नई दिल्ली : ‘‘गेंद से प्यार करना पड़ता है।’’ प्रवीण कुमार का यह सरल मंत्र उनकी सफलता की असली पहचान रहा है। यह केवल एक सलाह नहीं, बल्कि गेंद को संभालने, उसे समझने और हर डिलीवरी में महसूस करने की कला है। लगभग दो दशकों के करियर में भुवनेश्वर कुमार ने इसी ‘इश्क’ को अपने खेल की नींव बनाया। नतीजा यह है कि तेज, ताकतवर और ज्यादा स्पीड वाले गेंदबाजों के बीच भी वह IPL के सबसे भरोसेमंद और खतरनाक स्विंग गेंदबाज बनकर उभरे हैं। पावरप्ले में उनका दबदबा, सटीक लाइन-लेंथ और ‘हाथ की कला’ उन्हें बाकी से अलग बनाती है और यही वजह है कि आज वह IPL के ‘स्विंग किंग’ कहलाते हैं।
भुवनेश्वर गेंद को अनमोल धरोहर मानते हैं
स्विंग के जादूगर प्रवीण कुमार मजाकिया अंदाज में कहते हैं, ‘‘गेंद से प्यार करना पड़ता है।’’ प्रवीण कुमार अपने ‘छोटे भाई और परिवार’ भुवनेश्वर कुमार का उदाहरण देते हैं। प्रवीण कहते हैं, ‘‘वह एक समर्पित प्रेमी की तरह है। वह गेंद का बहुत अच्छे से ख्याल रखता है। हमेशा एक तरफ को चमकाकर रखता है। उस पर लगी धूल हटाता है। उसे किसी खजाने की तरह सहेजता है। गेंद भी उससे उतना ही प्यार करती है।’’जैसाकि सोमवार 27 अप्रैल की रात दिल्ली में देखने को मिला। गेंद ने ठीक वैसा ही बर्ताव किया जैसा वह चाहते थे। गेंद में मूवमेंट (हलचल) भले ही कम थी, लेकिन काफी थी। बल्लेबाज जो आमतौर पर इस फॉर्मेट को अपनी धुन पर नचाते हैं, इस बार गेंदबाज़ की धुन पर नाचते नजर आए।
आईपीएल इतिहास के सबसे कामयाब तेज गेंदबाज हैं भुवी
एक ऐसा गेंदबाज जिसे कभी टी20 फॉर्मेट के लिए बहुत ज्यादा ‘पारंपरिक’ माना जाता था, अब इस फॉर्मेट के सबसे सम्मानित गेंदबाजों में से एक हैं। वह IPL इतिहास में सबसे सफल तेज गेंदबाज (212 विकेट) हैं। वर्तमान सीमर्स में जसप्रीत बुमराह ही उनसे ज्यादा किफायती (इकॉनमी रेट 7.68) हैं। जसप्रीत बुमराह का इकॉनमी रेट 7.28 है। भुवनेश्वर IPL के पावरप्ले में सबसे ज्यादा विकेट (88 विकेट) लेने वाले गेंदबाज हैं। इस दौरान उनका इकॉनमी रेट सिर्फ 6.58 है। भुवनेश्वर कुमार से ज्यादा तेज, लंबे और मजबूत गेंदबाज तो कब के पीछे छूट चुके हैं।
यह गेंद और गेंदबाज के बीच का एक ऐसा प्रेम-प्रसंग है, जिसकी शुरुआत लगभग 20 साल पहले मेरठ में हुई थी। यह आज भी कायम है और मौसमों की मार, नाकामियों और चोटों के कहर को झेलते हुए बड़े-बड़े मंचों पर नजर आता है। प्रवीण कुमार बताते हैं, ‘‘मैंने जब उसे पहले दिन देखा था तभी से वह गेंदबाजी के प्रति पूरी तरह समर्पित था। वह ऐसा इंसान था जो सिर्फ इसलिए गेंदबाजी करता था, क्योंकि उसे बॉलिंग करना पसंद था।’’
खुद से सीखना सबसे बड़ा लाभ: भुवी
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इंटरव्यू में भुवनेश्वर कुमार ने बताया कि खुद से सीखने के कई लाभ होते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘जब मैं छोटा था, तब मेरी गेंद में स्वाभाविक रूप से इन-स्विंग होती थी। मैं नेट्स में लगातार गेंदबाजी करता रहा और एक दिन गेंद दूसरी दिशा में स्विंग होने लगी।’’ मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने बताया, ‘‘इस पर मैंने खुद से पूछा कि मैं क्या अलग कर रहा हूं; मैंने रन-अप, ग्रिप और गेंद छोड़ने के तरीके में होने वाले छोटे-छोटे बदलावों पर ध्यान देना शुरू किया। फिर मुझे समझ आया कि मैं क्या अलग कर रहा था और इस तरह आप खुद ही अपने विश्लेषक और आलोचक बन जाते हैं।’’
इस तरीके में कुछ कमियां हैं। विशेषज्ञ की सलाह के बिना, अनजाने में ही ऐसी गलतियां हो सकती हैं जिन्हें सुधारा न जा सके, लेकिन प्रवीण कुमार इस बात पर जोर देते हैं कि खुद से सीखने का फायदा यह है कि आपकी आदत बन जाती है। जैसे अगर वह गेंदबाजी वाला हाथ कान से थोड़ा दूर ले जाते तो गेंद बाहर की तरफ स्विंग होती और अगर हाथ कान से सटकर निकलता तो गेंद दाएं हाथ के बल्लेबाज की तरफ अंदर की ओर आती।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार प्रवीण कुमार ने बताया, ‘‘सिर्फ बातें करके नहीं, बल्कि एक-दूसरे को ध्यान से देखकर वसीम (अकरम) भाई, जैक (जहीर खान) या ऐश (नेहरा) भाई जैसे महान गेंदबाजों को देखकर और उन छोटी-छोटी बातों पर चर्चा करके, जिनसे आखिर में जाकर बहुत बड़ा फर्क पड़ता है।’’ मीडिया रिपोर्ट के अनुसार प्रवीण कुमार ने बताया, ‘‘बेशक हमारे पास कोच और सीनियर खिलाड़ी थे, लेकिन हमने अपनी ज्यादातर सीख खुद ही हासिल की।’’ प्रवीण कुमार को वह पल आज भी याद है, जब उन्होंने पहली बार जहीर की ‘नकल बॉल’ देखी थी।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार प्रवीण कुमार ने बताया, ‘‘हम दोनों ही इससे बहुत प्रभावित थे। जाहिर है, हमने अगले ही दिन उस गेंद को आजमाया, लेकिन बुरी तरह नाकाम रहे। हालांकि, समय के साथ हमने इसे सीख लिया।’’ प्रवीण ने आंख मूंदकर जहीर खान की नकल नहीं की, बल्कि इसे अपने खेल के हिसाब से ढाल लिया। जहीर खान गेंद को स्विंग कराने के लिए अपनी तर्जनी अंगुली को पीछे मोड़कर झटका देते थे। वहीं, भुवनेश्वर कुमार सीधी सीम के साथ गेंद डालते हैं और सीम को अंगुलियों के पोरों से पकड़ने के लिए तर्जनी और मध्यमा अंगुली के जोड़ मोड़ते हैं। उनका अंगूठा गेंद को संतुलन देने वाले सहारे की भूमिका निभाता है।


