नई दिल्ली : वैभव सूर्यवंशी के अंतरराष्ट्रीय डेब्यू को लेकर जितना उत्साह और चर्चा देखने को मिली थी, वह अब धीरे-धीरे कम होती नजर आ रही है। डेब्यू के बाद अब तक उन्हें दो पारियों में बल्लेबाजी का मौका मिला है, लेकिन वह बड़ी पारी खेलने में सफल नहीं हो सके हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार हालांकि, सिर्फ दो पारियों के आधार पर किसी खिलाड़ी की क्षमता पर सवाल उठाना उचित नहीं होगा। फिर भी यह चर्चा जरूर शुरू हो गई है कि इंडियन प्रीमियर लीग में अपने आक्रामक अंदाज से रन बरसाने वाले वैभव का वही विस्फोटक खेल इंग्लैंड दौरे पर अब तक क्यों नहीं दिख पाया है।
कहां खो गया आईपीएल वाला विस्फोटक अंदाज?
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार कुछ ही समय पहले इंडियन प्रीमियर लीग के दौरान वैभव सूर्यवंशी लगभग हर मुकाबले में आक्रामक बल्लेबाजी करते नजर आए थे। वह शुरुआती गेंद से ही गेंदबाजों पर दबाव बनाने की कोशिश करते थे और उनका यह अंदाज लगातार सफल भी रहा। हालांकि, इंग्लैंड के खिलाफ मौजूदा टी20 सीरीज में उन्होंने उसी शैली में बल्लेबाजी करने का प्रयास किया, लेकिन अब तक उन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी है। इसकी सबसे बड़ी वजह परिस्थितियों का अंतर माना जा रहा है। आईपीएल में उन्हें अधिकांश मैचों में बल्लेबाजी के लिए सपाट और बल्लेबाजों के अनुकूल पिचें मिलीं, जहां उनके आक्रामक शॉट आसानी से सफल रहे। इसके विपरीत इंग्लैंड की पिचों पर अतिरिक्त उछाल, सीम मूवमेंट और तेज गेंदबाजों को मिलने वाली मदद के कारण उसी रणनीति को अपनाना उनके लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है।
स्विंग और सीम मूवमेंट ने बढ़ाई वैभव की मुश्किलें
पूरी दुनिया जानती है कि इंग्लैंड में पिचें काफी अलग होती हैं। हर बल्लेबाज की यहां परीक्षा होती है। यहां बॉल स्विंग करती है और गेंदबाज को सीम मूवमेंट भी मिलती है। जब भी बल्लेबाज के लिए ऑफ स्टंप के बाहर गेंद आती है, तभी उसका असल इम्तिहान होता है। तभी पता चलता है कि बल्लेबाज तकनीकी रूप से कितना तैयार हुआ है या फिर केवल लप्पेबाजी हो रही है। अंग्रेज गेंदबाज अलग अलग तरीके वैभव को टेस्ट कर रहे हैं। कुछ एक बार बॉल उनके पाले में आ जाती है तो उसे वे सिक्स के लिए भेज देते हैं, लेकिन जैसे ही वैभव चूकते हैं तो फिर आउट हो जाते हैं।
वैभव के खेल को पहले ही पढ़ चुका था इंग्लैंड
बड़ी और अहम बात ये भी है कि अब इंग्लैंड के पास वैभव की बल्लेबाजी का अच्छा खासा डेटा मौजूद है। उसके वीडियो देखकर वे अब पता लगा चुके हैं कि उनकी कहां कमजोरी है और कहां वे मजबूत हैं। इसको देखकर इंग्लैंड ने अच्छी रणनीति उनके खिलाफ तैयार की है, जो अभी तक काम कर रही लगती है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इंग्लिश गेंदबाज उन्हें फंसाने में कामयाब हो जा रहे हैं। अक्सर आपने देखा होगा कि वैभव को शॉर्ट बॉल या फिर चौथे पांचवें स्टंप की लाइन में स्विंग से परीक्षा ली जा रही है। वैभव के बारे में सबको पता है कि वे रुककर नहीं खेलेंगे। वे आते ही हमला करते हैं, इसकी तैयारी अंग्रेज गेंदबाजों ने अच्छी तरह से की है।
शुरुआती धैर्य ही वैभव सूर्यवंशी की सफलता की कुंजी
इससे पहले जब भी इंग्लैंड ने कोई बल्लेबाज कामयाब हुआ है तो तकनीक यही है कि शुरुआती कुछ गेंदों को संभल कर खेल जाए, ताकि पिच और बॉल के बारे में अच्छी तरह से समझ लिया जाए। इसके बाद जब पूरी बात पता चल जाए, फिर आसानी से रन बनाए जा सकते हैं। हर बॉल पर अगर बाउंड्री की कोशिश की जाएगी तो ये रणनीति यहां काम नहीं करेगी। वैभव अभी केवल 15 साल के हैं। ऐसे में उनके पास अनुभव की भी कमी है। हालांकि उनके पास अभी काफी वक्त है और वे सोच समझ कर खेलेंगे तो जल्द ही वे यहां भी रन बना सकते हैं, लेकिन इसके लिए धैर्य की जरूरत होगी।
तेजी से रन बनाने की जल्दबाजी पड़ रही वैभव पर भारी
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, वैभव सूर्यवंशी ने अपने पहले टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में 10 गेंदों का सामना करते हुए 14 रन बनाए, जिसमें दो छक्के शामिल थे। उनका स्ट्राइक रेट 140 का रहा, लेकिन वह अपनी पारी को बड़ी स्कोर में नहीं बदल सके। दूसरे मैच में उन्होंने सिर्फ 5 गेंदों पर 13 रन बनाए, जिसमें दो छक्के लगाए और उनका स्ट्राइक रेट 260 का रहा। हालांकि, दोनों पारियों में तेज शुरुआत के बावजूद वह लंबे समय तक क्रीज पर नहीं टिक पाए। अब तक वैभव के बल्ले से चार छक्के निकले हैं, जबकि एक भी चौका नहीं आया है। इसके अलावा उन्होंने दौड़कर भी बहुत कम रन जुटाए हैं, जिससे साफ है कि वह शुरुआती ओवरों में बड़े शॉट खेलने की जल्दबाजी में अपनी पारी को आगे नहीं बढ़ा पा रहे हैं।


