नई दिल्ली: रविचंद्रन अश्विन ने इंग्लैंड के खिलाफ चौथे टेस्ट मैच में कुलदीप यादव की जगह शार्दुल ठाकुर को शामिल करने के फैसले की आलोचना की है। अश्विन ने स्पष्ट तौर पर कहा कि टीम मैनेजमेंट मजबूत बल्लेबाजी क्रम के मोह में पड़ गई है, जिससे मैनचेस्टर टेस्ट के लिए भारत अपनी सर्वश्रेष्ठ प्लेइंग इलेवन नहीं चुन सका। स्पिन के इस दिग्गज का मानना है कि जीत के लिए गेंदबाजी में विविधता और धार होना जरूरी है, जिसे नजरअंदाज किया गया है। पहली पारी में 358 रन बनाने के बाद भारत के लिए गेंदबाजी में दिन बेहद खराब रहा। इंग्लैंड के सलामी बल्लेबाज बेन डकेट और जैक क्रॉली की ताबड़तोड़ पारियों की बदौलत मेजबान टीम ने दूसरे दिन स्टंप्स तक 4.89 के शानदार रनरेट से 225/2 का स्कोर कर लिया था। इंग्लैंड अब सिर्फ 133 रन पीछे है, जबकि 8 विकेट उसके हाथ में हैं।
चोटिल नितीश कुमार रेड्डी की जगह शार्दुल 7वें नंबर पर आए और उन्होंने 41 रन बनाए। मुंबई के इस ऑलराउंडर को हालांकि, कप्तान शुभमन गिल ने 46 में से सिर्फ 5 ओवर फेंकने का ही मौका दिया और उन्होंने 35 रन दिए। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अश्विन ने अपने यूट्यूब चैनल पर कहा, ‘देखिए, आठवें नंबर के बल्लेबाज से आपको 20-30 अतिरिक्त रन मिल सकते हैं, लेकिन अगर 8वें नंबर का वही खिलाड़ी 2-3 विकेट ले लेता है तो टेस्ट मैच का रुख बदल सकता है। टीम प्रबंधन ने लॉर्ड्स और बर्मिंघम में नितीश कुमार रेड्डी को खिलाने का फैसला किया। मैं मानता हूं कि यह एक ठीक फैसला था, क्योंकि वह शीर्ष 6 बल्लेबाजों में शामिल हैं। यह सही है कि वह अभी बेन स्टोक्स जैसे नहीं हैं, लेकिन गेंदबाजी में कौशल है।’
‘कुलदीप को बाहर बैठाना चौंकाने वाला फैसला’ – अश्विन ने जताई नाराजगी
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अश्विन ने कहा कि उन्हें यह समझ नहीं आ रहा है कि भारत के प्रमुख कलाई के स्पिनर कुलदीप यादव को पूरे दौरे में अब तक बेंच पर क्यों बैठाया गया। उन्होंने यह भी जताया कि ओल्ड ट्रैफर्ड टेस्ट में भी कुलदीप टीम में शामिल होने की दौड़ में नहीं थे। अश्विन के मुताबिक, ऐसे मैच विनर को नजरअंदाज करना टीम के संतुलन पर सवाल खड़े करता है। अश्विन ने कहा, ‘एक बार जब नितीश कुमार रेड्डी छठे नंबर पर बल्लेबाजी के लिए नहीं उतरे तो कुलदीप यादव को खिलाना कोई मुश्किल काम नहीं था।’अश्विन ने कहा, ‘पंद्रह दिन का खेल पहले ही हो चुका है। आपका तेज गेंदबाजी आक्रमण पहले थका हुआ है। सिराज भी थके हुए हैं। बुमराह का हालांकि वर्कलोड मैनेज कर लिया गया है, फिर भी यह अब भी आसान काम नहीं है। भारत को कुलदीप यादव की कमी खल रही है और इंग्लैंड टेस्ट में आगे है। शुभमन गिल बुमराह को 6 या 7 ओवर का स्पैल नहीं दे पा रहे हैं। आप उन्हें मैदान पर ज्यादा दौड़ा नहीं सकते। मुझे लगता है कि स्पिनर्स को बेहतर तरीके से रोटेट किया जा सकता था।’
परिवर्तन की हवा तेज, अब प्रदर्शन ही बनेगा चयन का पैमाना
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अश्विन ने कहा, “अगर कोई मुझसे पहले ही कहता कि कुलदीप यादव पहले चार टेस्ट मैच नहीं खेलेंगे, तो मुझे बेहद हैरानी होती।” उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि यह हमारी बल्लेबाजी के प्रति जरूरत से ज्यादा दीवानगी का नतीजा है। टीम 20-30 अतिरिक्त रन बनाने की चाहत में गेंदबाजी संतुलन से समझौता कर रही है। अगर आपका नंबर 7 बल्लेबाज 30 रन बनाता है और आपका नंबर 8 बल्लेबाज 30 रन बनाता है, तो आपके पास अतिरिक्त 60 रन होते हैं। पहले ये 60 रन बहुत उपयोगी हुआ करते थे, क्योंकि गेंदबाजों को पिच से मदद मिलती थी।’
कुलदीप को नहीं खिलाना हैरान करने वाला फैसला
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अश्विन ने शार्दुल ठाकुर की उपयोगिता को लेकर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि अगर टीम मैनेजमेंट शार्दुल से सिर्फ कुछ ओवर करवाने और 20-30 रन बनाने की उम्मीद रखती है, तो यह चयन रणनीति समझ से परे है। अश्विन ने साफ कहा, “मुझे शार्दुल बहुत पसंद हैं, लेकिन अगर उनका यही इस्तेमाल होना है, तो फिर कुलदीप यादव पर विचार क्यों नहीं किया गया? ये तो मेरे होश उड़ा देने वाला है।” अश्विन ने कहा, ‘मुझे पता है कि तीन स्पिनर होने की वजह से ये थोड़ा अजीब लग रहा है, लेकिन ऐसा नहीं है। जडेजा अब आपके लिए एक स्पेशलिस्ट बल्लेबाज हैं। वाशिंगटन सुंदर भी अच्छी बल्लेबाजी कर रहे हैं। जब आपके गेंदबाज इतनी अच्छी बल्लेबाजी कर सकते हैं, तो आप कोई आक्रामक गेंदबाज क्यों नहीं ला रहे? आज जस्सी (जसप्रीत बुमराह) गेंदबाजी कर रहे थे। उसके बाद ऐसा लग रहा था कि भारत के पास विकेट लेने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है।’
एक विकेट भी नहीं मिला, अश्विन बोले – कुलदीप होता तो कुछ तो बदलता
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अश्विन ने निष्कर्ष निकाला कि उनका इशारा कुलदीप की विकेट लेने की क्षमता की ओर है, न कि कोई गारंटी देने की ओर। उन्होंने कहा, “मैं यह नहीं कह रहा कि अगर कुलदीप खेल रहे होते तो वो पांच विकेट ले लेते। लेकिन वह ऐसा गेंदबाज है जो बल्लेबाज के दिमाग से खेलता है और हालात को अपने पक्ष में मोड़ सकता है।” इंग्लैंड के बहुत से बल्लेबाजों के लिए उन्हें टैकल करना आसान नहीं होता और यह एक शानदार मौका था। अगर वह आज खेल रहे होते तो कम से कम एक विकेट तो ले ही लेते।’

