ज्वाला गुट्टा के खास सफर की कहानी: 4 साल की उम्र में बैडमिंटन से जुड़ीं, अश्विनी के साथ हिट रही जोड़ी

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नई दिल्ली : ज्वाला गुट्टा भारत की बेहतरीन बैडमिंटन खिलाड़ियों में शुमार रही हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने महिला युगल और मिश्रित युगल में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करने के साथ देश के लिए कई पदक भी जीते। ज्वाला गुट्टा का जन्म 7 सितंबर 1983 को महाराष्ट्र के वर्धा में हुआ था। उनकी मां चीनी मूल की हैं, जबकि पिता तेलुगु मूल के भारतीय हैं। भारतीय बैडमिंटन में ‘ग्लैमर गर्ल’ के नाम से मशहूर ज्वाला का खेल से जुड़ाव बेहद कम उम्र में हो गया था। उनके पिता उन्हें महज 4 साल की उम्र में बैडमिंटन कोच एस. एम. आरिफ के पास लेकर गए थे। यहीं से ज्वाला के बैडमिंटन सफर की शुरुआत हुई, जिसने आगे चलकर उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाई।

दो ओलंपिक वर्गों में जगह बनाने वाली पहली भारतीय बनीं ज्वाला

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, गुट्टा के खेल तकनीक पर गौर करें तो उन्हें फ्रंट कोर्ट में खतरनाक माना जाता है। बैक कोर्ट से भी उनका स्मैश जबरदस्त है। वह ड्रॉप भी शानदार तरीके से करती थीं। 14 बार की नेशनल चैंपियन गुट्टा ने अपने करियर की शुरुआत में श्रुति कुरियन के साथ खेला, लेकिन उन्हें अश्विनी पोनप्पा के साथ ज्यादा इंटरनेशनल सफलता मिली। गुट्टा और पोनप्पा की जोड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहुत लोकप्रिय रही। ये जोड़ी लगातार बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड रैंकिंग में टॉप-ट्वेंटी में शामिल रही और 2015 में नंबर 10 तक पहुंची। गुट्टा भारतीय मूल की पहली बैडमिंटन खिलाड़ी हैं, जिन्होंने ओलंपिक में दो इवेंट्स के लिए क्वालिफाई किया है। पोनप्पा के साथ महिला युगल और लंदन में वी. दीजू के साथ मिश्रित युगल में उन्होंने हिस्सा लिया था।

ज्वाला गुट्टा के करियर पर एक नजर

युवा लड़कियों के बीच बैडमिंटन के प्रति क्रेज बढ़ाने वाली खिलाड़ियों में ज्वाला गुट्टा का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। उनके करियर में कई बड़ी अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियां दर्ज हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार ज्वाला ने 2011 विश्व चैंपियनशिप में महिला युगल में कांस्य पदक जीता। इसके अलावा, कॉमनवेल्थ गेम्स 2010 में महिला युगल में स्वर्ण और मिश्रित टीम स्पर्धा में रजत पदक अपने नाम किया। 2014 के कॉमनवेल्थ गेम्स में भी उन्होंने महिला युगल में रजत पदक हासिल किया। 2014 में इंचियोन में आयोजित एशियाई चैंपियनशिप में ज्वाला ने कांस्य पदक जीता। दक्षिण एशियाई खेलों में भी उनका शानदार रिकॉर्ड रहा। 2004 में उन्होंने महिला युगल, मिश्रित युगल और महिला टीम स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीते, जबकि 2006 के दक्षिण एशियाई खेलों में महिला युगल, मिश्रित युगल और महिला टीम वर्ग में फिर स्वर्ण पदक अपने नाम किए।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार ज्वाला गुट्टा और वी. दीजू ने 2009 में चीनी ताइपे ओपन का खिताब जीतकर भारतीय बैडमिंटन में एक नया अध्याय जोड़ा। यह जोड़ी ग्रैंड प्रिक्स गोल्ड स्तर का खिताब जीतने वाली पहली भारतीय जोड़ी बनी थी। इसके अलावा, ज्वाला ने 2014 में नई दिल्ली में आयोजित थॉमस एंड उबर कप में भारत की ऐतिहासिक कांस्य पदक जीत में भी अहम भूमिका निभाई। 2017 में अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन को अलविदा कहने वाली ज्वाला गुट्टा को उनकी शानदार उपलब्धियों के लिए भारत सरकार अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित कर चुकी है।

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