नई दिल्ली: अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) के शीर्ष अधिकारी देश के आठ प्रमुख फुटबॉल क्लबों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) से मुलाकात करेंगे। यह बैठक इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) को रोके जाने के संदर्भ में उत्पन्न हालात और देश में फुटबॉल की ‘वर्तमान स्थिति और दिशा’ को लेकर व्यक्त की गई चिंताओं को दूर करने के प्रयास के तहत आयोजित की जा रही है। एआईएफएफ का उद्देश्य इन क्लबों के साथ संवाद स्थापित कर स्थिति को स्पष्ट करना और भविष्य की रणनीति पर सहमति बनाना है। आईएसएल के ये आठ क्लब अपने भविष्य को लेकर चिंतित है।
आईएसएल के आयोजक (फुटबॉल स्पोर्ट्स डेवलपमेंट लिमिटेड – एफएसडीएल) ने राष्ट्रीय महासंघ के साथ मास्टर राइट्स एग्रीमेंट (एमआरए) के नवीनीकरण नहीं होने पर देश की शीर्ष फुटबॉल लीग पर रोक लगा दी है। एआईएफएफ और एफएसडीएल के बीच 15 साल का एमआरए 18 दिसंबर को समाप्त हो रहा है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार एआईएफएफ ने एक्स पर लिखा, ‘एआईएफएफ अधिकारी सात अगस्त 2025 गुरुवार को नई दिल्ली में इंडियन सुपर लीग के आठ क्लबों के सीईओ के साथ भारतीय फुटबॉल से संबंधित मुद्दों पर चर्चा करने के लिए मिलेंगे।’ एआईएफएफ (एआईएफएफ) के साथ ‘सकारात्मक बातचीत’ की मांग करने वाले पत्र पर बेंगलुरु एफसी, जमशेदपुर एफसी, एफसी गोवा, हैदराबाद एफसी, केरल ब्लास्टर्स, नॉर्थईस्ट यूनाइटेड एफसी, ओडिशा एफसी और पंजाब एफसी ने हस्ताक्षर किए हैं।
हालांकि इस पहल पर देश के कुछ बड़े क्लबों ने अब तक समर्थन नहीं जताया है। कोलकाता के मोहन बागान सुपर जायंट, ईस्ट बंगाल और मोहम्मडन स्पोर्टिंग के अलावा मुंबई सिटी एफसी और चेन्नईयिन एफसी के अधिकारियों ने इस पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। इन प्रमुख क्लबों की गैरमौजूदगी से बातचीत की दिशा और प्रभाव पर सवाल उठ रहे हैं। एआईएफएफ अध्यक्ष कल्याण चौबे पिछले ने यह आश्वासन दिया था कि इस आईएसएल के आगामी सत्र का आयोजन होगा। उन्होंने हालांकि शीर्ष-स्तरीय घरेलू प्रतियोगिता के शुरू होने की तारीख के बारे में कुछ नहीं बताया। आईएसएल का सत्र आम तौर पर सितंबर से अप्रैल तक चलता है।


