नई दिल्ली : इंडियन प्रीमियर लीग 2026 में राजस्थान रॉयल्स के क्वालिफायर-2 तक पहुंचने में सबसे अहम भूमिका 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी ने निभाई। बिहार के इस युवा बल्लेबाज ने पूरे सीजन शानदार निरंतरता दिखाई और कई मौकों पर अकेले दम पर टीम को जीत दिलाई। खासतौर पर प्लेऑफ मुकाबलों में, जहां यशस्वी जायसवाल और रियान पराग जैसे बड़े खिलाड़ी उम्मीदों पर खरे नहीं उतर सके, वहां वैभव ने दोनों मैचों में दमदार बल्लेबाजी कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।
एलिमिनेटर में सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ 97 और क्वालिफायर-2 में गुजरात टाइटंस के खिलाफ 96 रन बनाकर वैभव सूर्यवंशी अपने कोच के भरोसे पर खरे उतरे। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार वैभव सूर्यवंशी के कोच मनीष ओझा ने बताया कि एलिमिनेटर से पहले उनकी अपने शिष्य से बातचीत हुई थी। इस दौरान कोच ने उनसे कहा था कि उन्हें रन बनाने होंगे नहीं तो राजस्थान रॉयल्स क्वालिफाई नहीं कर पाएगी।
“टीम को आगे ले जाना है तो तुम्हें रन बनाने होंगे”
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार मनीष ओझा ने बताया, “पारी के पहले बात हुई थी। मैंने यही बताया कि आने वाले मैच में तुम रन बनाओगे तो ही यह चांस है कि राजस्थान रॉयल्स क्वालिफाई करे। तुमको तो रन बनाना ही है नहीं तो टीम क्वालिफाई नहीं कर पाएगी। तुम विकेट पर रहोगे तो स्वभाविक बात है यह देखो पुराना अनुभव है कि रन की बारिश होते रहेगी तो अपना भी रन बनता जाएगा और हर एक बनाया हुआ रन वैभव का एक तरीके का रिकॉर्ड है तो इन्हीं सब चीजों पर बात हुई थी।”
रन बनाने के बाद भी खुद से खुश नहीं थे वैभव
वैभव सूर्यवंशी ने 16 पारियों में 48.50 के औसत और 237.31 के स्ट्राइक रेट से 776 रन बनाए। फिलहाल उनका ऑरेंज कैप पर कब्जा है। वैभव बड़ी पारी खेलने के बाद भी संतुष्ट नहीं दिखते। आउट होने के बाद दुनिया उनकी प्रशंसा करते दिखती है तो दूसरी ओर वह पवेलियन ऐसे लौटते हैं मानो उन्होंने कुछ खास किया ही न हो। मनीष ओझा ने एलिमिनेटर की पारी को लेकर कहा कि अगर वैभव 15-18 ओवर खेलते तो वह 150 से 175 रन बना देते। यह मौका गंवाने का उनको अफसोस होता है।
बड़ी पारी के बाद वैभव बोले—150-175 रन बनाना था लक्ष्य
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार मनीष ओझा ने कहा कि वैभव सूर्यवंशी की जगह कोई भी खिलाड़ी होता तो निराश जरूर होता, क्योंकि आईपीएल में पिछले 12–15 वर्षों से जो रिकॉर्ड बना हुआ था, वह टूटते-टूटते रह गया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने बताया कि 30 गेंदों में शतक बनाने का क्रिस गेल का रिकॉर्ड अगर एक सही शॉट लग जाता तो टूट सकता था। मनीष ओझा के अनुसार, वैभव ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 97 रन तक पहुंचने के बाद भी खुद को उस उपलब्धि से दूर पाया, और ऐसे में अफसोस होना स्वाभाविक है। उन्होंने यह भी कहा कि जब कोई बल्लेबाज लंबे समय तक क्रीज पर रहकर बड़े शॉट लगा रहा हो और अचानक आउट हो जाए, तो निराशा होना तय है, खासकर जब 150 या 175 रनों तक पहुंचने का मौका सामने दिख रहा हो।


