नई दिल्ली : क्रिकेट को लंबे समय तक ‘जेंटलमैन गेम’ कहा जाता रहा, लेकिन पिछले तीन दशकों में इस खेल की छवि पर सबसे बड़ा दाग मैच फिक्सिंग और भ्रष्टाचार के रूप में लगा। कभी खिलाड़ियों पर सट्टेबाजों से सांठगांठ के आरोप लगे, तो कभी स्पॉट फिक्सिंग, अंदरूनी जानकारी लीक करने और संदिग्ध लोगों से संपर्क छिपाने जैसे मामलों ने क्रिकेट जगत को झकझोर दिया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद और अलग-अलग क्रिकेट बोर्डों ने समय-समय पर सख्त कार्रवाई करते हुए कई खिलाड़ियों पर प्रतिबंध भी लगाए, लेकिन इन विवादों ने खेल की साख को गहरी चोट पहुंचाई।
साल 2000 में सामने आए हैंसी क्रोनिए कांड ने दुनिया को हिला दिया था। दक्षिण अफ्रीकी कप्तान जैसे बड़े खिलाड़ी का मैच फिक्सिंग में फंसना यह दिखाने के लिए काफी था कि क्रिकेट के भीतर भ्रष्टाचार कितनी गहराई तक पहुंच चुका है। इसके बाद पाकिस्तान, भारत, दक्षिण अफ्रीका, बांग्लादेश और यूएई समेत कई देशों के खिलाड़ी भ्रष्टाचार के मामलों में प्रतिबंधित हुए। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अब तक कुल 33 खिलाड़ियों पर प्रतिबंध लग चुका है। इनमें सबसे ज्यादा 8 खिलाड़ी पाकिस्तान से हैं, जबकि दक्षिण अफ्रीका के 7 और यूएई के 5 खिलाड़ी इस सूची में शामिल हैं। भारत के भी चार बड़े नाम इस विवाद में फंस चुके हैं।
फिक्सिंग मामलों में पाकिस्तान के सबसे ज्यादा 8 खिलाड़ी बैन
पाकिस्तान क्रिकेट का विवादों से पुराना नाता रहा है। साल 2000 में सलीम मलिक और अताउर रहमान पर लगे आरोपों ने पाकिस्तान क्रिकेट को बड़ा झटका दिया था। सलीम मलिक दुनिया के पहले ऐसे क्रिकेटर बने, जिन पर भ्रष्टाचार के मामले में आजीवन प्रतिबंध लगाया गया। उन पर खिलाड़ियों को रिश्वत देने और सट्टेबाजों से संबंध रखने जैसे गंभीर आरोप लगे थे। हालांकि बाद में उनके ऊपर से प्रतिबंध हटा लिया गया, लेकिन उनकी छवि पर लगा दाग कभी पूरी तरह मिट नहीं पाया।
इसके बाद 2010 का इंग्लैंड दौरा पाकिस्तान क्रिकेट के इतिहास का सबसे शर्मनाक अध्याय बना। कप्तान सलमान बट, तेज गेंदबाज मोहम्मद आमिर और मोहम्मद आसिफ स्पॉट फिक्सिंग में दोषी पाए गये। तीनों खिलाड़ियों ने तय ओवरों में नो-बॉल फेंकने की साजिश की थी। मामला इतना गंभीर था कि इंग्लैंड की अदालत ने इन्हें जेल तक भेजा। पाकिस्तान के जिन खिलाड़ियों पर प्रतिबंध लगा, उनमें सलीम मलिक, अतउर रहमान, मोहम्मद आमिर, मोहम्मद आसिफ, सलमान बट, दानिश कनेरिया, शरजील खान और उमर अकमल शामिल हैं।
भारत में भी लगा था बड़ा झटका
भारतीय क्रिकेट में मैच फिक्सिंग का सबसे बड़ा तूफान साल 2000 में आया। उस समय टीम इंडिया के कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन पर सट्टेबाजों से संबंध रखने और खिलाड़ियों को मिलाने के आरोप लगे। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने उन पर आजीवन प्रतिबंध लगाया था, जिसे बाद में अदालत ने रद्द कर दिया।
अजय शर्मा और अजय जडेजा भी इस विवाद में फंसे। अजय जडेजा पर पांच साल का प्रतिबंध लगा। हालांकि, बाद में 2003 में उसे हटा लिया गया। मनोज प्रभाकर का मामला भी काफी चर्चित रहा। उन्होंने पहले कपिल देव समेत कई खिलाड़ियों पर आरोप लगाये, लेकिन जांच में खुद दोषी पाए गए। उन पर पांच साल का प्रतिबंध लगा। इन घटनाओं ने भारतीय क्रिकेट की साख को गहरी चोट पहुंचाई थी।
हैंसी क्रोनिए कांड ने बदल दी क्रिकेट की दुनिया
दक्षिण अफ्रीका के कप्तान हैंसी क्रोनिए का मामला क्रिकेट इतिहास के सबसे चर्चित भ्रष्टाचार मामलों में गिना जाता है। हैंसी क्रोनिए ने सट्टेबाजों से पैसे लेने और मैच से जुड़ी जानकारी देने की बात स्वीकार की थी। इसके बाद उन पर आजीवन प्रतिबंध लगा दिया गया। इसी मामले में हर्शल गिब्स और हेनरी विलियम्स भी फंसे। हर्शल गिब्स ने एक मैच में जानबूझकर खराब खेलने की डील स्वीकार की थी। हालांकि बाद में उन्होंने शानदार बल्लेबाजी की। बाद के वर्षों में दक्षिण अफ्रीका के गुलाम बोदी, थामी त्सोलेकिले, लोनवाबो त्सोत्सोबे और अल्वीरो पीटरसन भी भ्रष्टाचार के मामलों में प्रतिबंधित हुए। कुल मिलाकर दक्षिण अफ्रीका के सात खिलाड़ी इस सूची में शामिल हैं।
बांग्लादेश प्रीमियर लीग भी रही विवादों में
टी20 लीगों के बढ़ते दौर के साथ मैच फिक्सिंग के मामले भी तेजी से बढ़े। बांग्लादेश प्रीमियर लीग (बीपीएल) कई बार भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरी। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश के पूर्व कप्तान मोहम्मद अशरफुल पर बीपीएल में फिक्सिंग के आरोप में आठ साल का प्रतिबंध लगाया गया था। इसके अलावा शरीफुल हक और शाकिब अल हसन भी भ्रष्टाचार रोधी नियमों के उल्लंघन के कारण प्रतिबंध झेल चुके हैं। हालांकि, शाकिब पर मैच फिक्सिंग का आरोप नहीं था, लेकिन उन्होंने सट्टेबाजों द्वारा किये गए संपर्क की जानकारी आईसीसी को नहीं दी थी।
यूएई क्रिकेट में एक साथ पांच खिलाड़ी बैन
यूएई क्रिकेट को 2021 में बड़ा झटका लगा, जब आईसीसी ने एक साथ पांच खिलाड़ियों को बैन कर दिया। शाइमन अनवर, मोहम्मद नावेद, कादिर अहमद, आमिर हयात और अशफाक अहमद पर टी20 विश्व कप क्वालिफायर में मैच फिक्सिंग की कोशिश करने के आरोप साबित हुए। इनमें कई खिलाड़ियों पर आठ-आठ साल का प्रतिबंध लगा। यूएई के खिलाड़ियों का फिक्सिंग में फंसना दिखाता है कि एसोसिएट देशों का क्रिकेट भी भ्रष्टाचार के खतरे से अछूती नहीं रहा।
कई खिलाड़ियों का करियर पूरी तरह खत्म हो गया
इन मामलों में कुछ खिलाड़ियों के प्रतिबंध बाद में हट गए, लेकिन अधिकांश खिलाड़ियों का करियर कभी पटरी पर नहीं लौट पाया। मोहम्मद आमिर ने जरूर वापसी की और पाकिस्तान के लिए दोबारा खेले, लेकिन सलमान बट और मोहम्मद आसिफ फिर कभी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पुरानी पहचान नहीं बना सके। दानिश कनेरिया ने वर्षों तक खुद को निर्दोष बताया, लेकिन बाद में स्पॉट फिक्सिंग में शामिल होने की बात स्वीकार की। न्यूजीलैंड के ल्यू विसेंट पर लगा आजीवन प्रतिबंध क्रिकेट जगत के सबसे सख्त फैसलों में से एक माना गया।
भ्रष्टाचार पर ICC और क्रिकेट बोर्डों का सख्त एक्शन
2000 के बाद आईसीसी ने भ्रष्टाचार रोकने के लिए एंटी करप्शन यूनिट (भ्रष्टाचार रोधी इकाई) को और मजबूत किया। खिलाड़ियों को सट्टेबाजों से संपर्क की जानकारी तुरंत देने के नियम बनाए गए। अब सिर्फ मैच फिक्सिंग ही नहीं, बल्कि संदिग्ध संपर्क छिपाना भी गंभीर अपराध माना जाता है। यही वजह है कि शाकिब अल हसन और उमर अकमल जैसे खिलाड़ियों को सिर्फ जानकारी छिपाने पर भी बैन झेलना पड़ा।
क्रिकेट के लिए बड़ा सबक बन गए फिक्सिंग कांड
मैच फिक्सिंग और भ्रष्टाचार के मामलों ने यह साबित कर दिया कि क्रिकेट में प्रतिभा, लोकप्रियता और स्टारडम भी खिलाड़ियों को गलत फैसलों से नहीं बचा सकते। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार कई कप्तान, दिग्गज बल्लेबाज और तेज गेंदबाज भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण अपना करियर और सम्मान दोनों गंवा चुके हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार आज भी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद और दुनिया भर के क्रिकेट बोर्डों के सामने सबसे बड़ी चुनौती खेल की विश्वसनीयता बनाए रखना है। आखिरकार, दर्शकों का भरोसा ही क्रिकेट की सबसे बड़ी ताकत माना जाता है।


