नई दिल्ली : चेन्नई में आयोजित पहले चोला शतरंज इंटरनेशनल ग्रैंडमास्टर्स टूर्नामेंट में 10 वर्षीय भारतीय खिलाड़ी सरबर्थो मणि ने शानदार प्रदर्शन करते हुए बड़ा उलटफेर किया। फिडे मास्टर सरबर्थो ने दूसरे दौर के मुकाबले में ग्रीस के ग्रैंडमास्टर दिमित्रिस एलेक्साकिस को शिकस्त दी। मुकाबले के दौरान एक समय ऐसा भी आया, जब 15वीं चाल के बाद सरबर्थो की स्थिति बेहद कमजोर हो गई थी और उनकी हार लगभग तय मानी जा रही थी। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार हालांकि, उन्होंने धैर्य और सूझबूझ से शानदार वापसी करते हुए 58वीं चाल में जीत हासिल कर ली। यह मुकाबला उनकी संघर्ष क्षमता और बेहतरीन खेल का यादगार उदाहरण बन गया।
सरबर्थो मणि के प्रतिद्वंद्वी को दो प्यादों की बढ़त हासिल थी। इसके बावजूद कोलकाता के इस नन्हें खिलाड़ी ने शानदार वापसी की और 58वीं चाल पर ग्रीक ग्रैंडमास्टर को हार मानने पर मजबूर कर दिया। दिलचस्प बात यह रही कि मुकाबला खत्म होने पर सरबर्थो मणि के पास घड़ी में 1 घंटा 12 मिनट का समय बचा था, जबकि दिमित्रिस एलेक्साकिस के पास महज 36 सेकंड शेष थे। सरबर्थो मणि ने शनिवार 31 अक्टूबर 2026 को ने अपने और ग्रीक खिलाड़ी के बीच 225 ईएलओ (Elo) रेटिंग अंकों के अंतर को पीछे छोड़ते हुए दिमित्रिस एलेक्साकिस को हराया। फिडे (FIDE) की रैंकिंग प्रणाली में फिडे मास्टर की उपाधि ग्रैंडमास्टर के मुकाबले दो पायदान नीचे होती है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार दिमित्रिस एलेक्साकिस के खिलाफ सरबर्थो मणि की जीत कई मायनों में खास रही। मुकाबले की 15वीं चाल तक उनकी स्थिति काफी खराब हो चुकी थी और जीत की उम्मीद भी कम नजर आ रही थी। इसके बावजूद 10 साल के सरबर्थो ने शानदार वापसी करते हुए 58वीं चाल पर ग्रीस के ग्रैंडमास्टर को हार मानने पर मजबूर कर दिया। इस जीत के साथ उन्होंने रेटिंग के बड़े अंतर को भी गलत साबित कर दिया। फर्स्ट चोला शतरंज इंटरनेशनल ग्रैंडमास्टर्स टूर्नामेंट के निदेशक और ग्रैंडमास्टर आरबी रमेश ने बताया कि सरबर्थो की शुरुआती चालों में दिखाई गई रचनात्मकता ने उन्हें भी हैरान कर दिया था।
शुरुआती चालों में ही घिर गए थे सरबर्थो, फिर पलट दी बाजी
सरबर्थो मणि शुरुआती चालों में ही मुश्किल में घिर गए थे। वह अपने प्रतिद्वंद्वी के राजा की तरफ दबाव बनाने की कोशिश कर रहे थे, जबकि एलेक्साकिस शतरंज की बिसात के बीच वाले हिस्से को खोलकर हमला करने की तैयारी में थे। 15 चालों के बाद खेल का आकलन करने वाले कंप्यूटर ने ग्रीस के ग्रैंडमास्टर को दो प्यादों के बराबर बढ़त दी थी।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार हालांकि, मध्य खेल में लगातार हुई गलतियों का फायदा सरबर्थो मणि को मिला और मुकाबले का रुख उनके पक्ष में मुड़ गया। धीरे-धीरे उन्होंने अपनी स्थिति मजबूत की और ग्रैंडमास्टर को हार मानने पर मजबूर किया। सरबर्थो ने इस टूर्नामेंट की शुरुआत भारतीय इंटरनेशनल मास्टर शाहिल डे को हराकर की थी। वहीं, एलेक्साकिस ने अपने पहले मुकाबले में अनुभवी इंटरनेशनल मास्टर पद्मिनी राउत को मात दी थी।
चोला शतरंज टूर्नामेंट में भारतीय युवा खिलाड़ियों ने अपनी रेटिंग से कहीं बेहतर प्रदर्शन कर इस धारणा को सही साबित किया है कि उनकी वास्तविक क्षमता रेटिंग से अधिक हो सकती है। शुक्रवार को टूर्नामेंट के पहले दौर में भी भारतीय युवा खिलाड़ियों ने कई बड़े उलटफेर किये। फिडे मास्टर मधेश कुमार ने ग्रैंडमास्टर मामिकोन गरीबयान को हराया। फिडे मास्टर अधिराज मित्रा ने ग्रैंडमास्टर सैंटियागो यागो डी मोरा को मात दी।फिडे मास्टर सम्यक धरेवा ने इंटरनेशनल मास्टर आयुष शर्मा को हराया।
इसके अलावा फिडे मास्टर अविरत चौहान ने ग्रैंडमास्टर अरण्यक घोष के खिलाफ मुकाबला ड्रॉ कराया। फिडे मास्टर आदिक थियोफेन लेनिन ने ग्रैंडमास्टर निकिता अफानासिएव, आरित कपिल ने ग्रैंडमास्टर मयंक चक्रवर्ती और वंदन अलंकार सवाई ने यूक्रेन के ग्रैंडमास्टर विताली बर्नाडस्की के खिलाफ ड्रॉ खेला।
महज 1 साल की उम्र में शुरू हुआ सरबर्थो का शतरंज सफर
कोलकाता के रहने वाले सरबर्थो मणि का शतरंज से जुड़ाव महज एक साल की उम्र में हो गया था। उनके पिता सिद्धार्थ मणि ने उन्हें एक अलग तरह का तोहफा देते हुए शतरंज की बिसात खरीदकर दी थी। सिद्धार्थ मणि पेशे से हृदय रोग विशेषज्ञ हैं, जबकि सरबर्थो की मां बच्चों की डॉक्टर हैं। सिद्धार्थ जब युवा थे, तब भारतीय शतरंज खिलाड़ी विश्वनाथन आनंद उनके आदर्श हुआ करते थे। दिलचस्प यह है कि पिछले साल उनके बेटे सरबर्थो को फिडे वर्ल्ड रैपिड एंड ब्लिट्ज टीम चैंपियनशिप में आनंद के साथ एक ही टीम (टीम फ्रीडम) में खेलने का मौका मिला।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सरबर्थो ने एक बार कहा था, ‘‘शुरुआत के तीन साल तक मैं अपने पिता के साथ शतरंज खेलता था और फिर उन्हें हराने लगा।’’ सरबर्थो ने 6 साल की उम्र से राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में खेलना शुरू कर दिया था। सरबर्थो ने 2023 में अंडर-7 और 2026 में अंडर-11 राष्ट्रीय चैंपियनशिप का खिताब जीता। इसके अलावा, पिछले साल अंडर-10 विश्व चैंपियनशिप भी नाम की थी। कोलकाता के दो दिग्गज ग्रैंडमास्टर सूर्या शेखर गांगुली और दिब्येंदु बरुआ ने सरबर्थो के खेल को निखारने में अहम भूमिका निभाई है। आने वाले महीनों में सरबर्थो मणि का लक्ष्य एक या दो इंटरनेशनल मास्टर नॉर्म हासिल करना है। जिस तेजी से वह आगे बढ़ रहे हैं, उसे देखते हुए यह लक्ष्य ज्यादा दूर नजर नहीं आता।
10 साल के सरबर्थो की रणनीति के आगे नहीं टिके ग्रीस के ग्रैंडमास्टर
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार ग्रैंडमास्टर आरबी रमेश ने बताया कि सरबर्थो की एक शुरुआती चाल ने उन्हें भी हैरान कर दिया था। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार आरबी रमेश ने कहा, ‘‘सरबर्थो मणि के खेल में सबसे खास बात यह थी कि 1.e4 के जवाब में उनके प्रतिद्वंद्वी ने 1…c5 खेला। इसके बाद सरबर्थो ने अपनी दूसरी चाल में बिशप को e2 पर चला दिया। यह कमाल की बात थी।’’
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार आरबी रमेश ने बताया कि जब उन्होंने लाइव मुकाबले में यह चाल देखी तो पहले उन्हें लगा कि शायद लाइव स्कोर दिखाने में कोई तकनीकी गड़बड़ी हुई है। हालांकि, कुछ चालों के बाद उन्हें अहसास हुआ कि सरबर्थो ने वास्तव में बिशप को e2 पर ही चलाया था। इतनी कम उम्र में एक बच्चे का इस तरह अलग और रचनात्मक अंदाज में शतरंज खेलना काफी प्रभावशाली है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार ग्रैंडमास्टर आरबी रमेश ने अपने विश्लेषण में कहा, ‘‘15 चालों के बाद बिसात पर स्थिति देखें तो ऐसा लग रहा था, जैसे यह फिशर रैंडम शतरंज की कोई शुरुआती स्थिति हो। सरबर्थो के लगभग सभी मोहरे अपनी शुरुआती जगहों पर ही फंसे हुए थे, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी ने काफी बेहतर स्थिति बना ली थी।’’ मीडिया रिपोर्ट के अनुसार ग्रैंडमास्टर आरबी रमेश ने कहा, ‘‘भले ही पूरे मुकाबले में दोनों खिलाड़ियों से गलतियां हुईं, लेकिन इसी तरह खेलते हुए सीख मिलती है। आप कुछ चीजें चूकते हैं, कुछ नई चीजें देखते हैं और इस पूरी प्रक्रिया में सीखते हैं।’’


