नई दिल्ली : आंद्रेस एस्कोबार को दुनिया फुटबॉल के सबसे सभ्य और शांत खिलाड़ियों में गिनती थी। मैदान पर ईमानदारी से खेलने और शानदार व्यवहार की वजह से उन्हें ‘द जेंटलमैन’ कहा जाता था। हालांकि, फीफा विश्व कप 1994 में हुई एक गलती उनकी जिंदगी पर भारी पड़ गई। टूर्नामेंट के दौरान आत्मघाती गोल करने के बाद उन्हें भारी आलोचनाओं और दबाव का सामना करना पड़ा।
यही आत्मघाती गोल कथित तौर पर उनकी मौत का कारण बना और यह घटना आज भी फुटबॉल इतिहास की सबसे दर्दनाक कहानियों में गिनी जाती है। अमेरिका के खिलाफ मैच में हुई उस गलती के बाद कोलंबिया वर्ल्ड कप से बाहर हो गया और सिर्फ पांच दिन बाद एस्कोबार की गोली मारकर हत्या कर दी गई। माना गया कि यह हत्या उसी ‘आत्मघाती गोल’ और उससे जुड़े सट्टे में हुए नुकसान का बदला थी। फुटबॉल इतिहास की यह घटना आज भी दुनिया की सबसे दर्दनाक खेल घटनाओं में गिनी जाती है।
सामान्य परिवार से निकलकर फुटबॉल का ‘जेंटलमैन’ बना आंद्रेस एस्कोबार
आंद्रेस एस्कोबार का जन्म 13 मार्च 1967 को कोलंबिया के मेडेलिन (Medellin) शहर में हुआ था। वह एक सामान्य परिवार में पले-बढ़े। स्कूल के दिनों से ही वह फुटबॉल खेलते थे और बाद में यही उनका करियर बन गया। उनके पिता डारियो एस्कोबार (Dario Escobar) बैंकर थे। डारियो एस्कोबार ने एक ऐसा संगठन बनाया था, जो युवाओं को सड़कों पर भटकने के बजाय फुटबॉल खेलने का मौका देता था। उनके भाई सैंटियागो एस्कोबार (Santiago Escobar) भी फुटबॉलर रहे। बाद में वह टीम मैनेजमेंट में चले गए।
क्लब और अंतरराष्ट्रीय करियर में बनाया खास मुकाम
आंद्रेस एस्कोबार पूरे करियर में डिफेंडर के तौर पर खेले। उनकी जर्सी नंबर दो थी। उन्हें ‘एल काबालेरो डेल फुटबोल’ यानी ‘जेंटलमैन ऑफ फुटबॉल’ और ‘द इम्मॉर्टल नंबर 2’ जैसे नामों से जाना जाता था। क्लब फुटबॉल के बाद कोलंबिया की राष्ट्रीय टीम के लिए उन्होंने 30 मार्च 1988 को कनाडा के खिलाफ डेब्यू किया। कोलंबिया ने वह मैच 3-0 से जीता था। आंद्रेस एस्कोबार ने उसी साल राउस कप में इंग्लैंड के खिलाफ 1-1 के ड्रॉ मैच में अपने अंतरराष्ट्रीय करियर का इकलौता गोल किया। आंद्रेस एस्कोबार ने 1989 कोपा अमेरिका में चार मैच खेले, लेकिन टीम पहले दौर में ही बाहर हो गई।
इसके बाद उन्होंने 1990 फीफा वर्ल्ड कप क्वालिफायर में हिस्सा लिया। कोलंबिया ने इजरायल को हराकर 28 साल बाद वर्ल्ड कप में जगह बनाई। फीफा वर्ल्ड कप 1990 में आंद्रेस एस्कोबार ने अपनी टीम के सभी मैच खेले। कोलंबिया अंतिम-16 दौर तक पहुंचा, जहां उसे कैमरून के खिलाफ 1-2 से हार झेलनी पड़ी। उन्होंने 1991 कोपा अमेरिका में सात मैच खेले। हालांकि, 1994 वर्ल्ड कप क्वालिफिकेशन में उन्होंने कोई मैच नहीं खेला, लेकिन उन्हें वर्ल्ड कप टीम में शामिल किया गया।
वह आत्मघाती गोल जिसने आंद्रेस एस्कोबार की जिंदगी बदल दी
1994 फीफा वर्ल्ड कप में कोलंबिया का दूसरा ग्रुप मैच मेजबान अमेरिका के खिलाफ था। इसी मुकाबले में आंद्रेस एस्कोबार से वह आत्मघाती गोल हुआ, जो बाद में उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी त्रासदी बन गया। अमेरिकी मिडफील्डर जॉन हार्क्स के क्रॉस को रोकने की कोशिश में आंद्रेस एस्कोबार ने गेंद को गलती से अपने ही गोलपोस्ट में पहुंचा दिया। इससे अमेरिका को 1-0 की बढ़त मिली और आखिरकार उसने मैच 2-1 से जीत लिया।
इस हार के बाद कोलंबिया के लिए अगले दौर में पहुंचना मुश्किल हो गया। टीम को अपने अंतिम मैच में स्विट्जरलैंड को हराना था और साथ ही अमेरिका को रोमानिया से हारना भी जरूरी था। कोलंबिया ने स्विट्जरलैंड को 2-0 से हरा दिया, लेकिन रोमानिया ने अमेरिका को 1-0 से मात दे दी। इसके साथ ही कोलंबिया ग्रुप ए में सबसे नीचे रहकर टूर्नामेंट से बाहर हो गया।
विश्व कप से लौटने के पांच दिन बाद हुई दर्दनाक हत्या
फीफा वर्ल्ड कप से बाहर होने के बाद आंद्रेस एस्कोबार ने लास वेगास में अपने रिश्तेदारों से मिलने के बजाय कोलंबिया लौटने का फैसला किया। एक जुलाई 1994 की रात वह अपने दोस्तों के साथ इलाके के एक बार में गए। बाद में वह एक शराब की दुकान और फिर एक नाइटक्लब पहुंचे। कुछ समय बाद उनके दोस्त अलग हो गए। सुबह करीब 3 बजे आंद्रेस एस्कोबार नाइटक्लब के पार्किंग एरिया में अपनी कार के पास पहुंचे थे।
आंद्रेस एस्कोबार वहां अकेले थे, तभी तीन लोग वहां पहुंचे और उनसे बहस करने लगे। दो लोगों ने पिस्तौल निकाल ली। आंद्रेस एस्कोबार को 0.38 कैलिबर की पिस्तौल से छह गोलियां मारी गईं। रिपोर्ट्स में बताया गया कि हमलावर हर गोली के बाद ठीक वैसे ही ‘गोल-गोल’ चिल्ला रहा था, जैसे फुटबॉल कमेंटेटर गोल होने पर चिल्लाते हैं। हमलावर वहां से पिकअप ट्रक में बैठकर भाग गए।
अस्पताल में हुई मौत, दुनिया भर में हड़कंप
आंद्रेस एस्कोबार खून से लथपथ वहीं पड़े रहे। आंद्रेस एस्कोबार को अस्पताल ले जाया गया। वहां 45 मिनट बाद उनकी मौत हो गई। उस समय उनकी उम्र सिर्फ 27 साल थी। आंद्रेस एस्कोबार की हत्या को उस आत्मघाती गोल की सजा माना गया। ब्रिटेन में बीबीसी को सार्वजनिक माफी मांगनी पड़ी। दरअसल, बीबीसी के फुटबॉल विशेषज्ञ एलन हैनसेन ने वर्ल्ड कप के दौरान कहा था, ‘‘ऐसी गलती करने वाले डिफेंडर को गोली मार देनी चाहिए।’’ यह टिप्पणी आंद्रेस एस्कोबार की हत्या के अगले दिन प्रसारित हुई थी।
जांच, सजा और विवाद
हत्या के बाद हुम्बर्टो कास्त्रो मुनोज को गिरफ्तार किया गया। उसने अगले दिन हत्या की बात स्वीकार की। हुम्बर्टो कास्त्रो नशीले पदार्थों की तस्करी से जुड़े गिरोह के लिए काम करता था और सैंटियागो गालोन नाम के व्यक्ति का ड्राइवर और बॉडीगार्ड था। आरोप था कि सैंटियागो गालोन ने कोलंबिया टीम पर भारी सट्टा लगाया था और टीम की हार से उसे बड़ा नुकसान हुआ था, इसलिए जांच में उसका नाम भी सामने आया।
जून 1995 में हुम्बर्टो कास्त्रो को हत्या का दोषी पाया गया और उसे 43 साल जेल की सजा सुनाई गई। बाद में 2001 में यह सजा घटाकर 26 साल कर दी गई। अच्छे व्यवहार, जेल में काम और पढ़ाई के आधार पर हुम्बर्टो कास्त्रो को 2005 में रिहा कर दिया गया। उसके तीन सहयोगियों को भी बरी कर दिया गया। बाद में आरोप लगे कि गालोन भाइयों ने जांच को प्रभावित करने के लिए सरकारी अधिकारियों को रिश्वत दी थी, ताकि कास्त्रो को ही मुख्य आरोपी बनाया जाए।
जांच प्रभावित करने का आरोप
आंद्रेस एस्कोबार की मंगेतर पामेला कास्कार्डो का मानना था कि इतने बड़े राष्ट्रीय खिलाड़ी की हत्या करने वाला व्यक्ति केवल 11 साल जेल में रहा। यह इस बात का संकेत है कि जांच प्रभावित हुई थी। आंद्रेस एस्कोबार गर्लफ्रेंड पामेला कास्कार्डो के साथ पांच साल से रिश्ते में थे। पामेला पेशे से डेंटिस्ट थीं और दोनों 1994 में शादी करने वाले थे। साल 2013 में आंद्रेस एस्कोबार के पूर्व कोच फ्रांसिस्को मातुराना ने कहा कि उनकी हत्या का संबंध फुटबॉल या फीफा वर्ल्ड कप से नहीं था, बल्कि उस समय के हिंसा से जूझ रहे कोलंबिया में ‘गलत समय पर गलत जगह’ पर होने से था। साल 2026 में सैंटियागो गालोन की मेक्सिको के हुइक्सकिलुकान शहर के एक रेस्तरां में गोली मारकर हत्या कर दी गई।
आंद्रेस एस्कोबार की याद आज भी फुटबॉल दुनिया में जिंदा
आंद्रेस एस्कोबार ने अपने जीवन में कोलंबिया की सकारात्मक पहचान बनाने के लिए लगातार काम किया। उनके शांत स्वभाव, शानदार व्यवहार और खेल भावना की दुनियाभर में सराहना हुई। उनकी मौत के बाद परिवार ने ‘आंद्रेस एस्कोबार प्रोजेक्ट’ की शुरुआत की, जिसके जरिए गरीब बच्चों को फुटबॉल सीखने का मौका दिया जाता है। कोपा अमेरिका 2001 से पहले मेडेलिन शहर में उनकी याद में एक प्रतिमा स्थापित की गई, जबकि बाद में शहर के एक बड़े खेल परिसर का नाम भी उनके नाम पर रखा गया।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार आंद्रेस एस्कोबार के अंतिम संस्कार में एक लाख बीस हजार से अधिक लोग शामिल हुए थे। आज भी फुटबॉल प्रशंसक मैचों में उनकी तस्वीरें लेकर पहुंचते हैं और उन्हें श्रद्धांजलि देते हैं। अपनी हत्या से कुछ समय पहले उन्होंने एक अखबार में लिखा था, “यह एक अद्भुत और दुर्लभ अनुभव रहा। हम जल्द फिर मिलेंगे, क्योंकि जिंदगी यहां खत्म नहीं होती।”
फिल्मों और सीरीज में भी दिखाई गई इस दर्दनाक कहानी की झलक
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार साल 2010 में ‘द टू एस्कोबार्स’ नाम की डॉक्यूमेंट्री रिलीज हुई, जिसमें आंद्रेस एस्कोबार की मौत, 1994 विश्व कप और कोलंबिया के अपराध जगत के संबंधों को दिखाया गया। इसके बाद साल 2022 में आंद्रेस एस्कोबार के जीवन पर आधारित ‘गोलेस एन कॉन्ट्रा’ नाम की मिनी-सीरीज भी रिलीज हुई, जिसने उनकी दर्दनाक कहानी को एक बार फिर दुनिया के सामने रखा।


