नई दिल्ली : इंडियन प्रीमियर लीग भारत ही नहीं, पूरी दुनिया की सबसे बड़ी टी20 लीग में से एक है। इस लीग के 18 सीजन पूरे हो चुके हैं और 19वां सीजन जारी है। हालांकि, फैंस के बीच ‘क्रिकेट का त्योहार’ कही जाने वाली इस लीग का रोमांच अब धीरे-धीरे कम होता नजर आ रहा है। टीवी व्यूअरशिप और लाइव स्ट्रीमिंग के आंकड़े भले ही इसकी लोकप्रियता बरकरार दिखाते हों, लेकिन मैचों का अनुभव पहले जैसा रोमांचक महसूस नहीं हो रहा। इसका ताजा उदाहरण IPL 2026 का मौजूदा सीजन है, जिसमें कई मुकाबलों में वह थ्रिल और प्रतिस्पर्धा की कमी देखने को मिल रही है, जिसने पहले इस लीग को खास बनाया था।
इंडियन प्रीमियर लीग को बोरिंग किसने बताया?
दरअसल ऐसा मानना हमारा या आपका नहीं है। फैंस के साथ-साथ कई क्रिकेट एक्सपर्ट्स जैसे रविचंद्रन अश्विन ने भी शुरुआत में कहा था कि टी20 वर्ल्ड कप के बाद की थकान खिलाड़ियों पर असर डाल रही है। कई खिलाड़ी चोटिल हो रहे हैं। आरसीबी के डायरेक्टर बोबट (Mo Bobat) का कहना था कि क्रिकेट कैलेंडर बहुत बिजी है और इंजरी बढ़ रही हैं। कुछ फैंस के भी हम सोशल मीडिया रीएक्शन्स आपको दिखाते हैं कि उनके मुताबिक आईपीएल अब बोरिंग हो रहा है। अब ऐसे सवाल आखिर क्यों उठ रहे हैं, खिलाड़ी लगातार चोटिल हो रहे हैं, मैच बोरिंग हो रहे हैं।
इंडियन प्रीमियर लीग 2026 में क्यों कम हो रहा रोमांच?
आईपीएल 2026 में अगर पहले 28 मैचों की बात करें तो सिर्फ दो-तीन मुकाबले ही ऐसे रहे हैं जिसमें कांटे की टक्कर दिखी। वरना लगभग हर मैच में एक टीम को एकतरफा जीत ही मिलती दिखी है। कई मौकों पर तो मैचों की पॉपुलरिटी सिर्फ वैभव सूर्यवंशी की ताबड़तोड़ बल्लेबाजी, विराट कोहली, रोहित शर्मा जैसे बड़े नामों तक ही सीमित दिखी है। कुछ टीमों के मुकाबले तो एकदम ही बोरिंग नजर आए हैं, जिसमें से एक लखनऊ सुपर जायंट्स भी रही है। अब इसके कई कारण हो सकते हैं। जिस पर एक-एक करके नजर डालेंगे:-
1- रनों की बरसात: 200 रन बनना आम बात
आईपीएल में एक वक्त ऐसा भी था जब 160 का स्कोर, 140, 150 का स्कोर भी डिफेंड होता था। आज के दिन 200 रन का आंकड़ा जीत और हार का मानक बनता जा रहा है। जिस तरह से वनडे क्रिकेट में अब धीरे-धीरे 350 रन आम बात हो गई है, ठीक उसी तरह आईपीएल में 200 रन के साथ हो रहा। आईपीएल में 2008 से 2022 तक 132 बार ही 200 या 200 प्लस का स्कोर बना था। मगर 2023 से 2025 तक तीन सीजन में ही 130 बार 200 रन का आंकड़ा टीमों ने छुआ। आईपीएल 2026 में तो इसकी हद ही पार होती दिखी है। पहले 28 मैचों में ही 21 बार 200 रन बन चुके हैं।
IPL में 2008–2025 तक हर सीजन कितनी बार बने 200 या उससे अधिक रन
साल
कितने बार बने 200 से ज्यादा रन
2008
11
2009
1
2010
9
2011
5
2012
5
2013
4
2014
9
2015
7
2016
6
2017
10
2018
14
2019
11
2020
13
2021
9
2022
18
2023
37
2024
41
2025
52
2026
21 (पहले 28 मैचों तक)
इस सीजन में 70 लीग मुकाबले और उसके बाद प्लेऑफ खेले जाने हैं, ऐसे में 200+ स्कोर बनना अब आम होता जा रहा है और कई पुराने रिकॉर्ड टूटते दिख रहे हैं। यही एक बड़ी वजह है कि मुकाबलों का रोमांच थोड़ा फीका पड़ता नजर आ रहा है। फैंस को गेंद और बल्ले के बीच संतुलित टक्कर देखने को नहीं मिल रही। इसके पीछे फ्लैट पिचें और बल्लेबाजों के पक्ष में झुके नियम भी अहम कारण माने जा रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि जसप्रीत बुमराह जैसे दिग्गज गेंदबाज शुरुआती मैचों में विकेट लेने के लिए संघर्ष करते दिखे, जबकि ट्रेंट बोल्ट, जोश हेजलवुड और मैट हेनरी जैसे गेंदबाजों की भी जमकर धुनाई हो रही है। इससे यह सवाल उठने लगा है कि क्या गेंदबाजों की धार कम हुई है या फिर पिचों में उनके लिए अब कुछ खास बचा ही नहीं है।
2- क्रिकेट का व्यस्त कार्यक्रम
अगर कोविड से पहले की बात करें तो 2019 तक भारतीय क्रिकेट टीम एक साल में औसतन 30 से 40 इंटरनेशनल मैच खेलती थी। आज के दौर में यह आंकड़ा 60 प्लस तक जा चुका है। कोविड के बाद अब तकरीबन हर साल आईसीसी टूर्नामेंट हो रहे हैं। इस कारण फैंस के बीच बहुत ज्यादा क्रिकेट हो गया है। इस कारण इंटरनेशनल आईसीसी टूर्नामेंट के तुरंत बाद आईपीएल जैसी लीग का रोमांच कम हो चुका है। इसके कुछ आंकड़े भी आपको बताते हैं।
2017 से 2025 तक किस साल भारत ने खेले कितने इंटरनेशनल मैच?
साल
भारत ने इंटरनेशनल मैच खेले
2017
46 मैच (कोविड से पहले सबसे व्यस्त साल)
2018
37 मैच
2019
42 मैच (वनडे वर्ल्ड कप का साल)
2020
23 मैच (कोविड लॉकडाउन से प्रभावित साल)
2021
40 मैच
2022
71 मैच (अब तक का सबसे व्यस्त साल)
2023
66 मैच (वनडे वर्ल्ड कप का साल)
2024
36 मैच
2025
42 मैच
2026
19 मैच (अब तक आईपीएल से पहले)
ये आंकड़े साफ दर्शा रहे हैं कि क्रिकेट बहुत ज्यादा पिछले कुछ वर्षों में बढ़ गया है। हर दो साल में टी20 वर्ल्ड कप होने के कारण टी20 इंटरनेशनल मैचों की भी संख्या काफी बढ़ चुकी है। यही कारण है कि फैंस भी अब थक चुके हैं। इसलिए थोड़ा मौजूदा सीजन बोरिंग लग रहा है। हालांकि, अभी यह पहला महीना है, आगे यह मानसिकता बदल भी सकती है।
3- बड़े खिलाड़ियों पर निर्भरता
इस सीजन अभी तक आईपीएल की पॉपुलरिटी की निर्भरता बड़े खिलाड़ियों के नाम तक ही दिखी है। हालांकि, प्रफुल हिंगे, साकिब हुसैन, मुकुल चौधरी जैसे नए युवा चेहरों ने भी दस्तक दी, लेकिन एमएस धोनी का ना होना भी फैंस की संख्या में कमी का एक बड़ा कारण हो सकता है। रोहित शर्मा भी इंजरी से जूझ रहे हैं। विराट कोहली भी पिछले कुछ मैचों से बतौर इम्पैक्ट प्लेयर खेल रहे। ऐसे में बड़ा दारोमदार हो गया वैभव सूर्यवंशी जैसे खिलाड़ी पर। जिनके खेल की तुलना वीडियो गेम से भी होती है। 15 वर्षीय बल्लेबाज की बैटिंग इस सीजन अभी तक आईपीएल के रोमांच को बनाए हुए है।
अब अगर इस गिरते रोमांच के कारणों पर नजर डालें तो साफ होता है कि मैचों की अधिकता, बल्लेबाजों के अनुकूल पिचें और नियम, गेंदबाजों का कम असरदार होना, लगातार बड़े स्कोर बनना और कई स्टार खिलाड़ियों का चोटिल होना—ये सभी फैक्टर इंडियन प्रीमियर लीग 2026 को थोड़ा फीका बना रहे हैं। हालांकि, यह अभी सीजन की शुरुआत भर है और लीग अपने चरम तक नहीं पहुंची है। जैसे-जैसे प्लेऑफ की तस्वीर साफ होगी और एम एस धोनी की वापसी के साथ रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे खिलाड़ी पूरी फिटनेस में नजर आएंगे, साथ ही नए खिलाड़ी उभरकर सामने आएंगे, वैसे-वैसे यह ‘क्रिकेट का त्योहार’ फिर से अपने पुराने रंग में लौट सकता है।