नई दिल्ली : टोक्यो और पेरिस ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने वाली भारतीय पुरुष हॉकी टीम के अहम सदस्य रहे फॉरवर्ड गुरजंत सिंह ने वर्ल्ड कप से पहले शुक्रवार (27 मार्च) को अंतरराष्ट्रीय हॉकी से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया। 2017 में भारत के लिए डेब्यू करने वाले 31 वर्षीय गुरजंत ने अपने करियर में 130 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले और 33 गोल दागे। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने आखिरी बार जून 2025 में भारत के लिए मैदान पर कदम रखा था। गुरजंत ने दिल्ली में आयोजित हॉकी इंडिया के वार्षिक पुरस्कार समारोह के दौरान अपने संन्यास की घोषणा की, जिससे भारतीय हॉकी को बड़ा झटका लगा है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार गुरजंत ने कहा ,’मैंने यहां मौजूद दिग्गजों को देखकर हॉकी खेलना शुरू किया था और उनके साथ भारत के लिये खेलने का मेरा सपना पूरा हुआ जिसे मैं कभी भूल नहीं सकूंगा। मेरा यह सफर बहुत अच्छा रहा और टोक्यो ओलंपिक में 41 साल बाद ऐतिहासिक पदक जीतने वाली टीम का हिस्सा रहा। इसके बाद पेरिस ओलंपिक 2024 में भी उसे प्रदर्शन को दोहराया। मैं बहुत खुशी और गर्व के साथ विदा ले रहा हूं।’
गुरजंत सिंह के नाम दर्ज हैं कई बड़े भारतीय रिकॉर्ड
गुरजंत के नाम सबसे तेज अंतरराष्ट्रीय गोल का भारतीय रिकॉर्ड भी है। उन्होंने एफआईएच प्रो लीग 2020 में नीदरलैंड के खिलाफ 13 सेकंड में गोल दागा था। उन्होंने यह भी कहा कि वह घरेलू हॉकी और लीग खेलते रहेंगे, लेकिन कोचिंग के बारे में अभी सोचा नहीं है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार गुरजंत ने कहा ,’मैंने पिछले जून के बाद से अंतरराष्ट्रीय हॉकी नहीं खेली है। इस साल हॉकी इंडिया लीग खेली और आगे भी खेलूंगा, लेकिन कोचिंग को लेकर अभी सोचा नहीं है।’
अर्जुन अवॉर्ड विजेता हैं गुरजंत सिंह
गुरजंत सिंह के साथ खेल चुके दिग्गज गोलकीपर PR Sreejesh ने संन्यास के बाद जूनियर टीम के कोच की भूमिका संभाली, जिसकी अगुवाई में टीम ने पिछले साल चेन्नई में एफआईएच जूनियर विश्व कप में कांस्य पदक जीता। अमृतसर के खैलारा गांव में जन्मे गुरजंत 2016 में लखनऊ में खेले गए जूनियर विश्व कप विजेता भारतीय टीम का भी हिस्सा रहे थे और उन्होंने फाइनल में अहम गोल किया था। इसके अलावा वह Asian Games 2023 और Men’s Hockey Asia Cup 2017 में स्वर्ण पदक जीतने वाली टीम के सदस्य रहे। उनके शानदार योगदान के लिए उन्हें 2021 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया, जबकि Hockey India ने भी पुरस्कार समारोह के दौरान उन्हें सम्मानित करते हुए पांच लाख रुपये की राशि प्रदान की।


