नई दिल्ली: हाल ही में पुरुष एशिया कप के दौरान भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट से ज्यादा राजनीतिक विवादों ने सुर्खियां बटोरीं। खासतौर पर तब विवाद खड़ा हुआ जब लीग स्टेज मुकाबले में भारतीय खिलाड़ियों ने पाकिस्तान टीम के खिलाड़ियों से हाथ मिलाने से परहेज़ किया। इस घटना को लेकर पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने कड़ा ऐतराज़ जताया और मैच रेफरी एंडी पाइक्राफ्ट के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। साथ ही मामला आईसीसी तक भी पहुंचाया गया। हालांकि, तब आईसीसी ने यह कहते हुए खुद को इससे अलग कर लिया कि एशिया कप एसीसी (एशियन क्रिकेट काउंसिल) द्वारा आयोजित टूर्नामेंट है, और वह इसमें सीधे तौर पर हस्तक्षेप नहीं कर सकती।
अब जब महिला वनडे वर्ल्ड कप शुरू होने जा रहा है, तो 5 अक्टूबर को भारत-पाकिस्तान महिला मुकाबले से पहले एक बार फिर इसी तरह का मुद्दा चर्चा में है। सवाल यह है कि क्या भारतीय महिला टीम भी पुरुष टीम की तरह पाकिस्तान की खिलाड़ियों से हाथ नहीं मिलाएगी, या फिर इस बार आईसीसी के कड़े प्रोटोकॉल के चलते उन्हें ऐसा करना पड़ेगा? टूर्नामेंट की गरिमा और खेल भावना के बीच यह एक संवेदनशील मुद्दा बन गया है, जिस पर सभी की निगाहें टिकी हैं।
क्या खिलाड़ी हाथ मिलाने के लिए बाध्य हैं? समझिए नियमों की स्थिति
दरअसल अगर नियमों की बात की जाए तो ऐसा कोई भी नियम नहीं है कि मैच के बाद एक टीम के खिलाड़ियों का दूसरी टीम के खिलाड़ियों से हाथ मिलाना जरूरी हो। मगर खेल की भावना के मद्देनजर ऐसा किया जाता है। जब भारत और पाकिस्तान के बीच हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर के बाद हुई गहमागहमी से माहौल बिगड़ा तो भारतीय पुरुष टीम के कप्तान सूर्यकुमार यादव ने मैदान पर भी इसका विरोध किया। उन्होंने एशिया कप 2025 के दौरान तीनों मैचों में पाकिस्तानी टीम से ना हाथ मिलाया ना ही कोई बात की। वहीं टूर्नामेंट के बाद एसीसीसी चीफ व पीसीबी चेयरमैन मोहसिन नकवी से ट्रॉफी और मेडल भी भारतीय टीम ने नहीं लिए। मगर वो आईसीसी टूर्नामेंट नहीं था इसलिए इस पूरे विवाद पर आईसीसी शांत रहा। मगर अब महिला वनडे वर्ल्ड कप में अगर यह विवाद छिड़ा तो आईसीसी का प्रोटोकॉल भारतीय उसूलों के आड़े आ सकता है।
इस मामले पर अभी कोई भी स्पष्ट जानकारी नहीं है ना ही भारतीय महिला टीम या कप्तान हरमनप्रीत कौर को कई निर्देश दिए गए हैं। अगर वे वर्ल्ड कप में सूर्यकुमार यादव के कदमों पर चलती हैं और पाकिस्तान की तरफ से आईसीसी में शिकायत की जाती है तो आईसीसी भी इस मामले में हस्तक्षेप कर सकता है। ऐसे में अभी इसको लेकर कुछ भी स्पष्ट नहीं है कि भारतीय महिला टीम पाकिस्तान की खिलाड़ियों से हाथ मिलाती है या नहीं। अगर पिछली बार की बात करें तो जब भारत और पाकिस्तान की महिला टीमें भिड़ी थीं तो मैदान के बाहर ड्रेसिंग रूम में काफी दोस्ती नजर आई थी। भारतीय टीम की खिलाड़ी पाकिस्तान की बिस्माह मरूफ के बच्चे को भी गोद में खिलाते दिखी थीं। मगर इस बार हालात एकदम उलट हैं ऐसे में इस दोस्ती को तो छोड़िए यह कहना भी मुश्किल है कि दोनों टीमें हैंडशेक करेंगी भी या नहीं।
पूर्व महिला क्रिकेटर ने क्या कहा? जानिए उनकी साफ राय
इस पूरे मामले पर इंडियन एक्सप्रेस ने भारत की दो पूर्व महिला क्रिकेटरों से भी बात की। इस मामले पर बात करते हुए भारत के लिए 1978 वर्ल्ड कप खेलने वाली शोभा पंडित ने कहा,’मौजूदा समय में जो स्थिति है उसको देखते हुए साफतौर पर सभी खिलाड़ी खेल के अलावा उसमें आने वाली राजनीति को लेकर तनाव में होंगी। लेकिन मैं भारतीय टीम और कप्तान हरमनप्रीत को बैक करूंगी चाहें वो हाथ मिलाएं , ना मिलाएं, गले लगाएं ना लगाएं, बात करें ना करें।’ वहीं भारतीय टीम के लिए 1984 से 1995 तक 13 टेस्ट और 21 वनडे खेल चुकीं संध्या अग्रवाल ने साफतौर पर कहे दिया की हरमनप्रीत को सूर्यकुमार यादव के जैसा ही करना चाहिए। उन्होंने कहा,’यह बिल्कुल वैसे ही होना चाहिए जैसे पुरुष टीम ने किया। हरमनप्रीत को ठीक उसी तरह पाकिस्तान टीम से पेश आना चाहिए जैसे सूर्या ने किया। लेकिन मुझे ऐसा नहीं लगता कि इससे कोई अतिरिक्त तनाव या दबाव आना चाहिए।’


