नई दिल्ली : भारतीय महिला क्रिकेट टीम की स्टार ओपनर प्रतिका रावल महिला विश्व कप के अंतिम लीग मैच में बांग्लादेश के खिलाफ चोटिल होने के बाद टूर्नामेंट से बाहर हो गई थीं। उनके स्थान पर शेफाली वर्मा को टीम में शामिल किया गया, जिन्होंने फाइनल में प्लेयर ऑफ द मैच का अवॉर्ड जीतते हुए टीम को विश्व विजेता बनाने में अहम भूमिका निभाई। इस जीत के बाद प्रतिका व्हीलचेयर पर नजर आईं और टीम के साथ जश्न में शामिल हुईं। हालांकि, आईसीसी के नियमों के अनुसार उन्हें वर्ल्ड कप विजेता मेडल नहीं दिया गया, क्योंकि वह स्क्वाड से बाहर हो चुकी थीं।
इसके बाद जब भारतीय महिला टीम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिली, तो प्रतिका रावल के गले में मेडल नजर आया। वहीं टीम के फोटोशूट में अमनजोत बिना मेडल के दिखाई दी थीं, और यह तस्वीर सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुई। बाद में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात के समय प्रतिका और अमनजोत दोनों ने मेडल पहन रखा था, जिससे कंफ्यूजन और बढ़ गया। अब इस मामले पर प्रतिका ने खुद सफाई दी है। WION से बातचीत में प्रतिका रावल ने बताया कि जय शाह के हस्तक्षेप के बाद उन्हें मेडल मिल गया।
प्रतिका रावल को वर्ल्ड कप मेडल मिलने की पूरी कहानी
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार प्रतिका रावल ने बताया कि उन्हें आखिरकार अपना खुद का मेडल मिल गया है। उन्होंने कहा, “अब मेरे पास मेरा मेडल है। मुझे टीम मैनेजर का कॉल आया और उन्होंने बताया कि जय शाह सर ने मेरे लिए मेडल का इंतजाम किया है। जब मैंने मेडल का बॉक्स खोला, तो मैं काफी भावुक हो गई और कई सारी भावनाएँ मेरे अंदर उमड़ रही थीं, जिन्हें मैं शब्दों में बयां नहीं कर सकती।”
प्रतिका रावल ने विश्व कप 2025 में कैसे दिखाया दम
प्रतिका रावल के महिला विश्व कप 2025 में प्रदर्शन की बात करें तो उन्होंने भारतीय टीम के लिए सातों लीग मैच खेले। हालांकि, चोट के कारण वह आखिरी मैच में बल्लेबाजी नहीं कर पाईं। उन्होंने छह पारियों में एक शतक और एक अर्धशतक लगाया। न्यूजीलैंड के खिलाफ 122 रन उनका सर्वोच्च स्कोर रहा, और इस शानदार प्रदर्शन की मदद से भारत ने वह मैच जीतकर फाइनल में जगह बनाई।
प्रतिका रावल ने पूरे टूर्नामेंट में छह पारियों में 50 से अधिक की औसत से कुल 308 रन बनाए। इसके अलावा उनके नाम इस टूर्नामेंट में दो विकेट भी दर्ज हुए। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ महत्वपूर्ण लीग मैच में 75 रनों की पारी खेली थी। इंग्लैंड के खिलाफ 6 रन की पारियों को छोड़कर हर मैच में उन्होंने टीम को बेहतरीन शुरुआत दी। लेकिन दुर्भाग्यवश, वह सेमीफाइनल और फाइनल में खेलने में सक्षम नहीं थीं।


