भारतवंशी बोधना सिवानंदन ने रचा नया इतिहास, सबसे कम उम्र में बनीं महिला ग्रैंडमास्टर

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नई दिल्ली : शतरंज की दुनिया में भारतवंशी बोधना सिवानंदन ने अपनी प्रतिभा का एक और शानदार अध्याय जोड़ दिया है। महज 11 साल की उम्र में बोधना दुनिया की सबसे कम उम्र की महिला ग्रैंडमास्टर (डब्ल्यूजीएम) बन गई हैं। उन्होंने उज्बेकिस्तान के समरकंद में आयोजित 2026 शतरंज ओलंपियाड में इंग्लैंड की महिला टीम का प्रतिनिधित्व करते हुए अपना तीसरा और आखिरी महिला ग्रैंडमास्टर नॉर्म हासिल किया। इस उपलब्धि के साथ बोधना ने कम उम्र में महिला ग्रैंडमास्टर का खिताब हासिल करने का नया रिकॉर्ड कायम किया।

इसके साथ ही बोधना सिवानंदन ने इस खिताब के लिए जरूरी शर्त पूरी की। बोधना सिवानंदन ने रूस की कैटरीना लाग्नो का रिकॉर्ड तोड़ा। कैटरीना लाग्नो ने 12 साल की उम्र में वुमन ग्रैंड मास्टर नॉर्म हासिल किया था। इंटरनेशनल चेस फेडरेशन (FIDE) ने भी इसकी पुष्टि की है। चीन की पूर्व विश्व चैंपियन होउ यिफान ने भी 12 साल की उम्र में वुमन ग्रैंड मास्टर नॉर्म हासिल किया था। हालांकि, होउ यिफान के नाम सबसे कम उम्र में ग्रैंडमास्टर (GM) बनने का रिकॉर्ड है। उन्होंने यह उपलब्धि 14 साल की उम्र में हासिल की थी। WGM यानी वुमन ग्रैंडमास्टर का खिताब महिला खिलाड़ियों के लिए उपलब्ध सबसे ऊंचे शतरंज खिताबों में से एक है। यह जीवनभर के लिए मिलता है।

बोधना का शानदार प्रदर्शन, 11 में से 6 मुकाबले जीते

इंग्लैंड की महिला टीम के लिए बोधना ने बोर्ड नंबर 1 पर खेलते हुए शानदार प्रदर्शन किया। बोधना सिवानंदन ने 11 में से छह बाजियां जीतीं और कुल 8 अंक हासिल किये। उनके प्रदर्शन की बदौलत इंग्लैंड की टीम महिला वर्ग में 15वें स्थान पर रही।

बोर्ड नंबर 1 पर खेलने वाले खिलाड़ियों में बोधना सिवानंदन टूर्नामेंट की 13वीं सबसे सफल खिलाड़ी रहीं। बोधना सिवानंदन के परिवार की जड़ें तमिलनाडु के त्रिची से जुड़ी हैं। उनके पिता सिवानंदन वेलायुथम आईटी क्षेत्र में काम करते हैं। वह 2007 में अपने परिवार के साथ लंदन चले गए थे। बोधना का जन्म और पालन-पोषण भी लंदन में ही हुआ।

10 साल की उम्र में बोधना ने ग्रैंडमास्टर को हराया

बोधना को बड़ी पहचान 2025 में लिवरपूल में हुई ब्रिटिश शतरंज चैंपियनशिप से मिली। उस समय 10 साल, पांच महीने और तीन दिन की उम्र में उन्होंने ग्रैंडमास्टर पीटर वेल्स को हराया था। इसके साथ ही वह किसी ग्रैंडमास्टर को हराने वाली सबसे कम उम्र की महिला खिलाड़ी बन गई थीं। इससे पहले यह रिकॉर्ड अमेरिका की कैरिसा यिप के नाम था। कैरिसा यिप ने 2019 में 10 साल 11 महीने की उम्र में पहली बार ग्रैंडमास्टर को हराया था।

महज 8 साल की उम्र में 10 डाउनिंग स्ट्रीट पहुंचीं बोधना

ब्रिटिश शतरंज में बोधना सिवानंदन की पहचान पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ी है। अगस्त 2023 में जब वह सिर्फ आठ साल की थीं, तब उन्हें ब्रिटेन के तत्कालीन प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने 10 डाउनिंग स्ट्रीट आमंत्रित किया था। उस समय सुनक ब्रिटेन में शतरंज के लिए आर्थिक सहायता पैकेज की घोषणा की तैयारी कर रहे थे।

बोधना ने हासिल किया दूसरा इंटरनेशनल मास्टर नॉर्म

समरकंद में अपने शानदार प्रदर्शन के साथ बोधना सिवानंदन ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने अपना दूसरा इंटरनेशनल मास्टर (आईएम) नॉर्म भी हासिल कर लिया है। इंटरनेशनल मास्टर का खिताब पाने के लिए आमतौर पर 3 नॉर्म और कम से कम 2400 की रेटिंग जरूरी होती है। बोधना अब तक 2 आईएम नॉर्म हासिल कर चुकी हैं और इस प्रतिष्ठित खिताब की ओर तेजी से बढ़ रही हैं। आईएम नॉर्म महिला और पुरुष, दोनों खिलाड़ियों के लिए होता है। शतरंज के खिताबों की श्रेणी में आईएम, महिला ग्रैंडमास्टर (डब्ल्यूजीएम) और महिला इंटरनेशनल मास्टर (डब्ल्यूआईएम) से ऊपर माना जाता है।

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