खेलों की गरिमा बचाने को सरकार का बड़ा कदम, डोपिंग पर सख्त कानून

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नई दिल्ली : भारत को वैश्विक खेल जगत में एक ‘क्लीन सुपरपावर’ बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाने की तैयारी की है। खेलों में तेजी से फैल रहे डोपिंग नेटवर्क पर लगाम लगाने के लिए सरकार नेशनल एंटी-डोपिंग एक्ट में सख्त आपराधिक प्रावधान जोड़ने पर काम कर रही है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रस्तावित संशोधन का मकसद उन माफिया, सप्लायर्स और कोचों पर कानूनी शिकंजा कसना है, जो एथलीटों का शोषण कर खेलों की गरिमा को नुकसान पहुंचा रहे हैं। खास बात यह है कि इस कानून का निशाना खिलाड़ी या उनका इलाज करने वाले डॉक्टर नहीं होंगे, बल्कि पर्दे के पीछे सक्रिय संगठित गिरोहों पर कार्रवाई की जाएगी।

मतलब खेलों में डोपिंग अब सिर्फ नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि गंभीर अपराध होगा। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि डोप टेस्ट में पॉजिटिव पाए जाने वाले एथलीटों को अपराधी नहीं माना जाएगा। उन पर खेल नियमों के तहत ही कार्रवाई होगी। युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय ने डोपिंग गतिविधियों को अपराध की श्रेणी में लाने से जुड़े प्रस्तावित संशोधनों का मसौदा सार्वजनिक परामर्श और सुझावों के लिए जारी किया है। मंत्रालय ने सभी हितधारकों से 18 जून 2026 तक अपने सुझाव और टिप्पणियां भेजने को कहा है।

प्रस्तावित ढांचे का उद्देश्य डोपिंग से जुड़े उस संगठित गिरोह पर कार्रवाई करना है, जो प्रतिबंधित प्रदर्शन बढ़ाने वाले पदार्थों और तरीकों की तस्करी, अवैध आपूर्ति, प्रशासन और व्यावसायिक वितरण में शामिल है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सरकार का मानना है कि खेलों में डोपिंग अब केवल व्यक्तिगत स्तर की समस्या नहीं रह गई है, बल्कि इसके पीछे संगठित गिरोह और व्यावसायिक नेटवर्क सक्रिय हैं। मौजूदा एंटी-डोपिंग ढांचा केवल निलंबन, अयोग्यता या मेडल वापस लेने जैसे खेल प्रतिबंधों तक ही सीमित है। भारत में प्रतिबंधित दवाओं की तस्करी और उनके अवैध वितरण को रोकने के लिए अब तक कोई अलग से कानून नहीं था। डोपिंग अब सिर्फ नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि एक संगठित अपराध बन चुका है, जिसे रोकने के लिए ये बदलाव बेहद जरूरी हैं।

इन गतिविधियों को ‘अपराध’ घोषित करने का प्रस्ताव

तस्करी और बिक्री: प्रतिबंधित पदार्थों और तरीकों की अवैध तस्करी, बिक्री और वितरण पर पूरी रोक।
दवाएं देना: खिलाड़ियों को डोपिंग के उद्देश्य से प्रतिबंधित दवाएं देना या इस्तेमाल कराना।
नाबालिगों को आपूर्ति: नाबालिग (माइनर) एथलीटों को प्रतिबंधित दवाओं की आपूर्ति करना।
संगठित सिंडिकेट: डोपिंग से जुड़े संगठित आपराधिक और व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करना।
लेबलिंग और विज्ञापन: बिना निर्धारित लेबलिंग के इन दवाओं को बेचना और डोपिंग को बढ़ावा देने वाले विज्ञापनों या पेड प्रमोशन पर रोक।

खिलाड़ियों और डॉक्टरों के लिए सुरक्षा कवच तैयार

खिलाड़ियों को जेल नहीं: केवल डोपिंग टेस्ट में पॉजिटिव आने या नियम उल्लंघन पर खिलाड़ियों को अपराधी नहीं माना जाएगा। उन पर मौजूदा खेल नियमों के तहत ही कार्रवाई होगी। यह कानून केवल सप्लायर्स, कोच, सपोर्ट स्टाफ और अवैध सिंडिकेट्स को निशाना बनाएगा।
नाबालिगों की सुरक्षा: बच्चों और उभरते खिलाड़ियों को शोषण से बचाने के लिए सख्त सजा का प्रावधान है, खासकर जहां संगठित अपराध शामिल हो।
मेडिकल छूट: जिन खिलाड़ियों के पास वैध ‘थेराप्यूटिक यूज एक्सेम्पशन’ (TUEs) हैं, वे सुरक्षित रहेंगे। आपातकालीन स्थिति में इलाज करने वाले डॉक्टरों को भी पूरी सुरक्षा मिलेगी।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसा रसरकार यह प्रस्तावित ढांचा खेलों में डोपिंग के खिलाफ भारत की अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं के अनुरूप है। यह यूनेस्को के खेलों में डोपिंग विरोधी कन्वेंशन और वर्ल्ड एंटी डोपिंग एजेंसी के दृष्टिकोण के साथ भी मेल खाता है। खेल मंत्रालय का कहना है कि प्रस्तावित संशोधनों का उद्देश्य खिलाड़ियों की सुरक्षा, खेलों की निष्पक्षता, सार्वजनिक स्वास्थ्य और प्रभावी कानून प्रवर्तन के बीच संतुलन बनाए रखना है।

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