केएल राहुल ने की पंत की प्रशंसा, कहा वह भी इस बाएं हाथ के बल्लेबाज की तरह शॉट लगाने का सपना देखते हैं

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लंदन: भारत के अनुभवी सलामी बल्लेबाज केएल राहुल ने लॉर्ड्स में इंग्लैंड के खिलाफ तीसरे टेस्ट के तीसरे दिन अपने रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन के बाद उप-कप्तान ऋषभ पंत की प्रशंसा की और कहा कि वह भी इस बाएं हाथ के बल्लेबाज की तरह शॉट लगाने का सपना देखते हैं। राहुल ने बताया कि शीर्ष क्रम में बल्लेबाजी करना उन्हें बहुत पसंद है। साथ ही उन्होंने पंत के रन आउट मामले पर भी अपनी राय रखी। राहुल ने लॉर्ड्स में सीरीज का अपना दूसरा शतक लगाने के बाद बताया कि फॉर्मूला-1 में काम कर रहे कोचों के मार्गदर्शन में उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया समय को बेहतर बनाने के लिए काफी मेहनत की है। राहुल अब तक सीरीज में सबसे भरोसेमंद बल्लेबाज नजर आए हैं। गेंद को अच्छी तरह छोड़ने और देर तक मैदान पर टिके रहने की उनकी क्षमता ने उन्हें इंग्लिश परिस्थितियों में बेहतर प्रदर्शन करने में मदद की है।

राहुल ने पंत के साथ चौथे विकेट के लिए 141 रन की साझेदारी की। पंत जहां आक्रामक नजर आए, वहीं राहुल ने संभल कर बल्लेबाजी की। केएल ने खुलासा किया कि भले ही खेल के प्रति पंत के साथ उनके दृष्टिकोण में कुछ भी समान नहीं है, लेकिन वह पंत के साथ बल्लेबाजी करने का लुत्फ उठाते हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि सबसे आम बात क्रिकेट के लिए हमारा (राहुल और पंत) प्यार है, बल्लेबाजी के लिए प्यार है और कठिन परिस्थितियों में प्रदर्शन करने के लिए प्यार है। पिछले कुछ वर्षों में हमने कई महत्वपूर्ण साझेदारियां की हैं। मुझे उनके साथ बल्लेबाजी करने में मजा आता है। मैं उनके साथ बल्लेबाजी करने का पूरा लुत्फ उठाता हूं। जब वह मेरे साथ बल्लेबाजी कर रहा होते हैं, तो मैं देखता हूं कि वह कैसे बल्लेबाजी करते हैं और मैं चाहता हूं और मुझे उम्मीद है कि मैं भी ऐसा कर सकता हूं।’

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा, ‘जब कोई मैच नहीं होता तो मैं शांत होकर बैठता हूं और इस तरह के शॉट खेलने और उस तरह की मानसिकता और रवैये के साथ खेलने का सपना देखता हूं। लेकिन हां, यह हमेशा सिर्फ एक सपना रहा है। मैं और पंत क्रिकेट और बल्लेबाजी के साथ बल्लेबाजी के तकनीकी पहलुओं पर भी काफी बातें करते हैं।’ राहुल ने पुरानी यादों को ताजा किया और बताया कि 2023 में एनसीए में रिहैब के दौरान उन्होंने महसूस किया कि पंत खेल के एक गहरे विचारक हैं। उनका दृष्टिकोण एक सुविचारित प्रक्रिया पर बहुत अधिक निर्भर करता है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा, ‘हम दोनों ही चोटिल थे और एनसीए में थे। हम हर दिन एक-दूसरे को देखते थे और शायद यह पहली बार था जब मुझे एहसास हुआ कि वह किस तरह बल्लेबाजी करते हैं। इसके पीछे बहुत सोच विचार है। वह खेल के गहरे विचारक हैं। हालांकि यह उस तरह से प्रतीत नहीं हो सकता है या जिस तरह से वह खेलते हैं, उससे पता नहीं चल सकता है। यह कुछ ऐसा है जो उनके खेल के अनुकूल है। जाहिर है, मेरे लिए यह समझना बहुत अच्छा रहा है कि वह कैसे सोचते हैं। शायद यही वजह है कि हम दोनों की अच्छी बनती है। हम मैदान के बाहर भी अच्छे दोस्त हैं।’

लंच से ठीक पहले अंतिम गेंद पर 141 रन की साझेदारी का अंत हुआ। एक तेज सिंगल चुराने के प्रयास में, पंत रन आउट हो गए। उन्होंने 112 गेंद में आठ चौके और दो छक्के की मदद से 74 रन की पारी खेली। राहुल ने लॉर्ड्स में अपना दूसरा शतक बनाया। हालांकि, शतक के तुरंत बाद ही वह आउट हो गए। राहुल को शोएब बशीर ने हैरी ब्रूक के हाथों कैच कराया। उन्होंने 177 गेंद में 13 चौके की मदद से 100 रन की पारी खेली। यह टेस्ट में उनका 10वां शतक रहा।

पंत के रन आउट होने वाले प्रकरण पर भी राहुल ने बयान दिया। पंत उस समय 98 रन पर खेल रहे राहुल को स्ट्राइक देने की कोशिश में रन आउट हो गए। इस पर राहुल ने कहा, ‘जाहिर है कि यह आदर्श नहीं था। कुछ ओवर पहले हुई बातचीत में मैंने उनसे कहा कि अगर हो सके तो लंच से पहले मैं अपना शतक पूरा करने की कोशिश करूंगा। लंच से पहले बशीर ने आखिरी ओवर फेंका। मुझे लगा कि मेरे लिए शतक पूरा करने का अच्छा मौका है, लेकिन बदकिस्मती से मैंने गेंद सीधे फील्डर के हाथों में मार दी। यह ऐसी गेंद थी जिस पर मैं चौका लगा सकता था, लेकिन मैंने गेंद सीधे फील्डर के हाथों में मार दी। फिर मुझे लगता है कि वह बस स्ट्राइक रोटेट करना चाहते थे और मुझे वापस स्ट्राइक पर लाने की कोशिश कर रहे थे। उस समय रन आउट नहीं होना चाहिए था। मुझे लगता है कि इससे मैच का रुख बदल गया। यह हम दोनों के लिए निराशाजनक था।’

राहुल ने F-1 रेस के विशेषज्ञों के साथ भी अपनी बातचीत को लेकर खुलासा किया और बताया कि इसने उनकी काफी मदद की। इस सलामी बल्लेबाज ने कहा कि पिछले एक-दो साल में उन्होंने कुछ मानसिक अभ्यासों पर काम किया है। राहुल ने कहा कि फॉर्मूला-1 के एक विशेषज्ञ के साथ थोड़ा समय बिताने से उन्हें प्रतिक्रिया समय को बेहतर करने में मदद मिली। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा, ‘मैंने फॉर्मूला वन में यह काफी बार देखा है। मैंने ऑस्ट्रिया के साल्जबर्ग में कुछ लोगों के साथ काम किया। मुझे वहां जाकर कुछ कोचों के साथ भी काम करने का मौका मिला। फॉर्मूला वन के शीर्ष खिलाड़ियों और अन्य कुछ शानदार खेलों के लोगों के साथ काम करने से मानसिक पहलू को ठीक करने में मुझे बहुत मदद मिली। मैंने मानसिक पहलू पर काम किया है और मुझे लगता है कि पिछले एक-दो साल में मेरे अंदर यही एकमात्र चीज अलग रही है।’

शनिवार का शतक लीड्स में पिछले शतक जितना सहज नहीं था। लॉर्ड्स की पिच धीमी हो चुकी है, लेकिन राहुल ने पिच के मुताबिक बल्लेबाजी करने का तरीका ढूंढ लिया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा, ‘मुझे बचपन से ही लंबे समय तक बल्लेबाजी करने में मजा आता रहा है। जब मैं जूनियर क्रिकेट खेलता था, तब भी मुझे लंबे समय तक बल्लेबाजी करने में मजा आता था और मैं लंबे समय तक ध्यान केंद्रित कर पाता था। मुझे लगता है कि पिछले कुछ वर्षों में इन सब बातों ने मेरी मदद की है। मैंने अपने पूरे करियर में यही कोशिश की है कि मैं लगातार अच्छा प्रदर्शन करूं। इसलिए मुझे खुशी है कि पिछले कुछ वर्षों में मेरा प्रदर्शन अच्छा रहा है।’

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