नई दिल्ली : लखनऊ सुपर जायंट्स के नए स्टार मुकुल चौधरी ने कोलकाता नाइट राइडर्स के खिलाफ 27 गेंदों पर नाबाद 54 रन की शानदार पारी खेलकर सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया। उनकी इस बेहतरीन पारी के बाद उनके पिता दलीप चौधरी का फोन लगातार बजता रहा। मुकुल ने न सिर्फ अपने पिता का सपना पूरा किया, बल्कि उनके वर्षों के संघर्ष और त्याग को भी सार्थक बना दिया।
बेटे को क्रिकेटर बनाने के लिए दलीप ने अपने प्रशासनिक सेवा में जाने का सपना छोड़ दिया, घर बेच दिया और पैसों के लिए भारी कर्ज भी लिया। जमीन विवाद के चलते उन्हें जेल तक जाना पड़ा और परिवार व रिश्तेदारों के ताने भी सुनने पड़े, लेकिन उनका हौसला कभी नहीं टूटा। उन्होंने हर मुश्किल का सामना करते हुए अपने बेटे के सपनों को साकार करने के लिए दिन-रात मेहनत की, जिसका फल आज मुकुल की सफलता के रूप में सबके सामने है।
दलीप ने मुकुल की काबिलियत को परखने के लिए योगराज सिंह और दिनेश लाड जैसे कोच से भी मुलाकात की। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार योगराज ने यहां तक कह दिया कि मुकुल एक दिन भारत के लिए खेलेंगे। उनसे मुकुल ने ट्रेनिंग भी ली। दलीप को वह दिन याद है जब उन्होंने तय किया था कि अगर उनके दो बेटे हुए तो वह यह सुनिश्चित करेंगे कि दोनों क्रिकेटर बनें। उनकी शादी के एक साल बाद मुकुल का जन्म हुआ। उसके बाद एक बेटी हुई। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार दलीप ने अपने बेटे को क्रिकेटर बनाकर अपना सपना पूरा किया। दलीप ने राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) पास करने के अपने सपने छोड़ दिया और रियल एस्टेट में काम किया।
बच्चों के सपनों को उड़ान: क्रिकेटर बनाने की जिद और जुनून
फिर मुकुल को राजस्थान के झुंझुनू से 80 किलोमीटर दूर सीकर में एसबीएस क्रिकेट एकेडमी में दाखिला दिलाया। सीकर वह जगह है जहां से बास्केटबॉल में भारत के कुछ बड़े खिलाड़ी अपनी शारीरिक बनावट की वजह से निकले हैं, लेकिन क्रिकेट में अपने लक्ष्य हासिल करने के लिए कहीं ज्यादा स्पेशल कोचिंग की जरूरत थी। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पिता ने याद करते हुए बताया, ‘शादी से पहले ही मैंने अपने बच्चों को क्रिकेटर बनाने का सपना देखा था। बचपन से लेकर 10 साल की उम्र तक मैंने मुकुल की फिजिकल ट्रेनिंग पर ध्यान दिया। उसके बाद मैंने उसे क्रिकेटर बनाया। मुझे पता था कि यह आसान नहीं होगा।’
सपने के लिए घर बेचने का बड़ा फैसला
छह साल तक राजस्थान प्रशासनिक सेवा की परीक्षा पास न कर पाने के बाद दलीप ने 2017 में एक दिन अपना घर बेचने का फैसला किया। वह होटल का बिजनेस शुरू करना चाहते थे। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने एक्सिस बैंक से एक करोड़ और अपने भाई से एक करोड़ का लोन लिया। उन्होंने अपने दोस्त से भी एक करोड़ उधार लिया। उनका कर्ज बढ़कर तीन करोड़ हो गया। उन्हें जमीन के विवाद में जेल भी जाना पड़ा।
जमीन के झगड़े में जेल पहुंचे दलीप, लेकिन नहीं टूटा हौसला
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार दलीप ने कहा, ‘मैं रोजाना पैसे कमाने के लिए कुछ करना चाहता था, लेकिन यह हो नहीं पाया। पैसों की दिक्कतों की वजह से मुझे जेल जाना पड़ा। उस समय मेरी माली हालत बहुत खराब थी और जमीन के झगड़े भी थे। मैं कभी क्रिमिनल केस में जेल नहीं गया, लेकिन वे जमीन से जुड़े थे। इसलिए मैंने तय किया कि चलो अपने बच्चे पर ध्यान देते हैं।’
योगराज सिंह के मार्गदर्शन में मुकुल की खास ट्रेनिंग
पिता ने जल्द ही मुकुल को जयपुर के अरावली क्रिकेट एकेडमी में दाखिला दिला दिया। दलीप को बेटे की बैटिंग देखकर पता चल गया था कि उसमें दम है, लेकिन वह किसी ऐसे इंसान से यह बात सुनना चाहते थे, जिसने सच में एक चैंपियन बैट्समैन बनाया हो। उन्होंने मुकुल का भारत के क्रिकेटर युवराज सिंह के पिता योगराज के 14 दिन के वेकेशन कैंप में दाखिला दिलाया। उस कैंप के लिए उनके 2.5 लाख रुपये खर्च हुए।
दिनेश लाड से मुलाकात ने बदली मुकुल की दिशा
दलीप ने इसके लिए एक बार फिर लोन लिया। कुछ महीने बाद वह मुंबई आए और रोहित शर्मा के कोच दिनेश लाड से मिले। किसी ने उन्हें बताया कि साउथ जोन के एक पूर्व क्रिकेटर गुड़गांव में एक एकेडमी चलाते हैं इसलिए उन्होंने उन्हें अच्छे गेंदबाजों का सामना करने के लिए वहां भेजने का फैसला किया।
इंडिया खेलने का सपना: एक भरोसे ने जगाई नई उम्मीद
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार दलीप बताते हैं, ‘मुझे बस यह सुनना था कि वह अच्छा है। एक पिता के तौर पर मुझे पता था कि उसमें प्रतिभा है, लेकिन ऐसा एक पिता के प्यार के कारण भी हो सकता है। इसलिए मैं उसे चंडीगढ़, मुंबई, दिल्ली जैसी जगहों पर ले गया। उस 14 दिन के कैंप में योगराज सिंह ने उसे देखा और मुकुल से पूछा, ‘उसके साथ कौन है’। उसने कहा ‘मेरे पिता’। योगराज ने मुझे फोन किया और कहा कि आपका लड़का एक दिन इंडिया खेलेगा। यह उसका चौथा कैंप था। मुझे वैलिडेशन मिल गया और मैं अगले दिन कैंप से चला गया। मैं दिनेश लाड से मिला जिन्होंने कहा कि चिंता की कोई बात नहीं है।’
दलीप ने सुने ताने, लेकिन नहीं टूटा उनका हौसला
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार मुकुल की बल्लेबाजी में गेंद को जोरदार तरीके से हिट करने की क्षमता को कोचों ने जल्दी ही पहचान लिया था। यह उनके टैलेंट का पहला बड़ा संकेत था। हालांकि, जब दलीप घर लौटे तो उन्हें परिवार और रिश्तेदारों की कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा। लोगों ने उनके फैसले पर सवाल उठाए और ताने मारते हुए कहा, “खुद तो जिंदगी खराब कर ली, अब लड़के को भी खराब कर रहे हैं।” दलीप को बार-बार यह सुनना पड़ा कि उन्होंने अपनी जिंदगी बर्बाद कर दी है और अब अपने बेटे का भविष्य भी खेल के नाम पर दांव पर लगा रहे हैं। लेकिन इन सबके बावजूद, उन्होंने अपने बेटे के सपनों पर भरोसा नहीं छोड़ा और हर मुश्किल का डटकर सामना किया।


