नई दिल्ली : कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में शानदार प्रदर्शन के बाद स्वदेश लौटे भारतीय खिलाड़ियों का मंगलवार तड़के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (आईजीआई) एयरपोर्ट पर जोरदार स्वागत हुआ। ढोल-नगाड़ों की गूंज, देशभक्ति गीतों, फूल-मालाओं और बड़ी संख्या में मौजूद प्रशंसकों के बीच खिलाड़ियों का भव्य अभिनंदन किया गया। खिलाड़ियों ने अपने परिवार और समर्थकों से मुलाकात की, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया कि जश्न का समय सीमित है और अब उनका पूरा फोकस अगले महीने आइची-नागोया एशियन गेम्स की तैयारियों पर रहेगा। कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय मुक्केबाजों ने 10 पदक जीतकर शानदार प्रदर्शन किया। इनमें महिला खिलाड़ियों ने छह और पुरुष मुक्केबाजों ने चार पदक अपने नाम किए। वहीं पैरा एथलेटिक्स टीम ने भी ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए रिकॉर्ड सात पदक जीते। इन उपलब्धियों की बदौलत भारत पदक तालिका में चौथे स्थान पर रहने में सफल रहा।
एशियन गेम्स में गोल्ड पर नजर, प्रिया घंघास का बड़ा बयान
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार स्वर्ण पदक विजेता मुक्केबाज प्रिया घंघास ने कहा कि कॉमनवेल्थ गेम्स में राष्ट्रगान सुनना उनके जीवन का सबसे यादगार पल रहा, लेकिन अब उनका पूरा फोकस एशियन गेम्स पर है। उन्होंने कहा, ‘इतने बड़े मंच पर राष्ट्रगान सुनना अविस्मरणीय अनुभव है। लेकिन अब मेरा लक्ष्य एशियन गेम्स में भी स्वर्ण पदक जीतना है।’
साक्षी चौधरी की नजर अब एशियन गेम्स के स्वर्ण पदक पर
इंग्लैंड की रूबी व्हाइट को पहली बार किसी अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में हराकर स्वर्ण पदक जीतने वाली साक्षी चौधरी ने कहा कि उन्होंने हर रात इस पल का सपना देखा था। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा, ‘मैंने हमेशा खुद को गोल्ड जीतते और देश का राष्ट्रगान बजते हुए देखा था। अब वही सपना सच हो गया है। लेकिन अगला लक्ष्य एशियन गेम्स है और वहां भी यही प्रदर्शन दोहराना चाहती हूं।’
बीमारी को हराकर गोल्ड जीतने वाली जैसमीन की नजर अब ओलंपिक पर
महिला मुक्केबाज जैसमीन लांबोरिया ने बताया कि बीमारी के कारण वह कॉमनवेल्थ गेम्स से पहले सिर्फ तीन सप्ताह ही अभ्यास कर सकी थीं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा, ‘रिंग में उतरने के बाद मैंने सारी परेशानियां भूलकर सिर्फ भारत के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश की।’ जैसमीन ने कहा कि एशियन गेम्स और उसके बाद के सभी टूर्नामेंट लॉस एंजिलिस ओलंपिक 2028 की तैयारी का हिस्सा होंगे।
तकनीक में बदलाव बना सफलता की कुंजी: सचिन सिवाच
स्वर्ण पदक विजेता सचिन सिवाच ने सफलता का श्रेय कोचों और लंबे समय तक चली मेहनत को दिया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा, ‘कोचों ने हमारी कमियों की पहचान की और उन पर लगातार काम कराया। अब उसका परिणाम सामने आ रहा है। लगातार जीतने से आत्मविश्वास भी बढ़ता है।’
एशियन गेम्स में कड़ी टक्कर की उम्मीद, नरेंद्र बरवाल ने बताए मजबूत प्रतिद्वंद्वी
मुक्केबाज नरेंद्र बरवाल ने कहा कि भारतीय टीम हर प्रतिद्वंद्वी का वीडियो देखकर रणनीति तैयार करती है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा, ‘एशियन गेम्स में कजाकिस्तान और उज्बेकिस्तान जैसे मजबूत देशों के मुक्केबाजों से मुकाबला होगा, लेकिन हम पूरी तैयारी के साथ उतरेंगे।’
‘सिल्वर नहीं, अब गोल्ड ही लक्ष्य’ : जादूमणि सिंह
रजत पदक विजेता जादूमणि सिंह ने माना कि फाइनल में हार का मलाल है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा, ‘थोड़ी निराशा जरूर है क्योंकि लक्ष्य गोल्ड था। अब कोचों के साथ कमियों पर काम करूंगा और एशियन गेम्स में मजबूत वापसी करूंगा।’
विश्व कप की तैयारी में जुटेंगी अरुंधति चौधरी
70 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण जीतने वाली अरुंधति चौधरी ने कहा कि उनकी स्पर्धा एशियन गेम्स में शामिल नहीं है, इसलिए अब उनका पूरा ध्यान वर्ल्ड कप पर रहेगा। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा, ‘डिफेंडिंग चैंपियन को हराने से मेरा आत्मविश्वास काफी बढ़ा है। यह जीत आगे भी बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करेगी।’
भारतीय पैरा एथलीटों ने दिखाया दम, रच दिया नया इतिहास
दिलीप गावित बोले- अब पैरालंपिक गोल्ड का सपना
पुरुष 100 मीटर टी-47 वर्ग में स्वर्ण और गेम्स रिकॉर्ड बनाने वाले दिलीप महादू गावित ने कहा कि ग्लासगो की ठंड और नई स्पर्धा दोनों चुनौतीपूर्ण थीं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा, ‘मेरा अंतिम लक्ष्य पैरालंपिक में स्वर्ण जीतकर भारत का झंडा सबसे ऊंचा लहराना है।’
शॉटपुट में स्वर्ण जीतने वाली शर्मिला को मिला नया आत्मविश्वास
महिला एफ-57 वर्ग की स्वर्ण पदक विजेता शर्मिला धनखड़ ने कहा कि इस उपलब्धि से बड़े टूर्नामेंटों के लिए उनका आत्मविश्वास बढ़ा है।
सहयोगी स्टाफ का भी बड़ा योगदान: सोमन राणा
पुरुष एफ-57 वर्ग में स्वर्ण जीतने वाले सोमन राणा ने कहा कि खिलाड़ियों की सफलता के पीछे सपोर्ट स्टाफ की मेहनत भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।
पहला कॉमनवेल्थ पदक हमेशा रहेगा यादगार: शिल्पा
महिला एफ-57 वर्ग की कांस्य पदक विजेता शिल्पा के. शायला ने कहा कि भारत के लिए पहला कॉमनवेल्थ पदक जीतना उनके करियर का सबसे गर्व का क्षण है। उन्होंने भविष्य में पैरालंपिक स्वर्ण जीतने का लक्ष्य भी जताया।
जूडो के स्वर्ण पदक विजेताओं का भी हुआ जोरदार स्वागत
जूडो में स्वर्ण जीतने वाले हर्ष सिंह और अस्मिता डे का भी एयरपोर्ट पर शानदार स्वागत हुआ। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार हर्ष ने कहा, ‘कभी नहीं सोचा था कि इस तरह का स्वागत मिलेगा। सभी से मिलकर बहुत अच्छा लग रहा है।’ वहीं उत्तर प्रदेश पुलिस में सब-इंस्पेक्टर अस्मिता डे ने कहा, ‘यह पहली बार है जब मुझे इस तरह का स्वागत मिला है। यह पल हमेशा याद रहेगा।’
कॉमनवेल्थ के बाद अब एशियन गेम्स फतह करने की तैयारी
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में शानदार प्रदर्शन के बाद भारतीय खिलाड़ियों का आत्मविश्वास और उत्साह चरम पर है। हालांकि अधिकांश खिलाड़ियों का मानना है कि यह जश्न मनाने का नहीं, बल्कि अगले महीने होने वाले एशियन गेम्स की तैयारियों में जुटने का समय है। भारतीय खिलाड़ियों का लक्ष्य कॉमनवेल्थ में मिली सफलता को आगे बढ़ाते हुए एशियन गेम्स में भी दमदार प्रदर्शन करना है। इसके साथ ही उनकी नजरें भविष्य में होने वाले ओलंपिक खेलों पर भी टिकी हैं, जहां वे देश के लिए और अधिक पदक जीतने का सपना साकार करना चाहते हैं।


