नई दिल्ली: इंग्लैंड के खिलाफ 45 दिन तक चले इस टेस्ट मुकाबले में भारतीय टीम ने दमदार प्रदर्शन किया। भले ही सीरीज 2-2 से ड्रॉ रही, लेकिन टीम इंडिया ने हर मैच में जीत का जज्बा दिखाया। 5 टेस्ट मैचों का यह स्कोरलाइन शायद शुभमन गिल की अगुवाई में खेल रही टीम के साथ नाइंसाफी साबित हो। रोहित शर्मा और विराट कोहली के संन्यास के बाद इंग्लैंड दौरे पर भारतीय टीम इस सवाल के साथ पहुंची थी कि वह सीरीज 0-4 से हारेगी या 0-5 से क्लीन स्वीप का सामना करेगी। 20 जून को जब दौरे की शुरुआत हुई तो किसी ने नहीं सोचा था कि 4 अगस्त को जब सीरीज का समापन होगा तब ओवल स्टेडियम बेन स्टोक्स के साथ शुभमन गिल ट्रॉफी उठाते दिखेंगे।
सीरीज में साफ हो गया कि भारतीय क्रिकेट का भविष्य उज्जवल है। 45 दिन के क्रिकेट में इंग्लैंड के खिलाफ भारतीय टीम ने जबरदस्त खेल दिखाया। सीरीज के स्कोरलाइन 2-2 से 5 टेस्ट मैचों का आकलन शायद शुभमन गिल की टीम के साथ नाइंसाफी होगी। तेंदुलकर-एंडरसन सीरीज को मैनचेस्टर टेस्ट मैच के आखिरी दिन के पलों से आंकना चाहिए। जब बेधड़क क्रिकेट खेलने का दंभ भरने वाले बेन स्टोक्स मैच ड्रॉ समाप्त करने के लिए रविंद्र जडेजा और वाशिंगटन सुंदर के आगे गिड़गिड़ाए थे।
सीरीज भले रही बराबरी पर, लेकिन खेल में भारत का रहा दबदबा
भारत-इंग्लैंड टेस्ट सीरीज की तीव्रता को इस बात से समझा जा सकता है कि लॉर्ड्स टेस्ट के तीसरे दिन के अंत में आउट होने के डर से जैक क्रॉली और बेन डकेट मैदान पर देर से उतरे। यह पल साबित करता है कि सीरीज में भारतीय गेंदबाज़ों का दबदबा कितना गहरा था। स्टोक्स के दोनों ओपनर जैसे-तैसे समय बर्बाद करके विकेट बचाने की कोशिश में लगे थे। इस रिकॉर्ड से भापना चाहिए कि टॉप 5 सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाजों में 3 भारतीय हैं। 21 में से 12 शतक भारतीय बल्लेबाजों ने लगाए हैं। इस सीरीज को ओवल में 30 रन के अंदर 5 विकेट लेकर अंग्रेजों के जबड़े से जीत छीनने के लिए याद रखना चाहिए।
सीरीज बराबरी पर क्यों रुकी? जानिए 5 मैचों के उतार-चढ़ाव की कहानी
भारतीय टीम का पूरे सीरीज में दबदबा रहा, लेकिन निर्णायक मौकों पर टीम शुभमन गिल की अगुवाई में साधारण खेल दिखा गई। यही चूक भारत को सीरीज जीत से दूर कर गई और मुकाबला 2-2 से ड्रॉ रहा। लीड्स टेस्ट में 5 शतक लगाने के बाद भी टीम हार गई। इस मैच में फील्डिंग ने निराश किया। 7 कैच टपकाकर बंटाधार हुआ। रही सही कसर दूसरी पारी में गेंदबाजी ने पूरी कर दी। 371 रन के लक्ष्य के जवाब में जैक क्रॉली और बेन डकेट ने 188 रन की साझेदारी की। जसप्रीत बुमराह और मोहम्मद सिराज जैसे गेंदबाज विकेट के लिए तरस गए।
दबाव के पल में चूकी टीम इंडिया, लॉर्ड्स टेस्ट बना टर्निंग पॉइंट
इसके बाद भारतीय टीम को लॉर्ड्स टेस्ट में हार का सामना करना पड़ा। पहली पारी में 11 रन के भीतर 4 विकेट गंवाने के चलते वह बढ़त हासिल करने से चूक गई। 193 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए टीम दबाव में टूट गई और मुकाबला गंवा बैठी। बेन स्टोक्स की करिशमाई गेंदबाजी के आगे टॉप ऑर्डर का कोई भी बल्लेबाज डटकर नहीं खेल सका। रविंद्र जडेजा ने जसप्रीत बुमराह और मोहम्मद सिराज के साथ मिलकर टीम को जीत के करीब पहुंचाया, लेकिन 22 रन से हार का समाना करना पड़ा।
अगर बनना है चैंपियन, तो ये कमी करनी होगी दूर
भारतीय टीम में विश्व क्रिकेट पर राज करने की पूरी क्षमता है, लेकिन इसके लिए उसे ऑलराउंडर्स के मोह से बाहर निकलना होगा। बल्लेबाज़ी को मजबूत करने के चक्कर में गेंदबाज़ी से समझौता करना टीम को महंगा पड़ सकता है। ऐसे एप्रोच से नतीजा यही होगा। भारतीय टीम को कुलदीप यादव को खिलाना चाहिए थे। वह लीड्स, एजबेस्टन और लॉर्ड्स में परिस्थितियों का फायदा उठा सकते थे। मैनचेस्टर में भी वह इंग्लैंड को बल्लेबाजों को परेशान करते। बल्लेबाजी में नंबर 3 कमजोरी है। साई सुदर्शन और करुण नायर प्रभावित नहीं कर पाए। इस कमजोरी को भी जल्द से जल्द दूर करना होगा।
शुभमन गिल में है लीडर बनने का दम, लेकिन कप्तानी में चाहिए और निखार
भारत ने यह सीरीज़ 2-2 से बराबरी पर खत्म की, लेकिन कप्तान के रूप में शुभमन गिल को अभी काफी कुछ सीखना बाकी है। कई मौकों पर उनके साधारण फैसले टीम को भारी पड़े। उन्होंने सीरीज में कई बार मैच को हाथ से निकलने दिया। वह कई आउट ऑफ आइडिया दिखे। गिल की कप्तानी की सबसे बड़ी कमी रही चौथे गेंदबाज का इस्तेमाल न करने जिद। वह तीन प्रमुख तेज गेंदबाजों पर काफी निर्भर दिखे। अंग्रेज बल्लेबाजों को आसानी से रन बनाने का मौका देकर हावी होने दिया। हालांकि, कप्तान के तौर पर गिल की यह पहली सीरीज थी। उन्हें वक्त के साथ इन कमियों पर काम करना होगा।


