प्रकाश पादुकोण से पीवी सिंधु तक, 49 साल में भारत ने जीते 15 विश्व चैंपियनशिप पदक

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नई दिल्ली : बीडब्ल्यूएफ विश्व चैंपियनशिप में भारत की पदक यात्रा करीब पांच दशक पुरानी है। प्रकाश पादुकोण से शुरू हुआ यह सफर पीवी सिंधु, साइना नेहवाल, किदांबी श्रीकांत और ज्वाला गुट्टा जैसे सितारों से होता हुआ अब लक्ष्य सेन तथा सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी-चिराग शेट्टी की जोड़ी तक पहुंच चुका है। बैडमिंटन वर्ल्ड फेडरेशन विश्व चैंपियनशिप की शुरुआत 1977 में हुई थी और इन 49 वर्षों के सफर में 11 भारतीय खिलाड़ियों ने कुल 15 पदक जीते हैं। भारत के खाते में अब तक एक स्वर्ण, चार रजत और 10 कांस्य पदक हैं, जो विश्व बैडमिंटन के मंच पर देश के लगातार बढ़ते प्रभाव को दर्शाते हैं।

इस प्रतिष्ठित चैंपियनशिप में भारत का खाता 1983 में तब खुला जब प्रकाश पादुकोण ने पुरुष एकल (मेंस सिंगल्स) में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रचा। इसके बाद भारतीय बैडमिंटन ने धीरे-धीरे विश्व मंच पर अपनी जगह मजबूत की। महिला एकल (विमेंस सिंगल्स) में साइना नेहवाल और पीवी सिंधु ने भारत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। मेंस सिंगल्स में किदांबी श्रीकांत, बीसाई प्रणीत, लक्ष्य सेन और एचएस प्रणॉय ने अपनी छाप छोड़ी।

महिला युगल में ज्वाला गुट्टा और अश्विनी पोनप्पा ने विश्व मंच पर भारत की ताकत दिखाई, जबकि पुरुष युगल में सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी की जोड़ी ने भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। विश्व चैंपियनशिप में एक कांस्य पदक से शुरू हुई भारत की कहानी अब 15 पदकों तक पहुंच चुकी है। इन पदकों के पीछे 11 भारतीय खिलाड़ियों की शानदार उपलब्धियां हैं, लेकिन हर पदक देश में बैडमिंटन के विकास और बदलते दौर की एक अलग कहानी बयां करता है।

1983: प्रकाश पादुकोण ने विश्व मंच पर भारत को दिलाया पहला पदक

भारतीय बैडमिंटन के इतिहास में प्रकाश पादुकोण का नाम एक मील के पत्थर की तरह दर्ज है। प्रकाश पादुकोण ने 1983 में मेंस सिंगल्स में कांस्य पदक जीतकर विश्व चैंपियनशिप में भारत को पहला पदक दिलाया। उस समय विश्व स्तर पर बैडमिंटन में भारतीय खिलाड़ियों की मौजूदगी वर्तमान जैसी मजबूत नहीं थी। ऐसे में प्रकाश पादुकोण का कांस्य सिर्फ एक पदक नहीं था, बल्कि संकेत था कि भारत भी दुनिया के शीर्ष शटलरों को चुनौती दे सकता है।

2011: ज्वाला गुट्टा-अश्विनी पोनप्पा ने युगल में रचा इतिहास

प्रकाश पादुकोण के बाद भारत को विश्व चैंपियनशिप में दूसरा पदक जीतने में 28 साल लग गए। साल 2011 में ज्वाला गुट्टा और अश्विनी पोनप्पा की जोड़ी ने महिला युगल में कांस्य पदक जीतकर यह इंतजार खत्म किया। यह भारत के लिए खास उपलब्धि थी, क्योंकि विश्व चैंपियनशिप में महिला युगल में यह देश का पहला पदक था। इस जोड़ी की सफलता ने यह भी दिखाया कि भारत की पदक की संभावनाएं सिर्फ पुरुष और महिला एकल तक सीमित नहीं हैं।

2013 और 2014: पीवी सिंधु के दो कांस्य से नया दौर शुरू

2013 में भारतीय बैडमिंटन को एक नया सितारा मिला। पीवी सिंधु ने महिला एकल में कांस्य पदक जीतकर विश्व चैंपियनशिप में अपना पहला पदक हासिल किया। वह तब युवा थीं, लेकिन उनके खेल में दुनिया की शीर्ष खिलाड़ियों को चुनौती देने का आत्मविश्वास साफ दिखाई देने लगा था। पीवी सिंधु ने अगले ही साल 2014 में भी कांस्य पदक जीता। लगातार दो विश्व चैंपियनशिप में पदक जीतने से उन्होंने भारतीय महिला बैडमिंटन में अपनी जगह मजबूत की।

2015: साइना नेहवाल ने रचा इतिहास

साइना नेहवाल ने 2015 में महिला एकल में रजत पदक जीतकर भारतीय बैडमिंटन के इतिहास में एक और बड़ा अध्याय जोड़ा। साइना नेहवाल विश्व चैंपियनशिप का फाइनल खेलने वाली पहली भारतीय बनीं। वह खिताब जीतने से भले ही चूक गईं हों, लेकिन उनके रजत पदक का असर विश्व चैंपियनशिप के रिकॉर्ड तक सीमित नहीं रहा। साइना ने भारत में बैडमिंटन को लोकप्रिय बनाने और युवाओं को इसकी ओर आकर्षित करने में बड़ी भूमिका निभाई।

2017: पीवी सिंधु को रजत और साइना को कांस्य

2017 की विश्व चैंपियनशिप भारत के लिए बेहद खास रही। एक ही संस्करण में भारत की दो महिला एकल खिलाड़ियों ने पदक जीते। पीवी सिंधु ने शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक हासिल किया। वह फाइनल तक पहुंचीं, लेकिन खिताब जीतने से चूक गईं। इसी संस्करण में साइना नेहवाल ने कांस्य पदक जीता। इस तरह महिला एकल में भारत की दो बड़ी खिलाड़ियों ने एक ही विश्व चैंपियनशिप में पोडियम पर जगह बनाई।

2018: पीवी सिंधु ने फिर खेला फाइनल

2018 में पीवी सिंधु ने लगातार दूसरी बार विश्व चैंपियनशिप के महिला एकल फाइनल में जगह बनाई। हालांकि, वह इस बार भी स्वर्ण पदक नहीं जीत पाईं। उन्हें रजत पदक से ही संतोष करना पड़ा। साल 2017 और 2018 में लगातार दो रजत पदक जीतना पीवी सिंधु की निरंतरता का प्रमाण था। वह विश्व चैंपियनशिप में लगातार दो बार खिताब की दावेदार बन चुकी थीं।

2019: पीवी सिंधु बनीं विश्व चैंपियन

2019 भारतीय बैडमिंटन के इतिहास का सबसे सुनहरा साल रहा। पीवी सिंधु ने महिला एकल का स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। वह विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी बनीं। मतलब 2013 के कांस्य से शुरू हुआ पीवी सिंधु का सफर छह साल में विश्व खिताब तक पहुंच गया।

पीवी सिंधु ने इस दौरान दो कांस्य और दो रजत पदक भी जीते। 2019 में ही भारत को पुरुष एकल में भी पदक मिला। बी साई प्रणीत ने कांस्य पदक जीता। इस तरह भारत ने एक ही संस्करण में महिला एकल का स्वर्ण और पुरुष एकल का कांस्य पदक अपने नाम किया।

2021: किदांबी श्रीकांत और लक्ष्य सेन ने जीते पदक

2021 में भारतीय पुरुष बैडमिंटन ने विश्व चैंपियनशिप में अपनी सबसे मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई। किदांबी श्रीकांत ने पुरुष एकल के फाइनल में पहुंचकर इतिहास रचा। वह विश्व चैंपियनशिप के पुरुष एकल फाइनल में पहुंचने वाले पहले भारतीय बने। उन्हें रजत पदक मिला। इसी संस्करण में युवा लक्ष्य सेन ने कांस्य पदक जीतकर अपनी क्षमता का परिचय दिया।

2022: सात्विक-चिराग की जोड़ी ने बढ़ाया भरोसा

2022 में भारत के पदकों का सिलसिला पुरुष युगल तक पहुंचा। सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी की जोड़ी ने कांस्य पदक जीता। यह जोड़ी उस समय तक विश्व बैडमिंटन में भारत की सबसे बड़ी युगल उम्मीद बन चुकी थी। दोनों की आक्रामक शैली, तेज खेल और कोर्ट पर तालमेल ने उन्हें दुनिया की शीर्ष जोड़ियों में शामिल किया।

2023: एचएस प्रणॉय ने दिखाया जुझारूपन

2023 में एचएस प्रणॉय ने पुरुष एकल में कांस्य पदक जीतकर भारत के पदकों की संख्या बढ़ाई। एचएस प्रणॉय का सफर इसलिए भी खास रहा, क्योंकि उन्होंने कई कठिन मुकाबलों में शानदार वापसी की और शीर्ष खिलाड़ियों को चुनौती दी। विश्व चैंपियनशिप का कांस्य उनके लंबे अंतरराष्ट्रीय करियर की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल हुआ।

2025: सात्विक-चिराग फिर पोडियम पर

भारत के 15वें पदक की कहानी सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी की जोड़ी से जुड़ी है। साल 2025 में दोनों ने पुरुष युगल में फिर कांस्य पदक जीता। यह विश्व चैंपियनशिप में इस जोड़ी का दूसरा पदक था। साल 2022 के बाद 2025 में दोबारा पोडियम पर पहुंचना बताता है कि सात्विक और चिराग ने विश्व स्तर पर अपनी निरंतरता कायम रखी है। इस पदक के साथ भारत की विश्व चैंपियनशिप में पदकों की संख्या 15 हो गई।

बीडब्ल्यूएफ विश्व चैंपियनशिप में पदक जीतने वाले भारतीय शटलर
साल खिलाड़ी स्पर्धा पदक (स्थान)
1983 प्रकाश पादुकोण पुरुष एकल कांस्य पदक (तीसरा स्थान)
2011 ज्वाला गुट्टा अश्विनी पोनप्पा महिला युगल कांस्य पदक (तीसरा स्थान)
2013 पीवी सिंधु महिला एकल कांस्य पदक (तीसरा स्थान)
2014 पीवी सिंधु महिला एकल कांस्य पदक (तीसरा स्थान)
2015 साइना नेहवाल महिला एकल रजत पदक (दूसरा स्थान)
2017 पीवी सिंधु महिला एकल रजत पदक (दूसरा स्थान)
2017 साइना नेहवाल महिला एकल कांस्य पदक (तीसरा स्थान)
2018 पीवी सिंधु महिला एकल रजत पदक (दूसरा स्थान)
2019 पीवी सिंधु महिला एकल स्वर्ण पदक (पहला स्थान)
2019 बीसाई प्रणीत पुरुष एकल कांस्य पदक (तीसरा स्थान)
2021 किदांबी श्रीकांत पुरुष एकल रजत पदक (दूसरा स्थान)
2021 लक्ष्य सेन पुरुष एकल कांस्य पदक (तीसरा स्थान)
2022 चिराग शेट्टी-सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी पुरुष युगल कांस्य पदक (तीसरा स्थान)
2023 एचएस प्रणॉय पुरुष एकल कांस्य पदक (तीसरा स्थान)
2025 चिराग शेट्टी-सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी पुरुष युगल कांस्य पदक (तीसरा स्थान)

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