रोहित से रहाणे तक, 16 दिग्गज भारतीय क्रिकेटर जिन्हें मैदान से नहीं मिला फेयरवेल

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नई दिल्ली : क्रिकेट केवल आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि भावनाओं, यादों और उन पलों का भी खेल है, जिन्हें प्रशंसक जीवनभर संजोकर रखते हैं। किसी खिलाड़ी का डेब्यू जितना खास होता है, उतना ही महत्वपूर्ण उसका आखिरी मैच भी होता है। हर क्रिकेटर चाहता है कि वह अपने प्रशंसकों के बीच मैदान पर आखिरी बार उतरे, साथी खिलाड़ियों से गले मिले, दर्शकों की तालियों के बीच बल्ला या गेंद उठाकर विदाई ले और फिर क्रिकेट को अलविदा कहे। लेकिन हर दिग्गज खिलाड़ी को यह यादगार मौका नसीब नहीं होता। कई महान भारतीय क्रिकेटरों ने बिना किसी औपचारिक फेयरवेल मैच के ही अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से विदाई ली।

भारतीय क्रिकेट का इतिहास बताता है कि हर महान खिलाड़ी को यह सौभाग्य नहीं मिला। कई ऐसे दिग्गज रहे जिन्होंने वर्षों तक देश के लिए शानदार प्रदर्शन किया रिकॉर्ड बनाए विश्व कप जिताए और भारतीय क्रिकेट को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया लेकिन जब विदाई का समय आया तो उन्हें मैदान से सम्मानजनक फेयरवेल नहीं मिला। 30 जुलाई 2026 को इस अनचाही सूची में अजिंक्य रहाणे का भी नाम जुड़ गया। अंजिक्य रहाणे न सिर्फ बल्लेबाज बल्कि बतौर कप्तान भी काफी सफल रहे। उनकी अगुआई में भारत ने 11 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले जिसमें सिर्फ एक में हार झेली।

साल 2025 में विराट कोहली और रोहित शर्मा के टेस्ट क्रिकेट से अचानक संन्यास ने इस बहस को एक बार फिर चर्चा में ला दिया। हालांकि, दोनों अभी वनडे क्रिकेट खेल रहे हैं, इसलिए उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से पूरी तरह संन्यास नहीं लिया है। दोनों खिलाड़ियों ने टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को मैदान पर विदाई दी, लेकिन टेस्ट क्रिकेट में उन्हें प्रशंसकों के सामने अपना आखिरी मुकाबला खेलने का मौका नहीं मिला। यह सिलसिला सिर्फ अजिंक्य रहाणे, रोहित शर्मा और विराट कोहली तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे पहले भी कई भारतीय दिग्गज क्रिकेटर बिना फेयरवेल मैच खेले ही अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से विदा हो चुके हैं।

राहुल द्रविड़: द वॉल की सादगीभरी विदाई

13288 टेस्ट रन और 10889 वनडे रन बनाने वाले राहुल द्रविड़ भारतीय क्रिकेट के सबसे भरोसेमंद बल्लेबाजों में रहे। राहुल द्रविड़ ने चुपचाप संन्यास लिया और कभी विदाई समारोह की मांग नहीं की।

वीवीएस लक्ष्मण: 281 रन की अमर पारी के नायक

वीवीएस लक्ष्मण ने टेस्ट में 8781 रन बनाए और भारत को कई अविस्मरणीय जीत दिलाईं। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 281 रन की पारी भारतीय क्रिकेट इतिहास की सबसे महान पारियों में गिनी जाती है। उन्होंने भी बिना फेयरवेल मैच के क्रिकेट को अलविदा कहा।

अजीत अगरकर: कम आंके गए महान ऑलराउंडर

वनडे में 288 विकेट लेने वाले अजीत अगरकर लंबे समय तक भारत के प्रमुख तेज गेंदबाज रहे। बल्ले से भी उन्होंने उपयोगी योगदान दिया। अजित अगरकर का करियर भी बिना औपचारिक विदाई के समाप्त हुआ।

जहीर खान: भारत के महान तेज गेंदबाज, सादगी से खत्म हुआ अंतरराष्ट्रीय सफर

311 टेस्ट और 282 वनडे विकेट लेने वाले जहीर खान वर्षों तक भारतीय तेज गेंदबाजी के अगुआ रहे। भारत की 2011 विश्व कप जीत में जहीर खान का योगदान बेहद अहम था। इतने बड़े गेंदबाज का करियर भी बिना किसी औपचारिक फेयरवेल मैच के समाप्त हुआ।

वीरेंद्र सहवाग: तूफानी बल्लेबाजी के बाद शांत विदाई

वीरेंद्र सहवाग ने टेस्ट में 8586 और वनडे में 8273 रन बनाये। टेस्ट क्रिकेट में उनका 49.34 का औसत और दो तिहरे शतक भारतीय क्रिकेट इतिहास की धरोहर हैं। लंबे समय तक टीम से बाहर रहने के बाद वीरेंद्र सहवाग ने संन्यास लिया, लेकिन उन्हें मैदान पर आखिरी मैच खेलने का अवसर नहीं मिला।

एमएस धोनी: तीन आईसीसी ट्रॉफियों के नायक की विदाई रही सादगीभरी

महेंद्र सिंह धोनी भारतीय क्रिकेट के सबसे सफल कप्तान माने जाते हैं। उन्होंने भारत को टी20 विश्व कप वनडे विश्व कप और चैंपियंस ट्रॉफी जिताई। टेस्ट क्रिकेट में 90 मैचों में 4876 रन वनडे में 350 मैचों में 10773 रन और टी20 अंतरराष्ट्रीय में 1617 रन उनके शानदार करियर की गवाही देते हैं। विकेटकीपर के रूप में उन्होंने 795 अंतरराष्ट्रीय शिकार किए। एमएस धोनी ने दिसंबर 2014 में टेस्ट क्रिकेट से अचानक संन्यास लिया। इसके बाद अगस्त 2020 में सोशल मीडिया पोस्ट के जरिये अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया। दुनिया के सबसे सफल कप्तानों में शामिल इस खिलाड़ी को भी मैदान पर आखिरी बार भारतीय जर्सी में विदाई नहीं मिली।

सुरेश रैना: भारत के पहले टी20 शतक के नायक

सुरेश रैना भारत के पहले टी20 अंतरराष्ट्रीय शतकवीर बने। सुरेश रैना ने वनडे में 5615 और टी20 अंतरराष्ट्रीय में 1605 रन बनाए। शानदार फील्डिंग और उपयोगी स्पिन गेंदबाजी ने उन्हें टीम का अहम हिस्सा बनाया। सुरेश रैना ने भी एमएस धोनी के साथ लगभग एक ही समय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहा, लेकिन मैदान पर आखिरी मैच नहीं खेल सके।

युवराज सिंह: छह छक्कों और विश्व कप के नायक की विदाई रही अधूरी

युवराज सिंह भारतीय क्रिकेट के सबसे बड़े मैच विनरों में गिने जाते हैं। साल 2011 विश्व कप में ‘प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट’ बनने वाले युवराज ने वनडे में 8701 रन बनाने के साथ 111 विकेट भी लिए। टी20 अंतरराष्ट्रीय में उन्होंने सिर्फ 12 गेंदों में अर्धशतक और स्टुअर्ट ब्रॉड के एक ओवर में छह छक्के लगाने जैसी उपलब्धि अपने नाम की। कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से लड़कर वापसी करने वाले युवराज सिंह ने जून 2019 में प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिये संन्यास की घोषणा की। उनके जैसा योद्धा भी मैदान पर अंतिम सलामी से वंचित रह गया।

गौतम गंभीर: विश्व कप के दो फाइनल के नायक की खामोश विदाई

साल 2007 टी20 विश्व कप और 2011 वनडे विश्व कप फाइनल में भारत की जीत की बुनियाद रखने वाले गौतम गंभीर ने टेस्ट में 4154 और वनडे में 5238 रन बनाए। कई अहम मौकों पर उन्होंने भारत को संकट से निकाला। साल 2018 में उन्होंने घरेलू क्रिकेट से संन्यास लिया, लेकिन भारतीय टीम की ओर से उन्हें आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने का अवसर नहीं मिला।

हरभजन सिंह: ‘टर्बनेटर’ की खामोश विदाई

417 टेस्ट और 269 वनडे विकेट लेने वाले हरभजन सिंह ने भारतीय स्पिन आक्रमण को वर्षों तक मजबूती दी। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उनकी ऐतिहासिक गेंदबाजी आज भी याद की जाती है। टीम से बाहर होने के बाद हरभजन सिंह ने संन्यास लिया, लेकिन आखिरी बार भारतीय टीम की जर्सी पहनकर मैदान पर उतरने का अवसर नहीं मिला।

रविचंद्रन अश्विन: आधुनिक क्रिकेट के दिग्गज स्पिनर की खामोश विदाई

रविचंद्रन अश्विन भारत के सबसे सफल स्पिनरों में शामिल हैं। टेस्ट क्रिकेट में 537 विकेट और 3503 रन उन्हें महान ऑलराउंडरों की सूची में खड़ा करते हैं। उन्होंने टेस्ट में 37 बार पांच या उससे ज्यादा विकेट हासिल किये। इतने शानदार करियर के बावजूद उनका टेस्ट करियर भी अचानक समाप्त हुआ और उन्हें घरेलू मैदान पर विदाई मैच खेलने का मौका नहीं मिला।

शिखर धवन: बड़े टूर्नामेंट के सबसे भरोसेमंद खिलाड़ी, लेकिन मैदान से विदाई रही अधूरी

शिखर धवन बड़े टूर्नामेंटों के खिलाड़ी माने जाते थे। टेस्ट में 7 शतक वनडे में 17 शतक और 6793 रन उनके शानदार करियर की पहचान हैं। चैंपियंस ट्रॉफी 2013 में वह सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज रहे। भारतीय टीम से बाहर होने के बाद उन्होंने सोशल मीडिया के जरिये संन्यास का ऐलान किया। उन्हें भी दर्शकों के सामने आखिरी मैच खेलने का अवसर नहीं मिला।

चेतेश्वर पुजारा: ‘नई दीवार’ की सादगीभरी विदाई

राहुल द्रविड़ के बाद भारतीय टेस्ट बल्लेबाजी की जिम्मेदारी संभालने वाले चेतेश्वर पुजारा ने 103 टेस्ट में 7195 रन बनाये। ऑस्ट्रेलिया में भारत की ऐतिहासिक टेस्ट जीतों में उनकी भूमिका अमूल्य रही। इतने शानदार टेस्ट करियर के बावजूद उनका सफर बिना किसी औपचारिक विदाई के लगभग समाप्त हो गया।

विराट कोहली: रिकॉर्डों के बादशाह की टेस्ट क्रिकेट से खामोश विदाई

विराट कोहली आधुनिक युग के सबसे महान बल्लेबाजों में गिने जाते हैं। उनके नाम टेस्ट में 9230 रन वनडे में 14941 रन और टी20 अंतरराष्ट्रीय में 4188 रन दर्ज हैं। वनडे में 54 शतक और टेस्ट में 30 शतक उनके अद्भुत करियर का प्रमाण हैं। कोहली ने 2024 टी20 विश्व कप जीतने के बाद टी20 अंतरराष्ट्रीय से मैदान पर संन्यास लिया। हालांकि टेस्ट क्रिकेट से उनका संन्यास अचानक आया और उन्हें आखिरी टेस्ट अपने घरेलू दर्शकों के सामने खेलने का अवसर नहीं मिला। वह अभी भी वनडे क्रिकेट में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।

रोहित शर्मा: टेस्ट क्रिकेट के दिग्गज की विदाई भी रही अधूरी

वनडे इतिहास का सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर (264) बनाने वाले रोहित शर्मा के नाम वनडे में 11895 रन, 34 शतक और टी20 अंतरराष्ट्रीय में 4231 रन दर्ज हैं। रोहित शर्मा ने टी20 विश्व कप 2024 जीतने के बाद मैदान पर टी20 अंतरराष्ट्रीय को अलविदा कहा। हालांकि टेस्ट क्रिकेट से उनका संन्यास अचानक हुआ। इस प्रारूप में उन्हें अपने प्रशंसकों के सामने अंतिम मैच खेलने का अवसर नहीं मिला। वह अब भी वनडे क्रिकेट में सक्रिय हैं।

अजिंक्य रहाणे: विदेशी धरती के संकटमोचक की विदाई भी रही अधूरी

ऑस्ट्रेलिया में ऐतिहासिक टेस्ट सीरीज जीत दिलाने वाले कप्तान अजिंक्य रहाणे ने टेस्ट क्रिकेट में 5077 रन बनाए। अजिंक्य रहाणे की विदेश में कई पारियां भारतीय क्रिकेट इतिहास का हिस्सा हैं। हालांकि, उनके करियर का अंत भी सम्मानजनक विदाई मैच के बिना हुआ।

दिग्गजों की अधूरी विदाई ने पूरी व्यवस्था पर खड़े किए सवाल

इन खिलाड़ियों के आंकड़े बताते हैं कि उन्होंने भारतीय क्रिकेट को कितना कुछ दिया। किसी ने 500 से ज्यादा विकेट लिए, किसी ने 10 हजार से अधिक रन बनाए, किसी ने विश्व कप जिताने में अहम भूमिका निभाई तो किसी ने विदेशी धरती पर ऐतिहासिक जीत की नींव रखी। इसके बावजूद इनमें से कई दिग्गजों को अपने प्रशंसकों के सामने आखिरी बार भारतीय जर्सी पहनकर मैदान पर उतरने का मौका नहीं मिला।

बेशक, हर खिलाड़ी को फेयरवेल मैच देना व्यावहारिक नहीं हो सकता। टीम चयन हमेशा प्रदर्शन और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर होता है। लेकिन जिन खिलाड़ियों ने भारतीय क्रिकेट को नई पहचान दी, उनके योगदान को सम्मानपूर्वक याद करने और उन्हें विदाई देने की परंपरा जरूर विकसित की जा सकती है। क्रिकेट में समय के साथ रिकॉर्ड टूटते रहते हैं, लेकिन खिलाड़ियों के प्रति सम्मान हमेशा याद रखा जाता है। शायद यही वजह है कि जब किसी महान खिलाड़ी का करियर अचानक समाप्त होता है, तो प्रशंसकों के मन में एक सवाल जरूर रह जाता है

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