नई दिल्ली : अनुभवी खेल प्रशासक और एशियाई खेलों में निशानेबाजी में भारत को पहला स्वर्ण पदक दिलाने वाले रणधीर सिंह का बुधवार 27 मई 2026 को नई दिल्ली में निधन हो गया। उम्र संबंधी बीमारियों से लंबे समय तक जूझने के बाद उन्होंने 79 वर्ष की आयु में अंतिम सांस ली। भारतीय खेल जगत में उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा।
कई दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहने के बाद उन्होंने नई दिल्ली स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। रणधीर सिंह अपने पीछे पत्नी विनीता और तीन बेटियों (महिमा, सुनैना और राजेश्वरी) को छोड़ गए हैं। राजेश्वरी खुद भी एक निशानेबाज हैं। ट्रैप शूटर राजेश्वरी ने 2022 के एशियाई खेलों में रजत पदक जीता था। साथ ही 2016 की एशियाई चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल भी अपने नाम किया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, रणधीर सिंह ने स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं के कारण हाल में एशियाई ओलंपिक परिषद (ओसीए) के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। रणधीर सिंह को 2024 में चार साल के कार्यकाल के लिए चुना गया था।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ (एनआरएआई) के सचिव राजीव भाटिया ने कहा, ‘‘गहरे दुख के साथ हम राजा रणधीर सिंह के निधन की दुखद खबर साझा कर रहे हैं जो आज 27 मई 2026 को स्वर्ग सिधार गए।’’ मीडिया रिपोर्ट के अनुसार राजीव भाटिया ने कहा, ‘‘एक विशिष्ट ओलंपियन, अर्जुन पुरस्कार विजेता और भारत, एशिया और अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति में सबसे सम्मानित खेल प्रशासकों में से एक राजा रणधीर सिंह ने निशानेबाजी खेल और ओलंपिक आंदोलन के विकास में अमूल्य योगदान दिया।’’
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार राजीव भाटिया ने कहा, ‘‘एनआरएआई और पूरा निशानेबाजी समुदाय इस अपूरणीय क्षति पर शोक व्यक्त करता है और उनके परिवार तथा प्रियजन के प्रति हार्दिक संवेदना व्यक्त करता है। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें।’’ रणधीर सिंह के शानदार खेल करियर में पांच ओलंपिक में भागीदारी और 1978 के बैंकॉक एशियाई खेलों में ऐतिहासिक ट्रैप स्वर्ण पदक शामिल था। रणधीर सिंह को 1979 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। रणधीर सिंह ने टोक्यो 1964 (रिजर्व शूटर), मैक्सिको 1968, म्यूनिख 1972, मॉन्ट्रियल 1976, मॉस्को 1980 और लॉस एंजिल्स 1984 के ओलंपिक खेलों में हिस्सा लिया।
खेलों की तरह ही रणधीर सिंह का प्रशासनिक करियर भी बेहद सफल रहा। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने भारतीय ओलंपिक संघ के महासचिव के रूप में अहम जिम्मेदारी निभाई। इसके अलावा वह 2001 से 2014 तक अलग-अलग पदों पर अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति के सदस्य भी रहे। साल 2003 में उनकी भूमिका और महत्वपूर्ण हो गई, जब उन्हें दो वर्षों के लिए विश्व डोपिंग-रोधी एजेंसी में आईओसी के प्रतिनिधि के तौर पर नियुक्त किया गया।


