नई दिल्ली : भारतीय टेस्ट टीम में जगह न मिलने पर सरफराज खान अपनी निराशा और भावनाओं को छिपा नहीं पाए। उन्होंने आखिरी बार 2024 में न्यूजीलैंड के खिलाफ टेस्ट मैच खेला था। इसके बाद, बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के दौरान ऑस्ट्रेलिया में उन्हें पूरे समय बेंच पर ही बैठना पड़ा। फिर घरेलू क्रिकेट में लगातार अच्छा प्रदर्शन करने के बावजूद उन्हें पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया गया। रेलवे के खिलाफ रणजी ट्रॉफी मैच के दौरान मुंबई के इस बल्लेबाज ने अपने दिल की बात खुलकर रखी। अपनी फिटनेस सुधारने के लिए उन्होंने वजन 97 किलोग्राम से घटाकर 77 किलोग्राम तक किया और टीम में अपनी जगह बनाने के लिए उन्होंने हर मुमकिन कोशिश की है।
हर सीजन की शुरुआत करना मुश्किल से मुश्किल होता जा रहा है, लेकिन सरफराज हार नहीं मान रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने ब्रेबोर्न स्टेडियम में अर्धशतक लगाने के बाद कहा, ’मैं हर सुबह उठता हूं और खुद से यही सवाल पूछता हूं कि मैं इतनी कड़ी मेहनत क्यों करूं और बार-बार वही सब क्यों सहता रहूं? मैं भारत के लिए खेल चुका हूं। मैं सुबह 5 बजे उठता हूं और प्रैक्टिस के लिए जाता हूं। मैं चाहूं तो मुंबई के लिए खेल सकता हूं और अभी भी खेल रहा हूं। कभी-कभी मेरे मन में यह सवाल आता है, लेकिन जब मैं देखता हूं कि मेरे पिता मेरे लिए कितनी कड़ी मेहनत कर रहे हैं, तो मैं उनके लिए रन बनाना चाहता हूं। यही एक बात है जो मुझे प्रेरित करती है।’
श्रीलंका दौरे पर टीम इंडिया का हिस्सा बने थे सरफराज
साई सुदर्शन के चोट से ठीक न हो पाने के बाद चयन समिति ने सरफराज को श्रीलंका के खिलाफ दो टेस्ट मैचों की सीरीज के लिए चुना। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सरफराज का कहना है कि उन्हें नहीं पता था कि उन्हें श्रीलंका दौरे के लिए बुलावा आएगा। उन्होंने कहा,’मैं एनसीए में बल्लेबाजी कर रहा था। उन्होंने मुझे वहां बुलाया, लेकिन मुझे खेलने का मौका नहीं मिला। मैं वापस आ गया और मुंबई में क्रिकेट खेला। मैं बस खेल रहा हूं। जहां भी मुझे मौका मिलेगा, वे (चयनकर्ता) मुझे बुला लेंगे। मैं जाकर खेलूंगा। अगर वे मुझे नहीं बुलाते हैं तो मैं यहीं खेलूंगा।’
सरफराज का सवाल- ऐसा नहीं कि मैंने विदेशी पिचों पर रन नहीं बनाए
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सरफराज से पूछा गया कि क्या चयनकर्ताओं ने उन्हें साफ तौर पर बताया है कि वे उनमें किन खूबियों या कमियों को देख रहे हैं, या वे किन पहलुओं में सुधार चाहते हैं, तो सरफराज के पास सवालों के जवाब नहीं थे। एक धारणा बन गई है कि वह विदेशी परिस्थितियों में अच्छी बल्लेबाजी नहीं कर सकते। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार मुंबई के इस मिडिल-ऑर्डर बल्लेबाज ने कहा, ‘जब मैं भारतीय टीम के साथ जुड़ा था, तो मुझे बताया गया था कि मुझे भारतीय परिस्थितियों में और मौके दिए जाएंगे, लेकिन फिर भी मेरे मन में एक सवाल है। जब मैं अफ्रीका गया था, तो मैंने भारतीय टीम के खिलाफ 60 गेंदों पर 100 रन बनाए थे। जब मैं इंग्लैंड गया, तब भी मैंने 60 गेंदों में 100 रन बनाए थे। अब जब आप भारत लौटते हैं, तो यहां आपको बहुत ज्यादा टर्न करने वाली पिचें मिलती हैं। ऐसी मुश्किल पिच पर अचानक से खेलना बहुत चुनौतीपूर्ण हो जाता है। ऐसा नहीं है कि मैंने विदेशों में रन नहीं बनाए। मैंने वहां भी रन बनाए हैं। यह चयनकर्ताओं का अपना नजरिया है, लेकिन मेरा काम क्रिकेट खेलना है और मैं खेलता रहूंगा।’
मुझे किसी का समर्थन नहीं मिला
सरफराज को उम्मीद थी कि न्यूजीलैंड दौरे के लिए इंडिया ए टीम में उन्हें चुना जाएगा, लेकिन चयनकर्ताओं ने उन्हें टीम में शामिल नहीं किया। सरफराज को कहीं न कहीं यह लगता है कि उन्हें उन लोगों से समर्थन नहीं मिला, जिनसे उन्हें उम्मीद थी। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सरफराज कहते हैं, ‘सब जानते हैं कि मुझे अपनी जिंदगी में किसी का साथ नहीं मिला। अगर मुझे किसी का समर्थन मिला है, तो वह सिर्फ मेरे पिता हैं। मेरी जिंदगी में किसी और ने मेरा साथ नहीं दिया, लेकिन कोई बात नहीं। मैंने कड़ी मेहनत की है। मैंने अपने पिता का सपना पूरा किया है। आज के दौर में भारत में खेलना आसान नहीं है और ऐसा भी नहीं है कि मैंने बस एक-दो बार अच्छा स्कोर किया हो। मैंने 300, 200 और 250 रन बनाए हैं। अगर मुझे किसी का समर्थन मिला है, तो वह मेरे पिता हैं। मैं आगे भी अपनी पूरी क्षमता से कड़ी मेहनत करता रहूंगा।’


