2018 के विवादित नियम फिर चर्चा में, डोपिंग को अपराध बनाने की पहल

0

नई दिल्ली : डोपिंग को अपराध की श्रेणी में लाने की खेल मंत्रालय की तैयारी के बीच 2018 के डोपिंग रोधी विधेयक का मसौदा फिर चर्चा में आ गया है। उस मसौदे में प्रतिबंधित पदार्थों की आपूर्ति करने वालों के लिए जेल और भारी जुर्माने जैसे कड़े प्रावधान शामिल थे, जिस पर भारतीय ओलंपिक संघ सहित कई संस्थाओं ने बहस और विरोध भी जताया था। इसी मुद्दे ने गुरुवार (17 अप्रैल) को नई दिल्ली में हुई विश्व डोपिंग निरोधक एजेंसी की वैश्विक डोपिंग रोधी खुफिया और जांच नेटवर्क की बैठक में भी प्रमुख रूप से ध्यान खींचा, जहां डोपिंग को आपराधिक अपराध बनाने पर गंभीर चर्चा हुई।

विटोल्ड बांका ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि वह सरकारों से डोपिंग को अपराध की श्रेणी में लाने की अपील करेंगे, लेकिन इसका फोकस उन लोगों पर होना चाहिए जो प्रतिबंधित दवाओं की सप्लाई करते हैं या खिलाड़ियों तक पहुंचाते हैं, ताकि खिलाड़ियों को सीधे नुकसान न हो। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने जोर देकर कहा कि असली जिम्मेदार नेटवर्क को निशाने पर लेना जरूरी है। करीब एक दशक पहले मुकुल मुद्गल की अध्यक्षता वाली समिति ने भी भारत में डोपिंग को अपराध घोषित करने के सुझाव दिए थे, जिन पर उस समय सरकार ने गंभीरता से विचार किया था।

विधेयक के प्रावधानों में क्या था शामिल

न्यायमूर्ति मुद्गल ने ही भारतीय क्रिकेट में 2013 के आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग मामले की जांच की थी। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार विधेयक के मसौदे में कहा गया था ,’कोई भी व्यक्ति जो व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए किसी एथलीट को नियमित रूप से प्रतिबंधित पदार्थ की आपूर्ति करने में लिप्त पाया जाता है, वह ‘तस्करी’ के अपराध का दोषी माना जाएगा और उसे साधारण कारावास दिया जायेगा जिसकी अवधि एक वर्ष तक हो सकती है। इसके साथ ही उस पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है, जो 10 लाख रुपये तक हो सकता है।’

प्रावधान विधेयक से हटा दिया गया

हालांकि, यह प्रावधान 2022 में पारित और पिछले साल संशोधित हुए विधेयक से हटा दिया गया था। उस समय सरकार ने आपराधिक कानून की बजाय निवारक कानून पर विचार किया था। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार आईओए ने उस समय इस प्रावधान का विरोध किया था और उसके तत्कालीन महासचिव राजीव मेहता ने कहा था कि प्रदर्शन बेहतर करने वाली दवाओं की आपूर्ति को पूरी तरह से अपराध की श्रेणी में नहीं रख सकते क्योंकि खेलों से इतर उनका इस्तेमाल हो सकता है।

जांच में दोषी पाए जाने पर खिलाड़ियों पर लगेगा प्रतिबंध

खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने गुरुवार को संकेत दिए कि डोपिंग को अपराध बनाने के लिए सख्त प्रावधान लागू किए जा सकते हैं। पिछले तीन वर्षों से भारत डोप उल्लंघन के मामलों में विश्व डोपिंग निरोधक एजेंसी की वैश्विक सूची में शीर्ष पर बना हुआ है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार मांडविया ने सम्मेलन में कहा कि सरकार उन सहयोगी स्टाफ और तस्करी में शामिल लोगों के खिलाफ आपराधिक प्रावधान लाने पर काम कर रही है, जो खिलाड़ियों को प्रतिबंधित दवाएं उपलब्ध कराते हैं। फिलहाल देश में ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त दंड का प्रावधान नहीं है और कार्रवाई मुख्य रूप से खिलाड़ियों तक ही सीमित रहती है, जहां जांच में दोषी पाए जाने पर उन्हें निलंबन या प्रतिबंध का सामना करना पड़ता है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here