नई दिल्ली : प्रो कुश्ती लीग (पीडब्ल्यूएल) का छठा सीजन 9 से 26 जनवरी 2027 तक केडी सिंह जाधव कुश्ती एरेना में आयोजित किया जाएगा। इस लीग में 86 पहलवान हिस्सा लेंगे और भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) के इस टूर्नामेंट में 6 फ्रेंचाइजी टीमें प्रतिस्पर्धा करेंगी। प्रतियोगिता में पुरुषों के 5 और महिलाओं के 4 ओलंपिक भारवर्गों में मुकाबले होंगे। शुक्रवार (10 सितंबर) को लीग के लॉन्च कार्यक्रम के दौरान भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह ने भारतीय पहलवानों की सोच में आए बदलाव का जिक्र किया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा कि पहले जहां जहाज में बैठना भी बड़ी उपलब्धि माना जाता था, वहीं अब पहलवानों का लक्ष्य ओलंपिक पदक जीतना है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार बृजभूषण ने कहा कि पहले विदेशी नामों का हौआ हुआ करता था। भारतीय पहलवान जहाज में बैठने के लिए जाते थे। अब स्थिति बदली है और ओलंपिक पदक जीतना लक्ष्य होता है। एशियाई खेलों में पहलवानों के प्रदर्शन पर कहा कि 6 नहीं 8 पदकों की उम्मीद थी। इसके अलावा उन्होंने गोल्ड जीतने वाले पहलवानों को 10 लाख, सिल्वर जीतने वालों को 7 लाख और ब्रॉन्ज जीतने वालों को 5 लाख रुपये देने का आग्रह डब्ल्यूएफआई से किया।
पीडब्ल्यूएल लॉन्च पर बृजभूषण का बड़ा बयान
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार बृजभूषण ने कहा, ‘लीग 2015 में शुरू हुई थी। कुछ कारणों से आगे चल करके बंद हो गई, कोरोना काल में और फिर कुछ दिन तक बंद रही। पिछले साल इसकी शुरुआत फिर हुई। ये हमारे जो टीम ओनर हैं, ये बधाई के पात्र हैं। भले हमने प्रयास किया हो, लेकिन आप लोगों का बहुत सहयोग है।’
पीडब्ल्यूएल से मजबूत होगी भारतीय कुश्ती
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार बृजभूषण ने कहा, ‘इस लीग से हमारे भारतीय कुश्ती को बहुत फायदा हुआ। विस्तार में जाने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन पहले एक समय था, जब हम विदेशी पहलवानों का नाम छोड़ दो, उनके देश का नाम आने पर ही हमारे ऊपर मनोवैज्ञानिक दबाव होता था। कुछ खिलाड़ी तो इसलिए जाते थे कि जहाज पर बैठ लें और नाम के आगे इंटरनेशनल लिखा जाए, लेकिन सबसे पहले महाराष्ट्र के के. डी. जाधव लाए थे, उसके बाद सूखा पड़ गया।’
कुश्ती से ओलंपिक में मेडल मिलना ही चाहिए: बृजभूषण
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार बृजभूषण ने कहा, ‘फिर संयोग कहिए 2008 से ये सूखा टूटा। सूखा तोड़ने का काम किया सुशील कुमार ने, सूखा तोड़ने का काम किया योगेश्वर दत्त ने और ये सिलसिला फिर चल पड़ा। आज देश का जो मूड है, वो किसी से मेडल मिले या न मिले, कुश्ती से मिलना चाहिए। ऐसा एक फैशन बन चुका है कि कुश्ती से मेडल मिलना ही चाहिए।’
‘हिंदुस्तान के हर रेसलर का लक्ष्य ओलंपिक मेडल’
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार बृजभूषण ने कहा, ‘प्रसन्नता ये है कि हमारे जो रेसलर हैं इन्होंने 2008 से जो सिलसिला शुरू हुआ… नरसिंह यादव भी यहां पर बैठे हैं, ओलम्पियन हैं… बहुत अच्छे रेसलर रहे हैं। उस प्रकरण में जाने की आवश्यकता नहीं है, नहीं तो आज हमारे पास सिल्वर या गोल्ड नाम का एक मेडल और होता, लेकिन कोई बात नहीं है। तो हमारे जो रेसलर हैं, इन्होंने निराश नहीं किया। अब हिंदुस्तान का हर रेसलर ओलंपिक मेडल के लिए खेलता है। चाहे भले वो एशिया का मेडल न ला पाए, कॉमनवेल्थ का मेडल न ला पाए, नेशनल में मेडल न ला पाए, लेकिन हमारे देश के जो पहलवान हैं और पहलवानों के जो माता-पिता हैं, उनसे किसी से भी पूछिए आप कि आप क्या चाहते हैं, तो हर माता-पिता और हर रेसलर यही कहता है कि हमें ओलंपिक में मेडल लेकर के आना है। ये सोच बदली है।’
‘हमारा प्रदर्शन 8 मेडल के लायक था’, बृजभूषण का बयान
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार बृजभूषण ने कहा, ‘कहते हैं कि आज हम वही हैं जो हमने सोचा था। ये आप सब लोग भी वही हैं जो आपने सोचा था। आगे आप वही होंगे जो आज सोच रहे हैं। इसमें प्रकृति भी, ईश्वर भी हमारी मदद करता है। अगर आज हमारे इस देश के रेसलर, बेटे और बेटियां ये सोच रहे हैं कि हम ओलंपिक में मेडल लेकर के आएंगे, तो प्रकृति भी, ईश्वर भी उनकी मांग को पूरा करेगा और मेडल लेकर के आएंगे। ये बहुत अच्छा प्रदर्शन रहा, लेकिन मैं संतुष्ट नहीं हुआ। हम 6 मेडल के हकदार नहीं थे, हम कम से कम 8 मेडल के हकदार थे। ‘
‘फेडरेशन की गिनती में 8 मेडल थे’, बोले बृजभूषण
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार बृजभूषण ने कहा, ‘हमारी काउंटिंग में, फेडरेशन की काउंटिंग में 8 मेडल था। अब हो जाता है कभी-कभी चूक, कभी ऐसा समय आ जाता है, लेकिन आज मैं आप लोगों को धन्यवाद देता हूं। खिलाड़ियों से कहना चाहता हूं कि 2 साल का समय है। देश आपके ऊपर गर्व करता है। हम भी आपके ऊपर गर्व करते हैं। योगेश्वर दत्त, नरसिंह जैसे रेसलर यहां पर बैठे हैं, वो भी आपके ऊपर गर्व करते हैं। तो अब हमें ये 6 का सिलसिला और 3 का सिलसिला समाप्त करने का समय आया है, और हमें आगे बढ़ना चाहिए।’
ओलंपिक को ध्यान में रखकर की तैयारी
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार बृजभूषण ने ओलंपिक को लेकर कहा, ‘2 साल का समय है हमारे पास, डेढ़-दो साल का समय है। इस समय सरकार के तरफ से भी हर तरह की सुविधा मुहैया कराया जा रहा है। फेडरेशन भी आपके साथ है। अच्छे से अच्छे कोच, अच्छे से अच्छे ट्रेनर आपके लिए व्यवस्था की गई है। और अगर आप सोचेंगे, तो कामयाब होंगे, हमारा विश्वास है।’
पदक विजेताओं पर होगी इनामों की बारिश
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार बृजभूषण ने कहा, ‘साथ ही साथ ये जो गोल्ड मेडल लेकर के खिलाड़ी आए हैं… ये आज चाहे आप फेडरेशन के तरफ से समझ लो, चाहे आप प्रो रेसलिंग लीग के तरफ से समझ लो… हम प्रत्येक गोल्ड मेडल लाने वाले खिलाड़ियों को चाहेंगे कि 10 लाख रुपये मिले। हम ये भी चाहेंगे कि सिल्वर को कम से कम 7 लाख रुपये मिले। जो ब्रॉन्ज मेडल लेकर के आए हैं, उनको 5 लाख रुपये मिले।’
पहलवानों के सम्मान और उपलब्धियों पर बोले बृजभूषण
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि पहलवानों के साथ-साथ उनके सहयोगी स्टाफ को भी आर्थिक सम्मान दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस स्टाफ में कोच, मसाजर और अन्य सहयोगी शामिल होते हैं, जिनकी संख्या काफी अधिक होती है। बृजभूषण ने भारतीय कुश्ती महासंघ के नए सीईओ, पूर्व सचिव विनोद तोमर और कोषाध्यक्ष सत्यपाल सिंह देशवाल से इस दिशा में विचार करने का आग्रह किया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा कि अब वह महासंघ में पहले जैसी भूमिका में नहीं हैं और केवल सुझाव दे सकते हैं, लेकिन उन्हें उम्मीद है कि उनके आग्रह पर सकारात्मक विचार किया जाएगा। उन्होंने अपनी बात रखते हुए कहा कि पहलवानों का आना और बिना किसी सम्मान या प्रोत्साहन के लौट जाना अच्छा नहीं लगता।


