ट्रैक पर टूटा सपना, कर्ज लेकर कराया इलाज; शूटिंग में गोल्ड जीतकर कमलजीत ने रचा इतिहास

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नई दिल्ली : एशियन गेम्स 2026 के सातवें दिन भारत ने अपना दूसरा स्वर्ण पदक जीता। भारतीय महिला क्रिकेट टीम के बाद 10 मीटर एयर पिस्टल मिश्रित टीम स्पर्धा में सुरुचि सिंह फोगाट और कमलजीत ने शानदार प्रदर्शन करते हुए देश को गोल्ड दिलाया। भारतीय जोड़ी ने फाइनल में 484.6 अंक हासिल कर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। शूटिंग में यह एशियन गेम्स 2026 में भारत का पहला गोल्ड मेडल रहा। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार आज कमलजीत अपने सटीक निशाने से ‘गोल्डन बॉय’ बन चुके हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि उनका पहला सपना निशानेबाज बनना नहीं, बल्कि एथलीट बनकर ट्रैक पर दौड़ना था।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार दरअसल यह गोल्ड मेडल जीतने से तकरीबन तीन साल पहले 2023 में कमलजीत एक भीषण सड़क हादसे का शिकार हुए थे। वह जब 2023 में ट्रेनिंग के बाद ऑटो रिक्शा से अपने गांव सुल्खा लौट रहे थे। उसी वक्त उनके ऑटो का एक्सीडेंट हो गया। उनके साथ मौजूद दो सवारियों की मौत भी हो गई। कमलजीत की जांघ की हड्डी इस हादसे में टूट गई। यहीं से उनका एथलेटिक्स में जाने का सपना टूट गया। वह भारतीय सेना में जाना चाहते थे। इसी लिए उनकी रुचि ट्रैक एंड फील्ड में ज्यादा थी। मगर इस हादसे के बाद उनकी आर्मी में जाने की उम्मीद टूटी और उन्हें रनिंग भी छोड़नी पड़ी। ट्रैक एंड फील्ड में नहीं सही तो ईश्वर ने उनके लिए शूटिंग को चुना था। शूटिंग में आने के बाद स्पोर्ट्स कोटा से उन्हें भारतीय सेना में हवलदार रैंक भी मिली।

कमलजीत के इलाज के लिए परिवार ने लिया कर्ज

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उनके पिता रतिराम ने बताया उस कठिन समय को याद किया जब तकरीबन एक महीने तक कमलजीत अस्पताल में भर्ती रहे थे और उनके इलाज के लिए परिवार को लोन तक लेना पड़ा था। सड़क हादसे के बाद कमजीत को गुड़गांव के एक अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। उनकी जांघ की हड्डी जोड़ने के लिए ऑपरेशन हुआ। परिवार को अस्पताल का खर्चा उठाने के लिए करीबियों और दोस्तों से लोन भी लेना पड़ा।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार कमलजीत के पिता रतिराम ने बताया, “हादसे में उनकी जांघ पर गंभीर चोट लगी थी और वह काफी दर्द में थे। उनके इलाज पर करीब 4 लाख रुपये खर्च हुए। इलाज का खर्च जुटाने के लिए हमें दोस्तों और रिश्तेदारों से कर्ज भी लेना पड़ा। कमलजीत भाग्यशाली रहे कि उनकी जान बच गई। जिस ऑटो में वह सवार थे, उसमें मौजूद 2 अन्य लोगों की हादसे में मौत हो गई थी।”

पुरानी पिस्टल से शुरू हुआ कमलजीत का शूटिंग सफर

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार कमलजीत के कोच शक्तिपाल ने बताया, “जब कमलजीत ट्रेनिंग के लिए आया, तब मुझे पता था कि उसका परिवार नई पिस्टल खरीदने का खर्च नहीं उठा सकता। इसलिए शुरुआत में उसे ड्राई शूटिंग का अभ्यास कराया गया। इसके बाद उसने सेकंड हैंड पिस्टल से अपनी ट्रेनिंग जारी रखी।” मीडिया रिपोर्ट के अनुसार कमलजीत के अंकल के मुताबिक, उन्होंने 2025 में जाकर अपनी खुद की पिस्टल खरीदी। इससे पहले संसाधनों की कमी के बावजूद कमलजीत ने ईंट और डम्बल्स के सहारे अपनी ताकत और फिटनेस पर काम किया और लगातार अभ्यास जारी रखा।

कमलजीत के जीवन के पिछले 3 साल भले ही संघर्ष और मुश्किलों से भरे रहे हों, लेकिन 25 सितंबर 2026 का दिन उनके लिए यादगार बन गया। लंबे संघर्ष और कड़ी मेहनत के बाद उन्होंने एशियन गेम्स 2026 में 10 मीटर एयर पिस्टल मिश्रित टीम स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर अपने सपने को नई ऊंचाई दी। सुरुचि सिंह फोगाट के साथ मिलकर गोल्ड जीतने वाले कमलजीत ने शूटिंग में भारत को इस संस्करण का पहला स्वर्ण पदक दिलाया। उनकी यह उपलब्धि भारतीय खेल इतिहास में दर्ज हो गई है और कमलजीत ने अपने शानदार प्रदर्शन से देश का नाम रोशन किया है।

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