नई दिल्ली : अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब खेल जगत पर भी दिखने लगा है। डोनाल्ड ट्रंप के एक करीबी दूत ने ऐसा प्रस्ताव दिया है, जिससे नया विवाद खड़ा हो गया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप के सहयोगी पाओलो जाम्पोली ने FIFA से मांग की है कि आगामी फुटबॉल वर्ल्ड कप में ईरान की जगह इटली को शामिल किया जाए। इस प्रस्ताव के सामने आने के बाद खेल और राजनीति के मेल को लेकर बहस तेज हो गई है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पाओलो जाम्पोली का कहना है कि इटली जैसी बड़ी टीम का टूर्नामेंट में होना बेहद जरूरी है। उनका तर्क है कि इटली चार बार फुटबॉल वर्ल्ड कप जीत चुका है और उसकी मौजूदगी से प्रतियोगिता की चमक और प्रतिस्पर्धा दोनों बढ़ेंगी। हालांकि, इस मांग के पीछे सिर्फ खेल नहीं, बल्कि राजनीति की झलक भी देखी जा रही है। जॉर्जिया मेलोनी और डोनाल्ड ट्रंप के बीच हालिया तनातनी के बाद यह कयास लगाए जा रहे हैं कि यह प्रस्ताव अमेरिका और इटली के रिश्तों को बेहतर करने की एक कोशिश का हिस्सा भी हो सकता है।
ईरान ने लगातार चौथी बार वर्ल्ड कप के लिए किया क्वालिफाई
दूसरी तरफ ईरान पहले ही लगातार चौथी बार वर्ल्ड कप के लिए क्वालीफाई कर चुका है। FIFA के नियमों के अनुसार किसी भी टीम को टूर्नामेंट से हटाना आसान नहीं होता और इसका अंतिम फैसला पूरी तरह संस्था के हाथ में होता है। फिलहाल इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, जिससे स्थिति अभी भी अनिश्चित बनी हुई है।
ईरान ने भी FIFA से रखी अपनी मांग
हाल ही में ईरान ने यह इच्छा जताई थी कि वह अपने कुछ मुकाबले अमेरिका की बजाय मेक्सिको में खेलना चाहता है, क्योंकि मौजूदा हालात में अमेरिका में खेलना उसके लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। हालांकि, FIFA के अधिकारियों ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि सभी मैच तय कार्यक्रम के अनुसार ही आयोजित किए जाएंगे और इसमें किसी तरह का बदलाव नहीं किया जाएगा।
अगर ईरान हटता है तो किसे मिलेगा मौका, FIFA का क्या होगा फैसला?
अगर किसी कारणवश ईरान टूर्नामेंट से बाहर होता है, तो उसकी जगह किस टीम को मौका मिलेगा, इसका अंतिम फैसला FIFA ही करेगा। मौजूदा परिस्थितियों में एशियाई टीमों को प्राथमिकता मिलने की संभावना ज्यादा मानी जा रही है। ऐसे में संयुक्त अरब अमीरात जैसी टीम को मौका मिल सकता है, क्योंकि वह क्वालीफाइंग चरण में काफी करीब पहुंची थी और उसका प्रदर्शन भी मजबूत रहा था।


