नई दिल्ली : उत्तर प्रदेश के उन्नाव में 15 जनवरी 1993 को जन्मीं प्राची पांडेय ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की, सॉफ्टवेयर डेवलपर के रूप में काम किया और फिर एक ऐसा फैसला लिया, जिसने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार प्राची पांडेय ने न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारी से पैदा हुई शारीरिक चुनौतियों के बीच पैरा टेबल टेनिस को अपना पूरा समय देने का फैसला किया। यह आसान रास्ता नहीं था, लेकिन प्राची ने अपनी चुनौतियों को अपनी पहचान नहीं बनने दिया।
लगातार मेहनत और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन करने के इरादे के साथ वह आगे बढ़ती रहीं। अब जापान के आइची-नागोया में पैरा एशियन गेम्स 2026 में महिला एकल वर्ग-6 का कांस्य पदक जीतकर प्राची पांडेय ने करियर में एक ऐतिहासिक अध्याय जोड़ दिया है। एशियन पैरा गेम्स में पदार्पण करते हुए प्राची पांडेय ने इस स्पर्धा में भारत को पहला पदक दिलाया। विश्व रैंकिंग में 17वें स्थान पर काबिज प्राची पांडेय के लिए यह पदक सिर्फ अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में मिली सफलता नहीं, बल्कि उस सफर की उपलब्धि है, जिसमें उन्होंने पढ़ाई, पेशेवर करियर और शारीरिक चुनौतियों के बीच अपने खेल को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
सेमीफाइनल में प्राची पांडेय के सामने इराक की नजला अल-दय्येनी थीं। विश्व रैंकिंग में 5वें स्थान पर मौजूद नजला मौजूदा पैरालंपिक और एशियन पैरा गेम्स चैंपियन हैं। ऐसी मजबूत प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ सेमीफाइनल तक पहुंचना और महाद्वीपीय खेलों में पदक हासिल करना प्राची पांडेय की क्षमता और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी बढ़ती पहचान को दर्शाता है।
इंजीनियरिंग नहीं, खेल बना जीवन का लक्ष्य; प्राची पांडेय की प्रेरक उड़ान
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार प्राची पांडेय की कहानी की खास बात यह है कि उनका सफर पारंपरिक तरीके से खेल की दुनिया में दाखिल होने वाले खिलाड़ियों जैसा नहीं रहा। प्राची पांडेय ने चंडीगढ़ स्थित पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (PEC) से एमटेक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद वर्ष 2020 से 2023 तक फुल-स्टैक सॉफ्टवेयर डेवलपर के रूप में काम किया। एक पेशेवर करियर बनाने के बाद पैरा टेबल टेनिस को पूर्णकालिक रूप से अपनाने का उनका फैसला उनके खेल के प्रति समर्पण को दिखाता है।
प्राची पांडेय न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारी से जूझ रही हैं। इस बीमारी में मरीज के शरीर की कार्यक्षमता प्रभावित होती है। ऐसी स्थिति में किसी खेल में लगातार अभ्यास करना, अपनी तकनीक को निखारना और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार रहना अतिरिक्त चुनौतियां लेकर आता है।
हालांकि, प्राची पांडेय ने इन मुश्किलों के बावजूद अपने खेल को आगे बढ़ाया। पैरा टेबल टेनिस में महिला एकल वर्ग-6 में खेलने वाली प्राची पांडेय ने राष्ट्रीय स्तर से लेकर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक अपनी जगह बनाई। प्राची पांडेय का सफर इस बात का उदाहरण है कि किसी खिलाड़ी की पहचान केवल उसकी शारीरिक स्थिति या पेशेवर पृष्ठभूमि से तय नहीं होती, बल्कि अपने लक्ष्य के लिए किये गए प्रयास भी उसकी पहचान गढ़ते हैं।
राष्ट्रीय स्तर पर चमकीं, एशियाई पैरा खेलों में भी जीता पदक
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, प्राची पांडेय की उपलब्धियां किसी एक प्रतियोगिता तक सीमित नहीं हैं। प्राची पांडेय ने वर्ष 2022 और 2023 में राष्ट्रीय पैरा टेबल टेनिस चैंपियनशिप का महिला एकल खिताब जीता। लगातार दो वर्षों तक राष्ट्रीय चैंपियन बनना उनके खेल में निरंतरता और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता का प्रमाण था। दिसंबर 2023 में आयोजित पहले खेलो इंडिया पैरा गेम्स में प्राची पांडेय ने स्वर्ण पदक जीता। वर्ष 2025 के खेलो इंडिया पैरा गेम्स में भी प्राची पांडेय ने स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इन सफलताओं ने राष्ट्रीय स्तर पर उनकी स्थिति मजबूत की और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन की उनकी कोशिशों को आगे बढ़ाया।
अंतरराष्ट्रीय टेबल टेनिस महासंघ (ITTF) के टूर्नामेंटों में भी प्राची पांडेय ने लगातार पदक जीते। वर्ष 2023 में ब्राजील पैरा ओपन में प्राची पांडेय ने अपना पहला ITTF पदक हासिल किया। इसके बाद प्राची पांडेय ने विभिन्न अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। प्राची पांडेय ने वर्ष 2025 में ITTF वर्ल्ड पैरा चैलेंजर काऊशुंग और ITTF वर्ल्ड पैरा फ्यूचर कोस्टा ब्रावा में कांस्य पदक जीते। वर्ष 2026 में ITTF वर्ल्ड पैरा फ्यूचर गोल्ड कोस्ट में रजत और ITTF वर्ल्ड पैरा फ्यूचर नखोन रत्चासिमा में कांस्य पदक हासिल किया। अब तक वह ITTF रैंकिंग टूर्नामेंटों में चार रजत और आठ कांस्य सहित कुल 12 पदक जीत चुकी हैं।
इन आंकड़ों के पीछे एक खिलाड़ी का लगातार खुद को बेहतर बनाने का प्रयास दिखाई देता है। राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में खिताब जीतने से लेकर अंतरराष्ट्रीय सर्किट में नियमित रूप से पदक हासिल करने तक, प्राची पांडेय ने धीरे-धीरे अपनी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को साबित किया है। पैरा एशियन गेम्स का कांस्य पदक इसी सफर की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
विश्व चैंपियन से मुकाबले के मंच तक पहुंचीं प्राची पांडेय
पैरा एशियन गेम्स जैसे बड़े मंच पर पदक जीतना किसी भी खिलाड़ी के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। प्राची पांडेय के मामले में इसकी अहमियत इसलिए भी बढ़ जाती है, क्योंकि प्राची पांडेय ने अपने पदार्पण में ही भारत को महिला एकल वर्ग-6 में पहला पदक दिलाया। सेमीफाइनल में प्राची पांडेय का सामना नजला अल-दय्येनी जैसी अनुभवी खिलाड़ी से हुआ। नजला विश्व रैंकिंग में उनसे काफी आगे हैं। इस मुकाबले ने प्राची पांडेय को महाद्वीपीय स्तर की शीर्ष खिलाड़ियों के सामने अपनी क्षमता दिखाने का अवसर दिया।
वह भले ही स्वर्ण पदक तक नहीं पहुंच पाईं, लेकिन कांस्य के साथ उनकी उपलब्धि भारतीय पैरा टेबल टेनिस के लिए नया अध्याय बन गई। इस सफलता को केवल पदक के नजरिये से देखना प्राची पांडेय के सफर की पूरी तस्वीर नहीं होगी। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इंजीनियरिंग की पढ़ाई, सॉफ्टवेयर डेवलपर के रूप में काम और फिर खेल को पूर्णकालिक रूप से अपनाना उनके जीवन के ऐसे पड़ाव हैं, जो इस उपलब्धि को और खास बनाते हैं। उन्होंने अपने लिए एक नया रास्ता चुना और उस पर आगे बढ़ते हुए अंतरराष्ट्रीय खेल मंच तक पहुंचीं।
बेहतर प्रशिक्षण और सहयोग से प्राची पांडेय ने भरी सफलता की उड़ान
किसी खिलाड़ी की व्यक्तिगत मेहनत उसकी सफलता का अहम हिस्सा होती है, लेकिन बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचने में प्रशिक्षण, प्रतियोगिताओं के अवसर और संस्थागत सहयोग भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। प्राची पांडेय भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) के गांधीनगर स्थित नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (NCoE) और खेलो इंडिया कार्यक्रम से जुड़ी हैं। उन्हें केंद्र में प्रशिक्षण और आवास की सुविधाओं के साथ प्रतियोगिताओं की तैयारी के लिए सहायता मिलती है। उनकी अंतरराष्ट्रीय तैयारियों के लिए प्रशिक्षण एवं प्रतियोगिता के वार्षिक कैलेंडर (ACTC) के तहत भी वित्तीय सहायता प्रदान की गई। खिलाड़ी की उपलब्ध प्रोफाइल के अनुसार, एशियन पैरा गेम्स 2026 चक्र के दौरान इस मद में 26 लाख 86 हजार 99 रुपये की सहायता दी गई।


