चीन का फिर विवादित कदम, अरुणाचल के भारोत्तोलक को वीजा देने से किया इनकार

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नई दिल्ली : अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले अरुणाचल प्रदेश के खिलाड़ियों को लेकर चीन का वीजा विवाद एक बार फिर सामने आया है। चीन के निंगबो में 24 अक्टूबर से होने वाली विश्व भारोत्तोलन चैंपियनशिप के लिए भारतीय टीम में शामिल अरुणाचल प्रदेश के खिलाड़ी चारू पेसी को नत्थी वीजा जारी करने की बात कही गई। इस मामले में वीजा सुविधा सेवा (वीएफएस) ने भारतीय भारोत्तोलन महासंघ से लिखित आश्वासन मांगा कि चारू पेसी नत्थी वीजा स्वीकार करने के लिए तैयार हैं। इस घटनाक्रम से भारतीय खिलाड़ियों की अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भागीदारी और चीन की वीजा नीति को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं।

वेटलिफ्टिंग महासंघ ने चारू का नत्थी वीजा स्वीकार करने से इन्कार करते हुए अंडरटेकिंग देने से इन्कार कर दिया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार महासंघ का कहना है कि चीन की ओर से अरुणाचल प्रदेश निवासियों को दिया जाने वाला नत्थी वीजा भारत सरकार स्वीकार नहीं करती है। ऐसे में महासंघ ने चारू को विश्व चैंपियनशिप में नहीं भेजने का फैसला लिया।

विश्व चैंपियनशिप में मीराबाई चानू की अगुआई में आठ सदस्यीय टीम को शिरकत करनी है। इस टीम का अब तक वीजा नहीं लगा था, लेकिन बुधवार को वीजा की कार्यवाही आगे बढ़ी तो 65 किलो भार वर्ग में खेलने वाले चारू पेसी पर मामला फंस गया। यह चारू का विदेश में पहला अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट होता। यह पहला मामला नहीं है जब अरुणचाल के खिलाड़ियों को चीन ने नत्थी वीजा जारी किया जिसे भारत सरकार ने मंजूरी नहीं दी।

2023 के हागझोउ एशियाड में दो वुशु खिलाड़ियों को नत्थी वीजा दिए जाने के चलते एयरपोर्ट से वापस लौटना पड़ा था। इससे पहले विश्व यूनिवर्सियाड में जा रहे अरुणाचल के वुशु खिलाड़ियों को चीन ने नत्थी वीजा दिया था। यहां भी ये खिलाड़ी चीन नहीं जा पाए थे। चीन दादागिरी दिखाते हुए भारत के अभिन्न हिस्से अरुणाचल प्रदेश को अपना हिस्सा बताता रहा है। इस कारण चीन अरुणाचल वासियों को भारतीय पासपोर्ट पर वीजा देने की बजाय उन्हें अलग से स्टेपल (नत्थी) वीजा देता है, जिसे भारत सरकार स्वीकार नहीं करती है।

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