पूरा देश साथ था और टीम इंडिया ने नरेंद्र मोदी स्टेडियम में तिरंगा फहराया
नई दिल्ली : सबसे पहले तो पूरे देश को भारत की टी20 विश्व कप में जीत की बधाई। अहमदाबाद में फ़ाइनल शुरू होने से पहले सब तरह की बातें चर्चा में थीं: भारत ने कभी इतवार के दिन वाला फाइनल नहीं जीता, भारत ने कभी लगातार दो विश्व कप नहीं जीते, भारत ने कभी भी टी20 विश्व कप में न्यूजीलैंड को नहीं हराया, नरेंद्र मोदी स्टेडियम भारत के लिए भाग्यशाली नहीं रहा है और ऐसी सभी सोच की 8 मार्च 2026 को धज्जियां उड़ गईं।
दोनों टीम इस बड़े फ़ाइनल के लिए तैयार थीं पर टॉस जीतकर न्यूज़ीलैंड ने भारत को पहले बल्लेबाजी के लिए कहते हुए शायद ये रिकॉर्ड ध्यान में नहीं रखा कि इस टी20 विश्व कप में भारत एक भी ऐसा मैच नहीं हारा था जब पहले बल्लेबाजी की (सभी 6 जीते)। शायद न्यूज़ीलैंड ने इस टी20 विश्व कप में लक्ष्य का पीछा करते हुए एक भी मैच न हारने के अपने रिकॉर्ड को देखा (4 जीते और एक में कोई स्पष्ट नतीजा नहीं निकला) पर इस बार न्यूज़ीलैंड के लिए 256 का लक्ष्य बहुत ज़्यादा साबित हुआ। इसे पार करना नामुमकिन नहीं है लेकिन मालूम था कि आसान नहीं है। वहीं से ट्रॉफी पर भारत का कब्जा शुरु हो गया था।
‘बिग 3’ से बाहर के देश इसे एक नई चुनौती समझें
जो आज क्रिकेट पर भारत के बढ़ते प्रभुत्व को हजम नहीं कर पा रहे उन्हें एक और वजह मिल गई। किसी भी ‘बिग 3’ से बाहर के देश के विश्व कप न जीतने का सिलसिला और लंबा हो गया। सब बात तो करते हैं कि ‘बिग 3’ का प्रभुत्व बढ़ता जा रहा है पर रिकॉर्ड भी तो यही साबित करता है। किसी गैर ‘बिग 3’ ने 10 साल पहले विश्व कप जीता था (वेस्टइंडीज ने)।
टीम के खिलाड़ी तो बधाई के हकदार हैं ही। किस-किस का नाम लिखें? हर एक ने अपनी भूमिका को बखूबी निभाया और इसमें संजू सैमसन एवं अभिषेक शर्मा का ख़ास जिक्र इसलिए कि इन दोनों में टीम ने जो विश्वास दिखाया, दोनों ने उस विश्वास को सही साबित किया।
इस जीत में टीम के साथ-साथ चयनकर्ता भी बधाई के हकदार हैं जिन्होंने सिर्फ़ योग्यता के आधार पर सबसे अच्छी टीम चुनी। अब तो ये बहस शुरू होगी कि क्या ये भारत की सर्वकालिक सबसे बेहतर टी20 अंतरराष्ट्रीय टीम है? टीम में हर खिलाड़ी सिर्फ़ क्रिकेट की योग्यता के आधार पर चुना था और उसने अपनी भूमिका बखूबी निभाई।
अहमदाबाद ने हर भ्रम को गलत साबित किया
सूर्यकुमार यादव की टीम के पास इतिहास रचने का मौका था और पिछले चैंपियन के तौर पर खेलते हुए खिताब पर अधिकार का एक और रिकॉर्ड बना दिया। अहमदाबाद शहर का नाम भारत की क्रिकेट में कामयाबी के साथ भी जुड़ गया। 2030 के कॉमनवेल्थ गेम्स का मेजबान है ये शहर और साथ ही 2036 में ओलंपिक में शुरूआत का भी सपना देख रहा है। | ये वही जमीं हैं जहां सुनील गावस्कर ने 1987 में पाकिस्तानी स्पिनर एजाज फकीह की गेंद पर लेट कट लगाकर 10,000 टेस्ट रन बनाने वाले पहले खिलाड़ी का रिकॉर्ड बनाया था। 1994 में, यहीं कपिल देव टेस्ट में सबसे ज़्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज़ बने। ये उपलब्धियां व्यक्तिगत थीं और इसीलिए एक बड़ी, टीम की कामयाबी की तलाश थी। अब इस शहर ने मेन इन ब्लू टीम की 2023 विश्व कप फाइनल में ऑस्ट्रेलिया से हार का हिसाब बराबर कर दिया।
न्यूजीलैंड के विरुद्ध जीत का महत्व कम न आंकें
ऐसा नहीं कि सामने वाली टीम न्यूज़ीलैंड कोई कमजोर थी। साथ में ब्लैक कैप्स अक्सर क्रिकेट के सबसे बड़े मंच पर भारत को हराते आ रहे थे: चाहे वह मैनचेस्टर में 2019 विश्व कप सेमीफाइनल हो या साउथेम्प्टन में 2021 आईसीसी विश्व टेस्ट चैंपियनशिप फ़ाइनल, न्यूजीलैंड ने भारत की उम्मीदों पर पानी फेरने में कोई कसर नहीं रखी थी। इस बार बहरहाल भारत ने हर हिसाब बराबर कर दिया।
9 मार्च 2025 को भारत ने चैंपियंस ट्रॉफी फाइनल में न्यूजीलैंड को हराया था और उसके ठीक एक साल बाद, 8 मार्च 2026 को, यही दोनों टीम 2026 टी20 विश्व कप फाइनल में खेल रही थीं। मजे की बात ये है कि न्यूजीलैंड ने जब चैंपियंस ट्रॉफी 2000 और वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप 2021 जीती तो वे भारत से ही जीते थे।
वे ‘वापसी’ की बेहतरीन मिसाल हैं। 2024 टी20 विश्व कप में ग्रुप राउंड में बाहर हुई टीम दो साल के अंदर यानि कि 2026 टी20 विश्व कप में फाइनल खेली। आज क्रिकेट में उनके पास भारतीय क्रिकेट बोर्ड जैसा न तो रूतबा है, न उतना पैसा है, प्रायोजक उनके साथ जुड़ने के लिए लाइन नहीं लगाते, आईसीसी से उन्हें भारत की तुलना में बहुत कम हिस्सा मिलता है, देश की आबादी बहुत कम और अभी तक अपनी कोई बड़ी टी20 लीग न शुरु कर पाए, तब भी वे सबसे अच्छी तरह चलने वाला क्रिकेट बोर्ड हैं। सबूत ये कि आईसीसी आयोजनों में लगातार बेहतर खेल रहे हैं, अच्छे खिलाड़ी तैयार कर रहे हैं और अक्सर आईसीसी फाइनल में पहुंच रहे हैं। जब प्रदर्शन और क्रिकेट ढांचे की बात करें तो न्यूजीलैंड क्रिकेट, ‘बिग 3’ से बाहर होने के बावजूद एक बिलकुल सही मॉडल है।
विश्व कप शुरू होने से पहले, न्यूजीलैंड ही वह टीम थी जो टी20 की श्रृंखला खेलने भारत आई थी और फ़ाइनल तक उन्हें भारतीय परिस्थितियों में खेलने की उन्हें आदत हो चली है। उस टी20 श्रृंखला में खेलने से उन्हें साफ़ तौर पर फ़ायदा हुआ। 
भारत का रिकॉर्ड, भारत की शान
इस टी20 विश्व कप जीत के साथ भारत अब आईसीसी ट्रॉफियों की लिस्ट में : महिला अंडर-19 विश्व कप, अंडर-19 विश्व कप, महिला विश्व कप, चैंपियंस ट्रॉफी और टी20 विश्व कप का विजेता है। जिन्हें इस रिकॉर्ड से जलन है, वे जलते रहें। अगला टी20 विश्व कप भारत में नहीं होगा पर एक बार फिर, अभी से लिख लें, भारत ही फेवरिट होगा।
फ़ाइनल में, किसी भी विश्व कप फाइनल में गेंदबाजी का इस तरह का कत्लेआम कई साल बाद देखने को मिला। 2003 का विश्व कप फाइनल भी ऐसा ही था। यह बहरहाल भारतीय क्रिकेट के लिए एक शानदार दिन था। पहले कभी किसी टी20 टीम को पहले 10-11 ओवर में ऐसे बल्लेबाजी करते नहीं देखा जैसे कि वे पारी के आखिरी पांच ओवर खेल रहे हों: 14 छक्के और 14 चौके। 
टी20 विश्व कप 2026 में जीत के बाद भारत क्रिकेट के सर्वोच्च शिखर पर अकेला खड़ा है। टीम इंडिया का रिकॉर्ड आप खुद देखिए:
- तीन टी20 विश्व कप खिताब जीतने वाली पहली टीम बनी। यह सिर्फ़ दबदबा नहीं है। यह मालिकाना हक है।
- टी20 विश्व कप खिताब बचाने वाली पहली टीम बनी। 2024 में खिताब जीता और खिताब जीतने का सूखा खत्म किया। 2026 में दावेदार के तौर पर लौटे और उम्मीदों के बोझ, मुश्किलों का सामना करने के बोझ और दुनिया के सबसे अस्थिर फॉर्मेट में खुद को दोहराने के दबाव के साथ लौटे। फिर इसे जीत भी लिया।
- पहले मेजबान जो टी20 विश्व कप जीते।
- सबसे ज़्यादा आईसीसी खिताब जीतने का रिकॉर्ड। इस खिताब के साथ, भारत अब पुरुषों के सीनियर और अंडर-19 आयोजन में 14 आईसीसी ट्रॉफी जीत चुका है (ऑस्ट्रेलिया 13 अब नंबर 2) और वेस्टइंडीज (6) से तो बहुत ही आगे।
- सबसे ज़्यादा पुरुष टी20 विश्व कप फाइनल खेले। ये इस आयोजन में भारत का चौथा फ़ाइनल था। कोई दूसरी टीम इतनी बार फ़ाइनल नहीं खेली है। 2007 में पहले खिताब से लेकर 2014 के फ़ाइनल तक, 2024 में जीत और अब 2026 का ताज, भारत का प्रभुत्व सभी के सामने है। * पुरुष टी20 विश्व कप फाइनल में सबसे बड़ा योग। न्यूजीलैंड के विरुद्ध भारत का 255/5 का स्कोर इस टूर्नामेंट के फ़ाइनल में अब तक का सबसे बड़ा स्कोर है।
ये रिकॉर्ड सिर्फ एक चैंपियन का बायोडाटा नहीं है। यह एक ऐसी टीम का परिचय है जिसने खुद को क्रिकेट इतिहास में नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है।
कप्तान, सूर्यकुमार यादव ने अपनी विरासत की नई कहानी लिखी
ठीक है कि अभी तक कप्तान सूर्यकुमार यादव बैट के साथ उस फार्म में नहीं लौटे जिसके लिए वे मशहूर हैं। इस विश्व कप में 9 पारी में 242 रन बनाए और फाइनल में 0 पर आउट हुए। वे बेहतरीन टी20 बल्लेबाज तो हैं वे पर क्या कप्तान के तौर पर भी उन्हें इतनी ही तारीफ मिलती है? हर वक्त विराट कोहली और रोहित शर्मा की कप्तानी के तरीके से तुलना में, अपने लिए एक अलग पहचान बनाना सूर्या के लिए कभी आसान नहीं रहा है।
अब वक्त आ गया है कि उन्हें भी, उनकी कप्तानी के लिए पहचानें।
पाकिस्तानी कप्तान से हाथ मिलाने से इनकार को ‘युद्ध’ नहीं बनाया क्योंकि चेहरे पर मुस्कराहट ही रही। कभी सीधे अपने खिलाड़ियों पर आरोप नहीं लगाया। जीते मैच के प्रतिशत के हिसाब से भारत के सबसे सफल कप्तान पर उस बड़ी पहचान का इंतजार था जो उन्हें ‘महान’ कहने पर मजबूर कर दे। टी20 विश्व कप में जीत ने यही पहचान दी। इंग्लैंड के कप्तान ब्रूक का सेमीफाइनल में हार के बाद सूर्या के पैरों में झुकना, क्रिकेट में हमेशा चर्चा में रहेगा।
टी20 अंतरराष्ट्रीय में कप्तान के तौर पर सूर्या का रिकॉर्ड इतना बेहतर है कि वे किसी भी एक फॉर्मेट में 50 मैच के बाद कप्तान के तौर पर सबसे ज्यादा जीत हासिल करने वाले कप्तान बने। सूर्यकुमार यादव और असगर अफगान दोनों ने टी20 अंतरराष्ट्रीय में 50 मैच में से सबसे ज्यादा 40 जीत हासिल की थीं। विराट कोहली, रिकी पोंटिंग और क्लाइव लॉयड ने एकदिवसीय में जबकि रोहित शर्मा ने टी20 अंतरराष्ट्रीय में 39 जीत हासिल की हैं। 
लोकप्रियता के पैमाने पर नंबर 1 विश्व कप
जब से ये विश्व कप शुरु हुआ, रिकॉर्ड टूटते गए। अगर फ़ाइनल और उससे पहले भारत वाले सेमीफाइनल में डिजिटल व्यूअरशिप के विश्व रिकॉर्ड टूटे, देखने वालों की पीक डिजिटल कंसंट्रेशन के नए रिकॉर्ड बने तो आईसीसी के एसोशिएट सदस्य देशों की टीमों के मैचों में भी, भारत के क्रिकेट प्रेमियों ने जमकर रुचि ली।
सेमीफाइनल से पहले ही ये टी20 विश्व कप अब तक के सबसे कामयाब आईसीसी आयोजन में से एक साबित हो चुका था। इस आयोजन को देखने वालों की गिनती 50 करोड़ को पार कर गई और ये किसी भी टी20 विश्व कप में तो सबसे बड़ी गिनती है ही।
धार्मिक आस्था और अंधविश्वास की चर्चा भी चली
ऐसे बड़े मैच के मौके पर ख़बरों में धार्मिक आस्था और अंधविश्ववास का चर्चा में आना कोई हैरानी की बात नहीं। पूरे विश्व कप के दौरान, भारत के कई क्रिकेटरों के प्रार्थना के लिए मंदिर जाने की खबरें आती रहीं, मुंबई में ग्रहण के दौरान नेट प्रेक्टिस से बचने के लिए उसका समय ही बदल दिया और उसके बाद अहमदाबाद में फाइनल के लिए, न सिर्फ ठहरने के होटल में बदलाव हुआ (जहां 2023 एकदिवसीय विश्व कप फाइनल के दौरान ठहरे थे, उस होटल में नहीं रुके) तो स्टेडियम में टीम इंडिया ने ‘मेजबान टीम’ वाला ड्रेसिंग रूम भी न लिया।
सच ये है कि आईसीसी ने टूर्नामेंट शुरु होने से पहले ही तय कर लिया था कि अगर अहमदाबाद में फ़ाइनल खेले तो, फ़ाइनल के लिए क्वालीफाई करने वाली पहली टीम किस होटल में रुकेगी और दूसरी टीम किस होटल में रुकेगी। बहरहाल इस तरह के बदलाव अगर ‘नया विश्वास’ देते हैं तो ये अपनी सोच है।
सेमीफाइनल क्या खूब जीते
दोनों सेमीफाइनल गजब के थे। ईडन गार्डन्स में सेमीफाइनल में जिस तरह से न्यूजीलैंड ने दक्षिण अफ़्रीका को धूल चटाई, वह भारत के लिए भी एक बड़ी चुनौती थी। भारत के इंग्लैंड के विरुद्ध सेमीफाइनल की बात करें तो भारत को 253 रन बनाने के बावजूद सिर्फ 7 रन से जीत मिली जो इस बात का सबूत है कि कितना कांटे का मुकाबला हुआ। सेमीफाइनल में इंग्लैंड ने ऐसी टक्कर दी कि उनकी पारी में 20वां ओवर शुरू होने तक भी ये तय नहीं था कि अहमदाबाद में अगला मैच इन दोनों में से कौन सी टीम खेलेगी?
टी20 विश्व कप के नॉकआउट में 2025 तक एक भी 100 नहीं बना था और 2026 में दो 100 बन गए। चार हो गए होते अगर संजू सैमसन ने अपने 89 के दो स्कोर 100 में बदल दिए होते। इनमें से एक इंग्लैंड के जैकब बेथेल ने सेमीफाइनल में बनाया। इसी तरह प्लेयर ऑफ़ द टूर्नामेंट बनने के अपने दावे को विल जैक्स ने और मजबूती दी। बैट से, जैक्स ने 8 पारी में 226 रन 177+ स्ट्राइक रेट से बनाए जबकि 21.66 औसत से 9 विकेट लिए। इस विश्व कप में ये सबसे अच्छे ऑलराउंडर प्रदर्शन में से एक है। 4 मैन ऑफ द मैच अवॉर्ड भी जीते।
एक यादगार विश्व कप
जिन तनाव के साथ ये विश्व कप शुरू हुआ, कोई नहीं जानता था कि इन विवाद और तनाव का विश्व कप के आयोजन और होने वाले खेल पर क्या असर आएगा? विश्व कप शुरू होने से लगभग 10 दिन पहले तक ये तय नहीं था कि टूर्नामेंट में खेलने वाली आखिरी 20 टीम का नाम क्या है? बांग्लादेश ने विश्व कप को उलझाने में कोई कमी नहीं रखी और तारीफ़ होनी चाहिए स्कॉटलैंड की जो लगभग ‘बिना तैयारी’ उनकी जगह विश्व कप में शामिल हो गए और टूर्नामेंट को नया जीवनदान दिया।
पाकिस्तान के अपने सभी मैच श्रीलंका में खेलने के कारण पहले सी ही विश्व कप का प्रोग्राम गड़बड़ाया हुआ था और बिलकुल आख़िरी समय पर उन्होंने 15 फरवरी का भारत के विरुद्ध मैच खेलने से इनकार कर, इस विश्व कप को अस्थिर बनाने में कोई कमी न रखी। आखिर में वे खेले भी।
ये विश्व कप दो और ख़ास बातों के लिए भी याद रहेगा। ऑस्ट्रेलिया के प्रभुत्व को मिली चुनौती और एक नई क्रिकेट पहचान का बनना। ऑस्ट्रलिया तो ग्रुप राउंड में ही बाहर हो गया और जिम्बाब्वे ने सुपर 8 में उनकी जगह ली। सबसे ज्यादा तो आईसीसी के एसोसिएट सदस्य देशों ने प्रभावित किया। यहां तक कि नेपाल जैसी टीम, इंग्लैंड को हराने के कगार पर थी। ये सभी एसोसिएट सदस्य देश इस वर्ल्ड कप से मैच खेलने के पैसे का चेक लेकर ही अपने-अपने देश वापस नहीं लौटे, वे अपनी क्रिकेट के लिए एक नई पहचान के साथ लौटे। आईसीसी के टूर्नामेंट को 20 टीम का बनाने के फैसले को सही साबित किया। संजू सैमसन : प्लेयर ऑफ टूर्नामेंट
भारतीय विकेटकीपर-बल्लेबाज संजू सैमसन ने आखिरी तीन मैच में 97*, 89 और 89 के स्कोर नहीं बनाए, ये साबित किया कि खिलाड़ी की योग्यता को टीम के विश्वास और भरोसे की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। वे इन 3 स्कोर की बदौलत, भारत के सभी मैच में न खेलने के बावजूद, नंबर 1 स्कोरर बन गए और प्लेयर ऑफ टूर्नामेंट भी। उनके 5 पारी में 321 रन एक रिकॉर्ड हैं। पूरे टूर्नामेंट में, सैमसन ने 24 छक्के भी लगाए, जो सबसे ज्यादा छक्के हैं।
कुछ और यादगार प्रदर्शन में टूर्नामेंट के इतिहास का सबसे तेज शतक बना। न्यूज़ीलैंड के फिन एलन ने सेमीफाइनल में सिर्फ 33 गेंदों पर 100 रन बनाए। पाकिस्तान के साहिबज़ादा फरहान सबसे ज्यादा रन बनाने वालों में से एक बने और 383 रन बनाए। कनाडा के युवराज समरा ने एक पारी में 110 रन बनाकर टूर्नामेंट का सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर बनाया जबकि ज़िम्बाब्वे के ब्रायन बेनेट ने टूर्नामेंट के दौरान 146 का सबसे ज़्यादा बल्लेबाजी औसत दर्ज किया। भारत के जसप्रीत बुमराह और वरुण चक्रवर्ती 14-14 विकेट लेकर लिस्ट में टॉप पर रहे। वेस्टइंडीज़ के रोमारियो शेफर्ड ने 5/20 के साथ टूर्नामेंट का गेंदबाजी में सबसे बेहतर प्रदर्शन किया। आयरलैंड के जोश लिटिल का टूर्नामेंट का गेंदबाजी औसत सिर्फ़ 5.33 था।


