नई दिल्ली : भारत सरकार ने पाकिस्तान के साथ खेल संबंधों को लेकर अपनी सख्त नीति एक बार फिर स्पष्ट कर दी है। सरकार के अनुसार, भारत और पाकिस्तान के बीच फिलहाल किसी भी तरह की द्विपक्षीय खेल सीरीज या मुकाबले नहीं खेले जाएंगे। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार हालांकि, अंतरराष्ट्रीय खेल महासंघों के नियमों और खिलाड़ियों के हितों को ध्यान में रखते हुए बहुराष्ट्रीय टूर्नामेंट्स में दोनों देशों के खिलाड़ी हिस्सा लेते रहेंगे। यानी ICC, एशियन गेम्स, ओलंपिक या अन्य वैश्विक प्रतियोगिताओं में भारत और पाकिस्तान की टीमें आमने-सामने आ सकती हैं, लेकिन अलग से द्विपक्षीय सीरीज पर रोक जारी रहेगी।
इस बीच, खेल मंत्रालय ने देश को वैश्विक खेल आयोजनों का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में वीजा प्रक्रिया को आसान करने का भी ऐलान किया है। साथ ही मंत्रालय ने अपना दफ्तर शास्त्री भवन से अब नेताजी नगर स्थित नए परिसर में स्थानांतरित कर दिया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार खेल मंत्रालय ने बुधवार छह मई 2026 को खिलाड़ियों, टीम अधिकारियों, तकनीकी कर्मचारियों और अंतरराष्ट्रीय खेल संचालन संस्थाओं के पदाधिकारियों के लिए वीजा प्रक्रिया को आसान बनाने की अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराई जिससे कि भारत को एक ‘पसंदीदा खेल स्थल’ के रूप में स्थापित किया जा सके। युवा मामले और खेल मंत्रालय ने इस बीच अपना कार्यालय शास्त्री भवन से हटाकर नेताजी नगर में अपने नए बने परिसर में स्थानांतरित कर लिया है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार खेल मंत्रालय ने सभी राष्ट्रीय खेल महासंघों (एनएसएफ), भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) और भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) सहित अन्य संस्थाओं को जारी एक सर्कुलर में कहा, ‘‘जहां तक एक-दूसरे के देश में द्विपक्षीय खेल प्रतियोगिताओं का संबंध है तो भारतीय टीमें पाकिस्तान में होने वाली प्रतियोगिताओं में हिस्सा नहीं लेंगी। ना ही हम पाकिस्तानी टीमों को भारत में खेलने की अनुमति देंगे।’’मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इसमें कहा गया, ‘‘अंतरराष्ट्रीय और बहु राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के संबंध में, चाहे वे भारत में हों या विदेश में हम अंतरराष्ट्रीय खेल संचालन संस्थाओं की कार्यप्रणाली और अपने स्वयं के खिलाड़ियों के हितों से निर्देशित होते हैं।’’
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इसके अनुसार, ‘‘इसे देखते हुए भारतीय टीमें और व्यक्तिगत खिलाड़ी उन अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेंगे जिनमें पाकिस्तान की टीमें या खिलाड़ी भी शामिल होते हैं। इसी तरह पाकिस्तानी खिलाड़ी और टीमें भारत द्वारा आयोजित ऐसी बहुपक्षीय प्रतियोगिताओं में भाग ले सकेंगी।’’इस नीति की घोषणा सबसे पहले पिछले साल अगस्त में की गई थी। यह घोषणा तब हुई जब यूएई में हुए क्रिकेट के एशिया कप में भारत के हिस्सा लेने को लेकर काफी हंगामा मचा था। इस टूर्नामेंट में पाकिस्तान भी खेल रहा था और इसका आयोजन पहलगाम आतंकी हमले के कुछ ही महीनों बाद हुआ था जिसमें 26 लोगों की जान चली गई थी।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार खेल मंत्रालय ने उस समय कहा था कि वह बहुपक्षीय क्रिकेट प्रतियोगिताओं में तब तक कोई रुकावट नहीं डालेगा जब तक कि मेजबान देश पाकिस्तान ना हो। यह नीति साफ करती है कि 2030 के राष्ट्रमंडल खेलों और 2036 के ओलंपिक खेलों की मेजबानी करने का इच्छुक भारत ओलंपिक चार्टर और उसकी समावेशिता की भावना का पालन करेगा जिससे कि वह वैश्विक प्रतियोगिताओं के एक मिलनसार मेजबान के रूप में खुद को प्रस्तुत कर सके।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार खेल मंत्रालय ने बताया कि भारत को वैश्विक खेल आयोजनों के लिए आकर्षक और भरोसेमंद मेजबान देश बनाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। इसके तहत खिलाड़ियों, टीम प्रबंधन, तकनीकी विशेषज्ञों और अंतरराष्ट्रीय खेल निकायों से जुड़े अधिकारियों के लिए वीजा प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक किया जाएगा। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय खेल संगठनों के पदाधिकारियों को उनके कार्यकाल के दौरान प्राथमिकता के साथ मल्टीपल एंट्री वीजा प्रदान किया जाएगा, जिसकी अवधि अधिकतम पांच वर्षों तक तय की जा सकती है।


