मध्य प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन अब नई महिला क्रिकेट टेलेंट को सामने लाने में भी सबसे आगे
भोपाल (national sports times) – इस साल जब महिला प्रीमियर लीग (डब्ल्यूपीएल) खेले तो भले ही स्मृति मंधाना की रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने अपना दूसरा खिताब जीता, पर ये सीजन नई प्रतिभा के चमकने वाले सीजन के तौर पर ज्यादा याद किया जाएगा। एक के बाद नई और युवा लडकियां चमकीं और भारतीय क्रिकेट बोर्ड का शुरु का ये डर भी ख़त्म हो गया कि अगर वे महिला क्रिकेट की नई लीग शुरू करें तो क्या इतनी घरेलू क्रिकेटर मिल जाएंगी जो अच्छा खेलती हों और जिनसे टीम बन सकें? मौजूदा स्थिति ये है कि देश की हर प्रतिभाशाली युवा क्रिकेट प्रतिभा को डब्ल्यूपीएल का कॉन्ट्रैक्ट नहीं मिल रहा है।
नई युवा महिला प्रतिभा को सामने लाने में, देश के बड़े क्रिकेट सेंटर तो आगे हैं ही पर इस सीजन में इस मामले में मध्य प्रदेश राज्य ने जो पहचान बनाई, वह कई अन्य राज्य के लिए नई प्रेरणा है। मध्य प्रदेश से आई क्रिकेटर की गिनती किसी भी दूसरी घरेलू टीम से ज़्यादा रही है और ख़ास बात ये कि लगभग हर किसी ने प्रभावित किया है। डब्ल्यूपीएल सीजन के दौरान अनुष्का शर्मा, वैष्णवी शर्मा, राहिला फिरदौस, संस्कृति गुप्ता और क्रांति गौड़ का नाम हर किसी की जुबान पर रहा और ये सभी मध्य प्रदेश के महिला क्रिकेट के ढांचे की देन हैं। किसी को याद भी नहीं होगा कि महिला क्रिकेट में एक ख़ास नाम पूजा वस्त्रकार भी मध्य प्रदेश से हैं और एक समय वे महिला क्रिकेट में इस राज्य से अकेली प्रतिनिधि थीं।

राज्य से बेहतरीन महिला क्रिकेटर सामने आ रही हैं और इसीलिए भारत की महिला क्रिकेट टीम में भी मध्य प्रदेश का प्रतिनिधित्व बढ़ रहा है। नई लड़कियों में से क्रांति गौड़ और वैष्णवी शर्मा ने भारत के लिए खेलना शुरु कर दिया है। सच तो ये है कि वैष्णवी की प्रतिभा को डब्ल्यूपीएल टीमों के पहचानने से भी पहले भारत की टीम की चयनकर्ताओं ने पहचान लिया था और भारत के लिए खेलने का मौका पहले मिला।
जब डब्ल्यूपीएल के 2026 सीजन के लिए नीलाम हुए थे तो मध्य प्रदेश से 12 खिलाड़ी ने अपना नाम रजिस्टर किया और इनमें से पांच को कॉन्ट्रैक्ट भी मिला। ये पांच अनुष्का शर्मा (गुजरात जायंट्स), क्रांति गौड़ (यूपी वॉरियर्स), पूजा वस्त्रकार (देश की टॉप ऑलराउंडर में से एक जिनका रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु टीम में वापस लौटना उनकी फिटनेस पर निर्भर था), राहिला फिरदौस और संस्कृति गुप्ता (दोनों मुंबई इंडियंस में) थीं। डब्ल्यूपीएल में मध्य प्रदेश को ऐसा प्रतिनिधित्व इससे पहले कभी नहीं मिला था।

साथ ही में इस नीलाम से जुड़ी सबसे ज्यादा हैरान करने वाली खबर ये थी कि जो शानदार खब्बू स्पिनर वैष्णवी शर्मा भारत के लिए खेल रही थी, उसे किसी भी टीम ने न खरीदा। बाद में, सीजन के बीच, कंधे की चोट की वजह से मुंबई इंडियंस की टीम से जी कमलिनी बाहर हुई तो उन्होंने उनकी जगह वैष्णवी शर्मा को ले लिया। कमलिनी विकेटकीपर थी। इस तरह एक कीपर-बल्लेबाज के उलट, खब्बू स्पिनर वैष्णवी को लिया। वह पिछले दिसंबर में विशाखापत्तनम और तिरुवनंतपुरम में श्रीलंका के विरुद्ध टी20 अंतरराष्ट्रीय श्रृंखला में अपना डेब्यू कर चुकी थी। वहां भारत की कप्तान हरमनप्रीत को प्रभावित किया और हरमनप्रीत की व्यक्तिगत पसंद के तौर पर ही मुंबई टीम का कॉन्ट्रैक्ट मिला। ये 30 लाख रुपये का कॉन्ट्रैक्ट था।

सालों तक, जब महिला क्रिकेट की बात आती थी, तो मध्य प्रदेश का नाम किसी ख़ास चर्चा में नहीं आता था। अब, राज्य के पास सबसे बेहतर क्रिकेटर सामने लाने वाले क्रिकेटिंग इकोसिस्टम में से एक है। न सिर्फ राज्य टीम घरेलू खिताब जीत रही है, टीम इंडिया और महिला प्रीमियर लीग के लिए भी बेहतर क्रिकेटर दे रहे हैं। क्रांति गौड़ ने तो हाल ही में भारत के लिए ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध पर्थ टेस्ट में अपना डेब्यू भी किया और लिचफील्ड के कीमती विकेट से अपने टेस्ट जीवन की शुरूआत की।

पिछले दो सालों में, मध्य प्रदेश की खिलाड़ियों को लगातार भारत के लिए खेलने का मौका मिला है। नई खिलाड़ी के तौर पर सबसे ज्यादा चर्चा शानदार खब्बू स्पिनर वैष्णवी शर्मा की हुई। वे 2025 अंडर 19 विश्व कप जीतने वाली टीम में भी थी। जब श्रीलंका के विरुद्ध टी20 श्रृंखला में डेब्यू किया तो प्रभावित करने में कोई कमी न रखी थी। पिछले साल, शुचि उपाध्याय (वे भी खब्बू स्पिनर) और क्रांति गौड़ ने भारत के लिए डेब्यू किया था। चंबल से घुवारा, भोपाल से ग्वालियर तक, मध्य प्रदेश राज्य से खिलाड़ी यूं ही सामने नहीं आ रहीं। ये एक बड़ी सोच के साथ बनाए गए सिस्टम की देन है।
सभी को प्रभावित करने वाली युवा ऑलराउंडर अनुष्का ने बताया, ‘जैसे ही चंद्रकांत (पंडित) सर आए, हमारी सोच बदल गई।’ पंडित के इस सिस्टम से जुड़ने के बाद से बद्लाव में तेजी आई। कोच के तौर पर उनका लक्ष्य बड़ा साफ़ था, ‘हर कोई जीतने के लिए खेलता है। इससे भी ज़रूरी बात यह है कि उन्होंने बताया कि कैसे जीतना है, कौन से रास्ते अपनाने हैं, किस ढंग से सिलसिलेवार आगे बढ़ना है और सबसे ख़ास बात ये कि दबाव में भी कैसे अपने फोकस से नहीं हटना है।’

मध्य प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन के चीफ एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर रोहित पंडित के अनुसार, हाल की सफलता से बहुत पहले ही इसकी नींव रख दी गई थी। मध्य प्रदेश से ऐसा नहीं कि मौजूदा पीढ़ी से पहले किसी महिला क्रिकेटर का नाम नहीं चमका पर नई प्रतिभा को मौका देने और चमकाने का कोई सिस्टम नहीं था। अब स्ट्रक्चर्ड टूर्नामेंट और एज-ग्रुप स्काउटिंग के ज़रिए नई प्रतिभा की पहचान करना और युवा खिलाड़ियों को बिना देरी सीनियर क्रिकेट में लाना प्राथमिकता बन गया है।
चंद्रकांत पंडित के चीफ कोच बनने के बाद पिछले 5 सालों में बड़ी तेज़ी आई है। तब से, मध्य प्रदेश ने जून से अक्टूबर तक 5 महीने के कैंप नियमित लगाए हैं। इस समय महिला टीम के कोच समीर नाइक का कहना है ‘ ये सिर्फ़ प्री-टूर्नामेंट कैंप नहीं हैं। हम महीनों तक स्किल्स, फिटनेस, मेंटल कंडीशनिंग और पर्सनैलिटी डेवलपमेंट पर काम करते हैं। हम दबाव बनाने के लिए दूसरे राज्य के विरुद्ध इंट्रा-स्क्वाड प्रैक्टिस मैच खेलते हैं।”

एक और बड़ी अलग खूबी है। मध्य प्रदेश में पुरुष और महिला क्रिकेट कैंप, हर उम्र वर्ग के लिए, साथ-साथ चलते हैं। नाइक ने कहा, ‘अंडर-16 लड़के, अंडर-19 महिलाएं, रणजी खिलाड़ी, सीनियर महिलाएं, सभी एक साथ ट्रेनिंग करते हैं।’ इसके पीछे सोच ये है कि ट्रेनिंग के स्तर में कोई अंतर न हो। जब यहां युवा लड़कियां, रजत पाटीदार (मध्य प्रदेश रणजी टीम और आरसीबी के कप्तान) या वेंकटेश अय्यर जैसे खिलाड़ियों के साथ प्रैक्टिस करती हैं, तो इससे अपने आप ही उनके खेल का स्तर बढ़ जाता है और बहुत कुछ ऐसा सीख लेती हैं वे जो किसी कोचिंग किताब में नहीं लिखा है।’
अनुष्का शर्मा के अनुसार ये कैंप सीखने का एक बड़ा जरिया रहे हैं। वे बोली, ‘आप सिर्फ़ अपनी टीम के साथियों के साथ प्रैक्टिस नहीं करते। इंटरनेशनल और घरेलू स्टार्स के साथ ट्रेनिंग करने से फर्क पड़ता है क्योंकि आपसी मुकाबला बहुत ज्यादा होता है। वे अपने खेल पर जो मेहनत करते हैं, वह वह आपको भी आगे बढ़ाती है। हम भी उन जैसा ही करने की कोशिश करते हैं।’ विकेटकीपर राहिला का कहना है कि इस तरह की सोच वाले ट्रेनिंग कैंप बदलाव लाने वाले बन गए हैं, ‘जब आप ग्राउंड में जाते हैं, माहौल को महसूस करते हैं तो ऐसे माहौल में खेलने और ट्रेनिंग करने से हम ठीक उसी तरह से खेलते हैं और इस से क्रिकेट स्तर बेहतर हुआ।’

सालों तक, मध्य प्रदेश से क्रिकेट टीमें, अच्छा खेलने के बावजूद मुकाबले की भावना में कमी की वजह से, ट्रॉफियों के नॉकआउट राउंड में पीछे रह जाती थीं। बदलाव तब आया जब कोचिंग स्टाफ ने उस मनोवैज्ञानिक दायरे से खिलाड़ियों को बाहर निकाला। उनके अंदर ये जोश पैदा किया कि वे किसी से कम नहीं और जीत के लिए खेलें। नाइक ने याद करते हुए कहा, ‘हम क्वार्टर फ़ाइनल तक पहुंचते थे पर उसके बाद अटक जाते थे। इस पर बहुत सोचा। उसके बाद नतीजा निकाला कि लगातार 5 महीने कैंप में लगा दो। हर पहलू पर मेहनत करो। सब कुछ दे दो। हम उस मुश्किल को पार क्यों नहीं कर सकते?’
सोच में बदलाव की ज़रूरत थी। नाइक ने कहा, ‘मुश्किल पलों से डरने के बजाय, हमने उनका मज़ा लेने का फैसला किया।” नतीजे जल्दी ही सामने आए: अंडर 19 चैंपियन, अंडर 23 चैंपियन, सीनियर टीमों ने खिताब जीतने शुरु कर दिए और फाइनल भी खेले। मध्य प्रदेश सीनियर वन डे ट्रॉफी विजेता है और महिला सीनियर टी20 ट्रॉफी में फ़ाइनल खेले हैं। राहिला ने कहा, ‘चंदू सर और सभी कोच ने हमें यकीन दिलाया कि हम सबसे ऊंचे स्तर पर हैं। इसके बाद जीत तो मिलेगी ही।’ इस चर्चा में, राज्य क्रिकेट एसोसिएशन द्वारा चलाई जाने वाली स्टेट विमेंस लीग (MPWL) के योगदान को भी नजरअंदाज नहीं कर सकते। भारत में ज्यादा राज्य महिला क्रिकेट लीग नहीं चला रहे। इसलिए ग्वालियर में जो पहल हुई वह तारीफ़ योग्य है और उसका काफी असर भी रहा है।

अनुष्का ने कहा,’लीग का सीधे टेलीकास्ट होने से बहुत फर्क पड़ा। भीड़, शोर और दबाव, इन सभी में आपको लगता है कि आप कुछ ज़रूरी और बड़ा खेल रहे हैं। यहां इंटरव्यू देना, प्रेजेंटेशन में खुद इनाम लेना या दूसरों को इनाम लेते देखना, बहुत कुछ सिखा देता है। ये अनुभव डब्ल्यूपीएल के दौरान बड़े काम आया।’ इस तरह से मध्य प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन इस जिम्मेदारी को निभा रही है कि राज्य में क्रिकेट का ऐसा ढांचा बना दें जहां नई प्रतिभा की योग्यता सभी के सामने आए। इसलिए एक पाइप लाइन बन गई है और अब लगातार नई रतिभा सामने आ रही है। ऐसा नहीं कि जो किया उसी के नतीजों से खुश है क्रिकेट एसोसिएशन। लगातार और बेहतर ट्रेनिंग, मुश्किल चुनौती की कोशिश हो रहे है ताकि खिलाड़ी को हर मुकाबले के लिए तैयार कर दें।
अनुष्का शर्मा, क्रांति गौड़ और वैष्णवी शर्मा की प्रतिभा के बारे में तो विदेशी जानकारों ने भी लिखा। जब अनुष्का को जायंट्स ने 45 लाख रूपये में चुना, तो अनुष्का के लिए सबसे बड़ा मौका था ऐश गार्डनर के साथ ड्रेसिंग रूम में क्रिकेट के बारे में नया सीखना। अपने डब्ल्यूपीएल डेब्यू पर, उन्होंने कप्तान गार्डनर के साथ शतकीय साझेदारी निभाई। इस डेब्यू पर यूपी वॉरियर्स के विरुद्ध 30 गेंद में 44 रन बनाकर प्रभावित किया और उनकी टीम ने मैच 10 रन से जीत लिया। भारतीय क्रिकेट बोर्ड के इंटर-जोनल टूर्नामेंट में 5 पारी में 155 रन बनाए और तीसरी सबसे ज़्यादा रन बनाने वाली खिलाड़ी रहीं। उन्होंने बुंदेलखंड बुल्स के लिए खेलते हुए मध्य प्रदेश विमेंस लीग में भी छक्के मारने की अपनी काबिलियत दिखाई, और अपनी बेबाक और निडर अप्रोच के लिए तारीफ बटोरी।
प्रस्तुति चरनपाल सिंह सोबती


