नई दिल्ली : एशियन गेम्स 2026 में भारतीय पुरुष बैडमिंटन टीम ने कांस्य पदक अपने नाम किया। टीम इवेंट में भारत का यह लगातार दूसरा एशियन गेम्स पदक है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पदक जीतने के बाद खिलाड़ियों ने खुशी जताते हुए कहा कि एशियन गेम्स में पदक हासिल करना आसान नहीं होता, क्योंकि इस प्रतियोगिता में एशिया की लगभग सभी मजबूत टीमें हिस्सा लेती हैं। भारतीय टीम के सदस्यों ने कांस्य पदक जीतने पर संतोष जताया और अब व्यक्तिगत स्पर्धाओं में भी बेहतर प्रदर्शन करने पर ध्यान केंद्रित करने की बात कही।
एशियन गेम्स में मेडल जीतना बड़ी चुनौती: प्रणय
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार स्टार शटलर एचएस प्रणय ने कहा कि लगातार दो एशियन गेम्स में पदक जीतना टीम की निरंतरता को दिखाता है। उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि दो एशियन गेम्स में लगातार दो मेडल जीतना कभी आसान नहीं होता। हमने पहले कभी टीम इवेंट में कोई एशियन गेम्स मेडल नहीं जीता था, लेकिन पिछली बार 2023 एशियन गेम्स में आकर सिल्वर मेडल जीतना बहुत बड़ी बात थी। कुछ बड़ी टीमों को हराना और एक बार फिर उस पोडियम पर पहुंचना, मुझे लगता है, बड़े इवेंट्स में, खासकर टीम इवेंट्स में खेलने के लिए इस टीम की निरंतरता को दिखाता है।’
प्रणय ने एशियन गेम्स के स्तर को बेहद ऊंचा बताया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा, ‘मुझे सच में गर्व और खुशी है कि मैं एक बार फिर इसका हिस्सा बन सका। मुझे उम्मीद है कि आगे भी हम मेडल जीतते रहेंगे, खासकर टीम इवेंट्स में। हमारे लिए एशियन गेम्स सच में एक मुश्किल इवेंट है। यह लगभग वर्ल्ड चैंपियनशिप जैसा है, जहां बस कुछ खिलाड़ी या शायद कुछ देश यूरोपीय पक्ष से नहीं खेल रहे हैं। एशिया के सभी मजबूत देश एशियन गेम्स के लिए आते हैं।’
‘कांस्य पदक पर गर्व है’, प्रणय ने बताया टीम का अनुभव
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार आयुष शेट्टी ने कहा कि टीम इससे आगे जाना चाहती थी, लेकिन कांस्य पदक को भी सम्मान के साथ स्वीकार करना होगा। उन्होंने कहा, ‘यह टीम का बहुत अच्छा प्रयास था। निश्चित रूप से हम और आगे जाना चाहते थे, लेकिन हमें ब्रॉन्ज मेडल पर गर्व करना होगा। हम अपनी गलतियों से सीखते हुए आगे कड़ी मेहनत करेंगे और बेहतर करने का प्रयास करेंगे। हम व्यक्तिगत स्पर्धा में श्रेष्ठ प्रदर्शन की कोशिश करेंगे।’ मीडिया रिपोर्ट के अनुसार टीम के साथ खेलने के अनुभव पर आयुष ने कहा, ‘टीम के साथ खेलना हमेशा रोमांचक रहा है। आपको हमेशा टीम का समर्थन मिलता है। साथी खिलाड़ी हमेशा बेहतर करने की प्रेरणा देते हैं। इसलिए टीम के साथ होना शानदार होता है। हम कोर्ट के बाहर भी मस्ती करते हैं।’
पहली बार एशियाड टीम में शामिल हुए हरिहरन
हरिहरन अम्साकारुनन के लिए यह पहला एशियन गेम्स था। कांस्य पदक जीतने के बाद उन्होंने खुशी जताई। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा, ‘मैं एशियन गेम्स की टीम का हिस्सा बनकर बहुत खुश हूं। यह मेरा पहला एशियन गेम्स है। मुझे लगता है कि यह टीम सच में बहुत अच्छी टीम थी। मैं टीम का हिस्सा बनकर बहुत खुश हूं। हमने अपनी पूरी कोशिश की। यह एशियन गेम्स का एक प्रतिष्ठित इवेंट है। हमने ब्रॉन्ज जीता। मैं अपने देश के लिए यह जीतकर बहुत खुश हूं।’
सफलता का श्रेय साथियों और कोच को: हरिहरन
थारुन मन्नेपल्ली ने कांस्य पदक को अपने लिए खास पल बताया और टीम के साथियों, कोच तथा सपोर्ट स्टाफ का आभार जताया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा, ‘सबसे पहले, मैं अपने सभी साथियों को धन्यवाद देना चाहता हूं, जो इस सफर का हिस्सा रहे हैं। ब्रॉन्ज मेडल जीतना मेरे लिए बहुत खास पल है। एक टीम के तौर पर भारत के लिए मेडल जीतना बहुत मायने रखता है। हम एक टीम के तौर पर एक साथ खड़े रहे, एक साथ लड़े और टीम इवेंट में मेडल हासिल किया। मैं अपनी टीम के साथियों, कोच और सपोर्ट स्टाफ को धन्यवाद देता हूं, जिन्होंने मेरा साथ दिया।’
कांस्य जीतने से बढ़ेगा हौसला, कोच ने जताई खुशी
भारतीय बैडमिंटन कोच आर. एम. वी. गुरुसाईदत्त ने कहा कि टीम के लिए यह पदक काफी महत्वपूर्ण है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा, ‘यह मेडल एक टीम के तौर पर हमारे लिए बहुत जरूरी है। इससे खिलाड़ियों को व्यक्तिगत इवेंट्स में मोमेंटम बनाए रखने का आत्मविश्वास मिलेगा। बैडमिंटन में एशियन गेम्स ओलंपिक्स जितने ही अच्छे हैं। इसलिए, मेडल जीतना हमेशा मुश्किल होता है। इसे लगातार करना सच में ऐतिहासिक है। लड़के तारीफ के काबिल हैं, जो इतने वर्षों से इतना अच्छा कर रहे हैं।’
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने आगे कहा, “मुझे लगता है कि पिछले 4 वर्षों से टीम के खिलाड़ी एक इकाई के तौर पर बहुत अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। खासकर थॉमस कप जीतना, वहां दोबारा पदक हासिल करना, इस साल कांस्य पदक जीतना और पिछले एशियन गेम्स में भी पदक अपने नाम करना टीम के अच्छे प्रदर्शन को दर्शाता है। इस बार हम चीन को हराने के बेहद करीब पहुंच गए थे।” भारतीय टीम अब व्यक्तिगत स्पर्धाओं पर ध्यान केंद्रित करेगी। खिलाड़ियों को उम्मीद है कि टीम इवेंट के अनुभव और कांस्य पदक से मिला आत्मविश्वास उन्हें आगे के मुकाबलों में बेहतर प्रदर्शन करने में मदद करेगा।


