। सातवीं वरीयता प्राप्त प्रणय ने पुरुष एकल के पहले दौर में जापान के मिनोरू कोगा को 21-11, 21-14 से हराया। अब दूसरे दौर में उनका सामना हांगकांग के जेसन गुनावन से होगा, जिन्होंने पहले दौर में भारत के मिथुन मंजुनाथ को 21-18, 21-4 से शिकस्त दी।
पुरुष एकल में किरण जॉर्ज और थारुन मन्नेपल्ली भी दूसरे दौर में पहुंच गए हैं। जॉर्ज ने चीनी ताइपे के वांग पो-वेई को 21-10, 21-18 से जबकि मन्नेपल्ली ने कोरिया के आठवें वरीय जियोन ह्योक जिन को 21-12, 21-15 से हराया। जॉर्ज और मन्नेपल्ली अगले दौर में एक-दूसरे का सामना करेंगे। लेकिन पुरुष एकल क्वालीफायर से मुख्य ड्रॉ में जगह बनाने वाले रौनक चौहान इंडोनेशिया के रिची दुता रिचार्डो से 14-21, 16-21 से हार गए।
महिला एकल में तीसरी वरीयता प्राप्त उन्नति ने अपने अभियान की सकारात्मक शुरुआत करते हुए ताइपे की पेई यू वांग को 21-12, 21-18 से हराया। अब उनका मुकाबला हमवतन तान्या हेमंत से होगा, जिन्होंने ताइपे की ही वेन ची सू को कड़े मुकाबले में 21-16, 14-21, 21-16 से पराजित किया।
प्रणय-उन्नति के बाद देविका, तन्वी और अनमोल ने भी दर्ज की जीत
भारत की अन्य खिलाड़ियों में आठवीं वरीयता प्राप्त देविका सिहाग, तन्वी शर्मा और अनमोल खरब भी महिला एकल के अगले दौर में पहुंच गईं। देविका ने कोरिया की गा यून पार्क को 14-21, 21-7, 21-15 से, तन्वी ने हमवतन तस्नीम मीर को 21-16, 22-20 से और अनमोल ने अमेरिका की इशिका जायसवाल को 21-15, 11-21, 21-19 से हराया। देविका का अगला मुकाबला इंडोनेशिया की कडेक ढिंडा अमर्त्य प्रतिवी से होगा, जिन्होंने भारत की रक्षिता संतोष रामराज को 21-10, 20-22, 21-14 से हराया।
दूसरे दौर में तन्वी का सामना इंडोनेशिया की थालिता रामधानी विरियावान से होगा, जबकि अनमोल की भिड़ंत चीनी ताइपे की दूसरी वरीयता प्राप्त ह्सियांग टी लिन से होगी। लिन ने पहले दौर में भारत की अश्मिता चालिहा को 16-21, 21-14, 21-15 से हराया था। हालांकि, भारत की एक अन्य खिलाड़ी श्रीयांशी वलीशेट्टी का अभियान पहले दौर में ही समाप्त हो गया। उन्हें थाईलैंड की चौथी वरीयता प्राप्त सुपानिडा कटेथोंग के खिलाफ 11-21, 12-21 से हार का सामना करना पड़ा।


