हाफ मैराथन पूरी कर लौटे 65 वर्षीय धावक, चार घंटे बाद हार्ट अटैक ने ली जान

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नई दिल्ली : महाराष्ट्र के सतारा में रविवार, 6 सितंबर 2026 को आयोजित हाफ मैराथन के दौरान एक दर्दनाक घटना सामने आई। पुणे के 65 वर्षीय पूर्व वैज्ञानिक संजय कदम ने 21.1 किलोमीटर की हाफ मैराथन पूरी की, लेकिन दौड़ खत्म करने के करीब चार घंटे बाद उन्हें दिल का दौरा पड़ा और उनकी मौत हो गई। इस घटना से आयोजन से जुड़े लोगों और साथी धावकों में शोक की लहर दौड़ गई।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ‘सतारा हिल हाफ मैराथन’ को पश्चिमी घाट की खड़ी चढ़ाई और तेज ढलानों के कारण देश की सबसे चुनौतीपूर्ण दौड़ों में से एक माना जाता है। पहली बार इस दौड़ में हिस्सा ले रहे संजय कदम को रेस के दौरान नीचे की ओर आते समय बेचैनी महसूस हुई थी। मौके पर मौजूद एक हृदय रोग विशेषज्ञ ने उन्हें तुरंत सीपीआर दिया, जिसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल में एंजियोप्लास्टी की गई और इसके बाद उनकी हालत स्थिर बताई गई थी।

दौड़ के दौरान अचानक बिगड़ी हालत

सतारा हिल हाफ मैराथन में करीब 7,700 धावकों ने 21.1 किलोमीटर की दौड़ पूरी की। आयोजकों के अनुसार, पहली बार इस दौड़ में हिस्सा ले रहे 65 वर्षीय संजय कदम को सुबह करीब साढ़े नौ से 10 बजे के बीच नीचे की ओर आते समय बेचैनी महसूस हुई। इसके बाद मौके पर मौजूद चिकित्सा टीम ने तुरंत उनकी मदद की और उन्हें उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार आयोजन समिति के अध्यक्ष उपेंद्र पंडित ने बताया, “संजय कदम के साथ दौड़ रहे मिरज के हृदय रोग विशेषज्ञ रियाज मुजावर समेत अन्य धावकों ने तुरंत उनकी मदद की। रियाज मुजावर ने मौके पर ही उन्हें कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) दिया। रास्ते में तैनात कार्डियक एंबुलेंस भी तुरंत मौके पर पहुंच गई। मेडिकल टीम ने उन्हें आपात उपचार दिया और सीपीआर जारी रखते हुए पल्स अस्पताल ले जाया गया।”

एंजियोग्राफी में बंद मिली मुख्य धमनी

अस्पताल पहुंचने के बाद डॉक्टरों ने संजय कदम की एंजियोग्राफी की, जिसमें उनके दिल की एक मुख्य धमनी पूरी तरह बंद मिली। इसके बाद डॉक्टरों ने एंजियोप्लास्टी कर धमनी में स्टेंट डाला। उपचार के बाद उनकी हालत में सुधार हुआ और वह स्थिर हो गए थे। हालांकि, करीब चार घंटे बाद उन्हें दोबारा दिल का दौरा पड़ा और उनका निधन हो गया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार आयोजन समिति के अध्यक्ष उपेंद्र पंडित ने बताया कि अस्पताल में शुरुआती उपचार के बाद उनकी स्थिति स्थिर थी, लेकिन बाद में अचानक उनकी हालत बिगड़ गई।

संजय कदम सी-डैक में वैज्ञानिक रह चुके थे

आयोजकों के अनुसार, संजय कदम सेवानिवृत्त वैज्ञानिक थे और उन्होंने सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (सी-डैक) में काम किया था। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार आयोजकों ने बताया कि प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाले धावकों की मेडिकल जानकारी पंजीकरण के दौरान ही जुटा ली जाती है।

इस साल प्रत्येक पंजीकृत धावक को मेडिकल पहचान टैग भी दिया गया था, जिसमें उसकी जरूरी स्वास्थ्य संबंधी जानकारी दर्ज थी। इसका उद्देश्य आपात स्थिति के दौरान धावक की पहचान और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी तुरंत उपलब्ध कराकर उसे समय पर चिकित्सा सहायता दिलाना था। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार आयोजकों के मुताबिक, प्रतियोगिता के दौरान करीब 80 प्रतिशत प्रतिभागियों ने ये मेडिकल टैग पहने हुए थे।

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